सीबीएसई का नया न‍ियम, 30 सितंबर तक फार्म नहीं भरा तो दुबारा नहीं म‍िलेगा मौका

सीबीएसई का नियम स्कूलों के लिए गले की हड्डी बन गया है। बोर्ड ने हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा के लिए फार्म भरने की तिथि 30 सितंबर निर्धारित की है। यदि सिर्फ शुल्क जमा करने वाले विद्यार्थियों का ब्योरा भेजते हैं तो शेष का नाम सूची से डिलीट करना पड़ेगा।

Pradeep SrivastavaTue, 28 Sep 2021 11:26 AM (IST)
सीबीएसई बोर्ड के नए न‍ियम से हजारों छात्रों के सामने संकट पैदा हो गया है। - प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। CBSE New Rule: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) का नियम स्कूलों के लिए गले की हड्डी बन गया है। बोर्ड ने हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा के लिए फार्म भरने की तिथि 30 सितंबर निर्धारित की है। अभी भी कई विद्यार्थी ऐसे हैं जिन्होंने आवेदन शुल्क जमा नहीं किया है। अब स्कूलों के सामने सबसे बड़ी मुसीबत है कि उन्हें बोर्ड को एक साथ सभी विद्यार्थियों का ब्योरा भेजना है। यदि सिर्फ शुल्क जमा करने वाले विद्यार्थियों का ब्योरा भेजते हैं तो शेष का नाम सूची से डिलीट करना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में संबंधित छात्र किसी भी सूरत में परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे।

स्कूलों को एक साथ भेजना होता है सभी विद्यार्थियाें का ब्योरा

स्कूल जिन विद्यार्थियों के नाम डिलीट कर देंगे उनका आवेदन विलंब शुल्क देने के बाद भी बोर्ड स्वीकार नहीं करेगा। यदि किसी स्कूल में सौ विद्यार्थी पंजीकृत हैं और 90 ने फीस जमा कर दिया है तथा दस ने नहीं किया है। यदि स्कूल दस विद्यार्थियों के कारण सबका फार्म एक साथ भेजने के लिए रोक लेता है तो उसे प्रति छात्र दो हजार के हिसाब से विलंब शुल्क स्वयं भरना होगा। बोर्ड के इस नियम के कारण स्कूलों की परेशानी बढ़ गई है।

निर्धारित परीक्षा शुल्क

सीबीएसई ने पांच विषयों के लिए पंद्रह सौ रुपये परीक्षा शुल्क निर्धारित किए हैं। इसके अलावा अतिरिक्त या वैकल्पिक विषयों के लिए तीन सौ तथा प्रैक्टिकल के लिए 150 रुपये प्रति विषय शुल्क तय है। जिसे जमा करने के बाद ही स्कूल संबंधित विद्यार्थी का आवेदन पूर्ण मानते हुए ब्योरा बोर्ड को भेजेगा।

सीबीएसई के हाईस्कूल व इंटर के प्रथम चरण की परीक्षा नवंबर में निर्धारित है। ऐसे में यदि परीक्षा शुल्क जमा करने के लिए बोर्ड और समय नहीं देता है तो स्कूलों को शुल्क नहीं देने वाले विद्यार्थियों के नाम डिलीट करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता है। जिससे वे छात्र परीक्षा से वंचित रह जाएंगे। - अजय शाही, अध्यक्ष, गोरखपुर स्कूल एसोसिएशन

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