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गोरखपुर में कोरोना इलाज के नाम पर निजी अस्‍पतालों में दस गुना तक हो रही वसूली

गोरखपुर के निजी अस्‍पतालों में इलाज के नाम पर लूट मची है। - प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

गोरखपुर में कोरोना संक्रमण के इलाज के नाम पर निजी अस्‍पतालों में लूट मची है। निजी अस्‍पताल संचालक सरकार द्वारा निर्धारित दर से दस गुना अधिक तक रुपये ले रहे हैं और प्रशासनिक मशीनरी कुछ नहीं कर पा रही है।

Pradeep SrivastavaTue, 04 May 2021 12:30 PM (IST)

गोरखपुर, जेएनएन। सरकारी अस्पतालों में बेड की कमी के चलते शासन ने निजी अस्पतालों को कोविड मरीजों के इलाज की अनुमति दी है। साथ ही अस्पताल व मरीजों के अनुसार प्रतिदिन का खर्च भी तय कर दिया है। लेकिन अस्पतालों में शासन द्वारा निर्धारित दर से लगभग 10 गुना अधिक रुपये वसूले जा रहे हैं। ज्यादातर अस्पतालों में भर्ती होने के समय ही दो लाख रुपये जमा करा लिए जा रहे हैं। चार दिन के इलाज में चार से साढ़े चार लाख रुपये लग रहे हैं। जबकि शासन द्वारा निर्धारित दर के अनुसार एक दिन का अधिकतम खर्च 20 हजार रुपये है। वह भी अति गंभीर मरीजों का। संकट के समय में निजी अस्पतालों की लूट जारी है और स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन आंख मूंदे हुए हैं।

केवल नाम की निगरानी कर रहा स्‍वास्‍थ्‍य विभाग

स्वास्थ्य विभाग ने एक समिति भी बनाई है, जिसे निजी अस्पतालों में जाकर जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। टीम यह जांच करती है? कि कोविड प्रोटोकाल के अनुसार इलाज हो रहा है? या नहीं। बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की क्या व्यवस्था है? कोविड संक्रमण के दौरान टीम या तो अस्पतालों की जांच करने जा नहीं रही है? अथवा उसे मोतियाबिंद हो गया है। शासन के नियमों की अनदेखी उसे दिखाई नहीं पड़ रही है। टीम ने अभी तक एक भी ऐसा मामला नहीं पकड़ा है? और न ही किसी अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की है। जबकि अनेक अस्पतालों के पास बायोमेडिकल वेस्ट का अंबार लगा हुआ है।

ऐसे हो रही लूट

बेलीपार व घंटाघर निवासी दो मरीजों को स्थिति गंभीर होने पर अलग-अलग निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। उनसे दो लाख रुपये भर्ती होने के समय ही जमा करा लिए गए। बेलीपार का मरीज चार दिन भर्ती रहा, अंतत: उसकी मौत हो गई। उसके इलाज पर कुल साढ़े चार लाख रुपये खर्च हुए। घंटाघर के मरीज से ढाई लाख रुपये जमा कराए गए। वहां की व्यवस्था अच्छी न होने से मरीज ने डिस्चार्ज करने को कहा तो अस्पताल प्रबंधन ने डिस्चार्ज करने से मना कर दिया। बहुत कोशिश के बाद उन्हें डिस्चार्ज किया गया लेकिन प्रबंधन ने डेढ़ लाख रुपये एक दिन के इलाज का खर्च काट लिया।

शासन द्वारा निर्धारित रेट

उच्च सुविधा वाले अस्पतालों में खर्च

आइसोलेशन बेड- 11200

गंभीर मरीजों का खर्च- 17000

अति गंभीर मरीजों का खर्च- 20000

सामान्य अस्पताल

आइसोलेशन बेड- 9200

गंभीर मरीजों का खर्च- 15000

अति गंभीर मरीजों का खर्च- 17000

अभी तक निजी अस्पतालों द्वारा निर्धारित दर से अधिक रुपये लेने की शिकायत नहीं आई है। जांच टीम को भी ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। - डा. सुधाकर पांडेय, सीएमओ

शासन की ओर से कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए फीस निर्धारित की गई है। यदि अधिक पैसा वसूलने की शिकायत मिलती है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में मंडलायुक्त के स्तर पर एक कमेटी भी गठित की गई है। वहां भी शिकायत की जा सकती है। किसी की दशा में मरीज या उनके स्वजन को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। - के. विजयेंद्र पाण्डियन, जिलाधिकारी।

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