फर्जी अंकपत्र पर नौकरी हथियाने वाला शिक्षक बर्खास्त, 88 फर्जी श‍िक्षक पहले हो चुके हैं बर्खास्‍त

हाईस्कूल व इंटर के फर्जी अंक पत्र पर मृतक आश्रित कोटे के तहत नौकरी हासिल करने के आरोप में शिक्षक विनय कुमार की विभाग द्वारा सेवा समाप्त कर दी गई। गोरखपुर में बर्खास्‍त होने वाले फर्जी श‍िक्षकों की संख्‍या अब 89 हो गई है।

Pradeep SrivastavaTue, 14 Sep 2021 05:30 PM (IST)
फर्जी अंकपत्र पर नौकरी करने वालेे श‍िक्षक को व‍िभाग ने बर्खास्‍त कर द‍िया है। - प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। गोरखपुर में फर्जी अंकपत्र पर नौकरी करने वाले शिक्षकों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। पकड़े जाने पर हाईस्कूल व इंटर के फर्जी अंक पत्र पर मृतक आश्रित कोटे के तहत नौकरी हासिल करने के आरोप में शिक्षक विनय कुमार की विभाग द्वारा सेवा समाप्त कर दी गई। खजनी ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय पल्हीपार बाबू में तैनात शिक्षक के विरुद्ध शिकायत के आधार पर हुई जांच के बाद बीएसए ने कार्रवाई की है।

बर्खास्त शिक्षक विनय की नियुक्ति 23 जनवरी 1999 को पिता के निधन के बाद मृतक आश्रित कोटे से हुई थी। विकास खंड के मुड़देवा निवासी अजय कुमार ने 15 जून 2020 को बीएसए कार्यालय में शिक्षक के फर्जी अंकपत्र पर नौकरी हासिल करने की शिकायत की। जिसके बाद बीएसए ने नोटिस जारी करते हुए शिक्षक को तत्काल निलंबित कर बीआरसी खजनी से संबद्ध कर दिया और मामले की जांच खंड शिक्षाधिकारी बीके राय को सौंपी।

जांच तथा हाईस्कूल व इंटर के बोर्ड से प्राप्त सत्यापन आख्या के परीक्षण में अंकपत्र फर्जी पाया गया। जिसके बाद बीएसए ने बर्खास्तगी की कार्रवाई करते हुए वेतन रिकवरी करने का आदेश दिया। इस संबंध में बीएसए रमेंद्र कुमार स‍िंह ने बताया कि जांच में हाईस्कूल व इंटर का अंकपत्र फर्जी मिलने पर शिक्षक को बर्खास्त कर दिया गया है। संबंधित शिक्षक से रिकवरी के आदेश भी दे दिए गए हैं।

जिले में 88 पहुंची बर्खास्त शिक्षकों की तादाद

फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी के मामले में जिले में अब तक बर्खास्त शिक्षकों की तादाद 89 पहुंच चुकी है। अब तक दो दर्जन से अधिक शिक्षक निलंबित हो चुके हैं। निलंबित शिक्षकों के विरुद्ध संबंधित ब्लाकों के खंड शिक्षाधिकारी द्वारा जांच की जा रही है। निलंबित शिक्षकों की बर्खास्तगी खंड शिक्षाधिकारियों की जांच रिपोर्ट के आधार पर तय होगा।

कक्षा नौ पास को रिटायर्ड प्रोफेसर बता बंद कर दी वृद्धा पेंशन

पंचायत सचिव की गलत रिपोर्ट ने बुजुर्ग महिला आशा देवी को मुश्किल में डाल दिया है। आरोप है कि उनके पति शरद चंद्र शुक्ल कक्षा नौ पास हैं, जबकि पंचायत सचिव ने अपनी रिपोर्ट में उन्हें रिटायर्ड प्रोफेसर दर्ज कर दिया है। रिटायर्ड प्रोफेसर को सरकार से पेंशन मिलने का हवाला देकर सचिव ने उनकी वृद्धा पेंशन बंद करा दी है। महिला की शिकायत पर एसडीएम ने जांच के आदेश दिए हैं। सहजनवां ब्लाक के हरपुर गांव निवासी शरद चंद शुक्ला की पत्नी आशा देवी ने उपजिलाधिकारी समेत उ'चाधिकारियों को शिकायती पत्र भेजा है।

आशा देवी का कहना है कि पिछले तीन वर्षों से उन्हें पेंशन मिल रही थी। सितंबर की पेंशन खाते में नहीं आई तो उन्होंने इसकी पड़ताल कराई। पता चला कि पिछले माह पंचायत सचिव ने जांच की थी, जिसके आधार पर उनके पति को रिटायर्ड प्रोफेसर बता दिया, इसी वजह से उनकी पेंशन बंद हो गई। एसडीएम सुरेश कुमार राय ने बताया कि शिकायत मिली है, इसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पंचायत सचिव से पक्ष लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

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