बीमार पैदा हुई बच्‍ची तो मां ने कूड़े में फेंक द‍िया, शेल्टर होम में म‍िली नई ज‍िंदगी Gorakhpur News

प्री मैचयोर बच्‍ची को मां ने कूड़े में फेंक द‍िया। देवरिया में लावारिस मिली इस बच्‍ची को बाल कल्याण समिति देवरिया के आदेश से एशियन सहयोगी संस्था के सिपुर्द किया गया। बच्‍ची जब मिली थी तो उसकी उम्र भी बहुत कम थी। उसके सिर में इंफेक्शन था।

Pradeep SrivastavaSun, 13 Jun 2021 01:46 PM (IST)
बच्‍ची प्री मैच्‍योर पैदा हुई तो मां ने उसे कूड़े के ढ़ेर में फेंक द‍िया। - प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

गोरखपुर, उमेश पाठक। उसे धरती पर आए मात्र 15 दिन हुए थे। पैदा होने पर वह कमजोर थी, सिर में इंफेक्शन हुआ, आंखों में खराबी दिखी तो जन्म देने वाले माता-पिता ने उसे फेंक दिया। लेकिन, ईश्वर उसकी रक्षा के लिए खड़े थे। किसी की सूचना पर बच्‍ची बाल कल्याण समिति देवरिया को मिली। वहां से लालन पालन की जिम्मेदारी गोरखपुर जेल बाईपास रोड स्थित एशियन सहयोगी संस्था को दी गई। अब यह संस्था ही बच्‍ची का सहारा है। उसके सिर का घाव ठीक हो चुका है और आखों के आपरेशन की तैयारी है। तीन महीने की हो चुकी इस ब'ची के चेहरे पर मुस्कान है और उसे नया जीवन मिल चुका है।

यह है मामला

देवरिया में लावारिस मिली इस बच्‍ची को 20 फरवरी 2021 को बाल कल्याण समिति देवरिया के आदेश से एशियन सहयोगी संस्था के सिपुर्द किया गया। यह बच्‍ची प्री मेच्‍योर (समय से पहले पैदा हुई) थी। जब मिली थी तो उसकी उम्र भी बहुत कम थी। उसके सिर में इंफेक्शन था और मवाद भरा था। सिर में एक छेद भी नजर आता था। उसकी दोनों आंखों में भी समस्या है। इसी हालत में संस्था ने उसे मेडिकल कालेज में भर्ती कराया। 20 दिनों में सिर का घाव ठीक हो गया तो उसे आंख के इलाज के लिए मेडिकल कालेज से ङ्क्षकग जार्ज मेडिकल विश्वविद्यालय (केजीएमयू) लखनऊ ले जाने को कहा गया। वहां जांच में पता चला कि ब'ची की एक आंख में ग्लूकोमा है तो दूसरी का रेटिना खराब है। एक सप्ताह में ब'ची की अंतिम जांच होगी, उसके बाद आपरेशन करने पर निर्णय लिया जाएगा।

जिला बाल संरक्षण अधिकारी कर रहीं निगरानी

ब'ची की स्वास्थ्य एवं उसकी देखभाल की निगरानी जिला बाल संरक्षण अधिकारी डा. सुमन शुक्ला कर रही हैं। अतिरिक्त बाल कल्याण अधिकारी विकास श्रीवास्तव, एशियन सहयोगी संस्था की ओर से अधीक्षक रवि साइमन एवं अनीता मूसा उसकी देखभाल कर रही हैं।

बाल कल्याण समिति देवरिया की ओर से 15 दिन की ब'ची गोरखपुर की संस्था को मिली थी। जन्म के समय से ही वह काफी कमजोर थी। उसके सिर में इंफेक्शन के साथ आंख में भी दिक्कत थी। एशियन सहयोगी संस्था इलाज करा रहा है, बच्‍ची स्वस्थ है। उसके स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है। - डा. सुमन शुक्ला, जिला बाल संरक्षण अधिकारी गोरखपुर।

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