युवती को अपने कमरे में जबरन रखता था दारोगा, युवती ने की खुदकुशी- दारोगा ग‍िरफ्तार

Suhana Suicide Case Gorakhpur दारोगा के उत्‍पीड़न से त्रस्‍त आत्‍महत्‍या करने वाली गोरखपुर की शहाना निशा ने के स्वजन ने एसपी सिटी व सीओ कोतवाली को बताया कि शादीशुदा होने के बाद भी दारोगा राजेंद्र सिंह ने शहाना को जबरन अपने पास रखा था।

Pradeep SrivastavaTue, 19 Oct 2021 08:05 AM (IST)
दारोगा के उत्‍पीड़न से आत्‍महत्‍या करने वाली गोरखपुर की शहाना निशा। - फाइल फोटो

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। Suhana Suicide Case Gorakhpur: गोरखपुर जिला महिला अस्पताल की आउटसोर्सिंग कर्मचारी शहाना निशा ने क्षेत्रीय अभिसूचना इकाई में तैनात दारोगा की प्रताड़ना से आजिज खुदकुशी की थी।रविवार को कोतवाली थाने पहुंचे स्वजन ने एसपी सिटी व सीओ कोतवाली को बताया कि शादीशुदा होने के बाद भी दारोगा राजेंद्र सिंह ने शहाना को जबरन अपने पास रखा था। कई बार उसकी शादी की बात चली, लेकिन उसने होने नहीं दी। 10 माह का बच्चा भी उसी का है। एसपी सिटी ने बताया कि आरोपित हिरासत में है, तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर जांच की जा रही है।

शहाना की मा ने दर्ज कराया मुकदमा

घटना के बाद मुंबई से शहाना की बड़ी बहन शब्बो व जीजा जावेद गोरखपुर पहुंचे। बेलीपार के भीटी में रहने वाले स्वजन व रिश्तेदारों को लेकर कोतवाली थाने पहुंचे। शहाना की मां तैरुननिशा ने थाने में मौजूद एसपी सिटी सोनम कुमार, सीओ कोतवाली विपुल सिंह को बताया कि जब भी उन्होंने बेटी से मिलने और साथ ले जाने का प्रयास किया तो दारोगा राजेंद्र सिंह जान से मारने की धमकी देकर भगा देता था। घटना के समय वह घर में मौजूद था, जिसका प्रमाण उन लोगों के पास है। शहाना के जीजा जावेद ने बताया कि बीते शुक्रवार की सुबह दारोगा ने उनके पास फोन करके बताया कि शहाना ने खुदकुशी कर ली है।

घटना कैसे हुई यह पूछने पर बताया कि रात को दोनों अलग-अलग कमरे में थे, इसलिए जानकारी नहीं हो पाई। प्रमाण के तौर पर बातचीत की रिकार्डिंग मौजूद है। एसपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि शहाना की मां तैरुननिशा ने कोतवाली थाने में दारोगा राजेंद्र सिंह के खिलाफ आत्महत्या के लिए उत्प्रेरित करने का केस दर्ज कराया है। साक्ष्य के आधार पर कार्रवाई होगी।

साहब बच्चे के साथ इंसाफ करिए

शहाना की मां और बहन उसके 10 माह के बेटे को भी लेकर थाने पहुंची थीं। एसपी सिटी और सीओ कोतवाली से उन्होंने कहा कि साहब इस मासूम के साथ इंसाफ करिए। दारोगा ने इसके सिर से मां का साया छीन लिया। अब कौन इसकी देखभाल करेगा। एसपी सिटी ने उन्हें मदद का भरोसा दिया।

स्वजन को समझाते रहे आरोपित दारोगा के शागिर्द

दारोगा के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने का आदेश होने की खबर मिलते ही उसके शागिर्द कोतवाली थाने पहुंच गए। शहाना के स्वजन व रिश्तेदारों से बात करके मुकदमा दर्ज न कराने के लिए समझाने लगे। उनका तर्क था कि मुकदमा लडऩे से बच्चे को इंसाफ नहीं मिलेगा। बातचीत करके समाधान कर लें।

यह है मामला

बेलीपार के भीटी गांव निवासी शहाना जिला महिला अस्पताल में आउटसोर्सिंग कर्मचारी थी। कोतवाली क्षेत्र के बक्शीपुर में किराए पर कमरा लेकर अपने 10 माह के बच्चे और दारोगा के साथ रहती थी। शुक्रवार की सुबह कमरे में उसका शव फंदे से लटकता मिला था। संदेह के आधार पर कोतवाली पुलिस ने दारोगा को हिरासत में ले लिया। स्वजन ने अनहोनी की आशंका जताते हुए जांच व कार्रवाई के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। रविवार को कोतवाली थाने पहुंचकर तहरीर दी।

60 घंटे की माथापच्ची के बाद दर्ज हुआ मुकदमा

बलिया जिले का रहने वाले आरोपित दारोगा राजेंद्र स‍िंंह को कोतवाली पुलिस ने 15 अक्टूबर को हिरासत में ले लिया।लेकिन मुकदमा दर्ज करने के लिए 60 घंटे तक माथा-पच्ची चली।दो दिन तक तहरीर न मिलने की दलील दी गई।रविवार को शहर के स्वजन पहुंचे तो उनसे बातचीत करके देर शाम शहाना की मां की तहरीर पर आइपीसी की धारा 306 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

रिश्तेदारों ने लगाया तहरीर बदलवाने का आरोप

शहाना की मां और बहन के साथ थाने पहुंचे रिश्तेदारों का आरोप है कि कोतवाली पुलिस ने बोलकर अपने मन माफिक तहरीर लिखवा लिया।कोतवाली पुलिस ने उनकी बात अनसुनी कर दी।सोमवार को एसएसपी से मुलाकात कर मामले की जानकारी देंगे। वहीं कोतवाली पुलिस का कहना है कि किसी के साथ जोर जबरदस्ती नहीं हुई है।शहाना की मां ने जो तहरीर दी है उसी पर मुकदमा दर्ज हुआ है।आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद है।

किराए पर लिया था कमरा

दारोगा राजेन्द्र स‍िंंह कोतवाली थाने के नगर निगम चौकी पर लंबे समय तक तैनात रहे। इस चौकी क्षेत्र में जिला महिला अस्पताल भी आता है। जहां आते-जाते उनकी शहाना से जान पहचान हो गई। दारोगा ने शहाना को सुहानी बताकर बक्शीपुर में किराये के मकान में रखवाया था।

हो सकती है 10 साल की सजा

किसी व्यक्ति को आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने/उकसाने के लिए सत्र न्यायालय 10 वर्ष कारावास व आर्थिक दंड अथवा दोनों के लिए उत्तरदायी कर सकती है।यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

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