Railway News: ठंड के पहले ही ठंड पड़ गई डिस्पोजेबल कंबल की व्यवस्था

रेलवे में बेडरोल की व्‍यवस्‍था ठंड से पहले ही ठंडी हो गई। गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को खरीदने पर भी कंबल और चादर नहीं मिल रहे। फर्म ने नुकसान का हवाला देते हुए बेडरोल के साथ अन्य सामानों के बिक्री की गुहार लगाई है।

Pradeep SrivastavaWed, 27 Oct 2021 06:30 AM (IST)
गोरखपुर रेलवे स्‍टेशन पर अब बेडरोल व कंबल नहीं म‍िलेंगे। - फाइल फोटो

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। ठंड के पहले ही रेलवे के बेडरोल (कंबल, चादर, तकिया, तौलिया आदि) ठंडे पड़ गए हैं। अब तो गोरखपुर स्टेशन पर यात्रियों को खरीदने पर भी कंबल और चादर नहीं मिल रहे। प्लेटफार्म नंबर एक पर स्थित डिस्पोजेबल बेडरोल का स्टाल भी बंद हो गया है। फर्म ने नुकसान का हवाला देते हुए बेडरोल के साथ अन्य सामानों के बिक्री की गुहार लगाई है। रेलवे प्रशासन है कि बेडरोल के अलावा दूसरे सामानों की बिक्री पर रोक लगा दी है। जबकि, रेलवे बोर्ड ने कोरोना संक्रमण का हवाला देते हुए एक जून 2020 से ही वातानुकूलित बोगियों से बेडरोल और पर्दा हटा दिया है। मामला जो भी है, बदलते मौसम में यात्रियों को चादर और कंबल की जरूरत महसूस होने लगी है। एक साल से अधिक हो गए लेकिन यात्रियों को बेडरोल की सुविधा नहीं मिल पा रही। यह तब है जब स्थिति लगभग सामान्य हो गई है। 70 में से पूर्वोत्तर रेलवे की 67 एक्सप्रेस ट्रेनें चलने लगी हैं।

स्टेशन का स्टाल भी बंद, यात्रियों को खरीदने पर भी नहीं मिल रहे कंबल व चादर

एक्सप्रेस ट्रेनों में भी जनरल टिकट पर यात्रा की तैयारी शुरू हो गई है। गोरखपुर से दिल्ली और कोलाकाता की यात्रा करने वाले व्यवसायी संजय कुमार कहते हैं, रास्ते में सर्वाधिक परेशानी बुजर्ग और बच्चों को होती है। आखिर, यात्रा में कोई कितना सामान लेकर चलेगा। लोग वैसे भी घर से नाश्ता और खाना लेकर चल रहे हैं। ऊपर से चादर और कंबल लेकर सफर करना मुश्किल होता है। बेडरोल के नाम पर किराया तो कम हुआ नहीं, बल्कि स्पेशल के नाम पर और बढ़ता जा रहा है।

लाउंड्री में कंडम हो रहे करोड़ों के हजारों बेडरोल

एक तरफ यात्रियों को पैसे देने पर भी कंबल और चादर नहीं मिल रहे। दूसरी तरफ रेलवे के मैकेनाइज्ड लाउंड्री में करोड़ों के हजारों बेडरोल कंडम हो रहे हैं। लाकडाउन के साथ ही 23 मार्च 2020 से उनका उपयोग नहीं हो रहा है। गोरखपुर स्थित लाउंड्री में ही 55 हजार से अधिक चादरों की उम्र पूरी हो चकी है। अब यह चादरें उपयोग के लायक नहीं रह गई हैं। इसके अलावा करीब 15 हजार कंबल के अलावा तौलिया और तकिये भी पड़े हैं। हालांकि, रेलवे प्रशासन ने जरूरत के अनुसार कंबलों और चादरों का उपयोग अस्पतालों, रनिंग रूम और डारमेट्री में कर रहा है, लेकिन इससे कोई राहत मिलने वाली नहीं है।

अगर यही स्थिति रही तो रेलवे से बेडरोल का कांसेप्ट ही समाप्त हो जाएगा। हालांकि, रेलवे बोर्ड ने कुछ माह पहले सभी जोन से बेडरोल की सूची मांगी थी। कोविड की स्थिति में सुधार है। किंतु इससे संबंधित सभी प्रावधानों का अनुपालन आवश्यक है। इन्ही प्रावधानों के अंतर्गत ट्रेनों में ब्लैंकेट, चादर एवं पर्दे अभी नही दिए जा रहे हैं। नवप्रयोग के तौर पर यात्रियों के लिए गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर डिस्पोजेबल कंबल एवं चादर के लिए एक शाप खाली गई है। लेकिन मांग बहुत कम होने के कारण अभी बंद है। - पंकज कुमार सिंह, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी- पूर्वोत्तर रेलवे।

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