गोरखपुर में 30 सितंबर 1995 को पहली बार आयोजित हुई थी जिला स्तरीय शतरंज प्रतियोगिता

6 फरवरी 1996 को स्थानीय जूनियर इस्टीट्यूट में जिला स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। 12 जनवरी 1996 को गोरखपुर जिला शतरंज संघ को सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकरण मिलने के बाद क्रेट्रोस चेस क्लब का विलय गोरखपुर जिला शतरंज संघ में हो गया।

Satish Chand ShuklaTue, 20 Jul 2021 02:09 PM (IST)
शतरंज दिवस पर शतरंज का फाइल फोटो, जेएनएन।

गोरखपुर, प्रभात कुमार पाठक। शतरंज के शह और मात के खेल से गोरखपुर का काफी पुराना नाता है। नब्बे के दशक में गोरखपुर जिला शतरंज संघ की स्थापना हुई। उसी दौरान करीब 26 साल पहले यहां पहली बार शतरंज की बिसात बिछी थी। तब से लेकर अब तक यहां शतरंज की कई प्रतियोगिताएं आयोजित हो चुकी हैं। इस खेल की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में गोरखपुर में लगभग 20 अंतरराष्ट्रीय रेटेड खिलाड़ी हैं।

जूनियर इस्टीट्यूट में हुई थी प्रतियोगिता

जिला स्तर पर शतरंज को बढ़ावा देने में पहली बार क्रेट्रोस चेस क्लब ने अहम भूमिका निभाई। क्लब के तत्वावधान में गत 30 सितंबर 1995 को पहला जिला स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसके बाद 6 फरवरी 1996 को स्थानीय जूनियर इस्टीट्यूट में जिला स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। 12 जनवरी 1996 को गोरखपुर जिला शतरंज संघ को सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकरण मिलने के बाद क्रेट्रोस चेस क्लब का विलय गोरखपुर जिला शतरंज संघ में हो गया। तब से लेकर अब तक जिला शतरंज संघ जनपद में शतरंज को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रहा है।

5 फरवरी 1997 को हुआ था पूर्वांचल सुपर लीग का आयोजन

शतरंज में गोरखपुर की अलग पहचान कुछ खास प्रतियोगिताओं व खिलाडिय़ों की बदौलत है। 5 फरवरी 1997 को पूर्वांचल सुपर लीग का आयोजन किया गया। इसके बाद पहली अप्रैल को भव्या कालोनाइजर्स सुपर लीग टूर्नामेंट का आयोजन हुआ। 18 नवंबर 1995 को पहली बार पूर्वांचल शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। जिसमें गोरखपुर मंडल में लगातार पांच बार चैंपियन रहकर स्व.पीबी ङ्क्षसह ने अपना परचम लहराया था। इस प्रतियोगिता के बाद गोरखपुर के सरकारी विभागों में भी शतरंज काफी लोकप्रिय हो चुका था। 31 दिसंबर 1996 को भारतीय स्टेट बैंक एवं गोरखपुर जिला शतरंज संघ के संयुक्त तत्वावधान में अंतर विभागीय शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें भारतीय स्टेट बैंक, भारतीय जीवन बीमा निगम, पूवोत्तर रेलवे, गोरखपुर अधिवक्ता बार एसोसिएशन, सहारा इंडिया आदि विभागों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में सहारा इंडिया से खेलते हुए मिथिलेश श्रीवास्तव विजेता बने।

21 साल पहले भारतीय वायुसेना का मिला साथ

इसके बाद सितंबर 2000 में जिला शतरंज संघ को भारतीय वायुसेना का साथ मिला और भारतीय वायुसेना की गोरखपुर शाखा ने लगातार तीन वर्षों 2002 तक जय जवान एसबीआइ ओपेन शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन किया। इसके बाद अमर शहीदों की याद में अमर शहीद स्मृति शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन सहारा के एसएसपी अग्रवाल द्वारा किया गया। यह गोरखपुर की पहली नकद पुरस्कार राशि वाली प्रतियोगिता थी। जिसमें पुरस्कार राशि 30 हजार रुपये थी। वर्ष 2005 में गोरखपुर जिला शतरंज संघ ने सेंट्रल एकेडमी के निदेशक सृंजय कुमार मिश्र के साथ मिलकर गोरखपुर में पहली बार अंतरराष्ट्रीय रेङ्क्षटग शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन किया। यह प्रतियोगिता सेंट्रल एकेडमी समूह के संस्थापक पंडित टीएन मिश्र की स्मृति में हुई। प्रतियोगिता में देश के दिग्गज खिलाडिय़ों ने भाग लिया। उस समय कुल पुरस्कार राशि एक लाख एक हजार रुपये थी। इसमें कोलकाता के अंतरराष्ट्रीय मास्टर अतनु लहरी ने भाग लिया था। प्रतियोगिता के विजेता कानपुर के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिवंगत सैयद नासिर अली रहे।

1998 में मिथिलेश श्रीवास्तव को शतरंज में विशेष उपलब्धियों के आधार पर गोरखपुर विश्वविद्यालय ने परास्नातक (अर्थशास्त्र) में प्रवेश दिया। जिसके बाद गोरखपुर विश्वविद्यालय में भी शतरंज का आगाज हुआ और मिथिलेश के नेतृत्व में ही विश्वविद्यालय की टीम ने पहली बार 1999 में पिलानी, राजस्थान में अंतर विश्वविद्यालय राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया। इसके बाद शासन ने गोरखपुर महोत्सव में इस खेल को शामिल किया। गोरखपुर महोत्सव में अब तक चार बार शतरंज की प्रतियोगिताएं हो चुकी हैं।

यह हैं जिले अंतरराष्ट्रीय रेटेड शतरंज खिलाड़ी

जिले के अंतरराष्ट्रीय रेटेड शतरंज खिलाडिय़ों पर नजर डाले तो इस समय इनकी लंबी फेहरिस्त हो चुकी है। इन खिलाडिय़ों में अतुल पति त्रिपाठी, राम प्रकाश, मिथिलेश श्रीवास्तव, विष्णु देव यादव, कमलेश कुमार, शशि प्रकाश, रवि कुमार, भृगुनाथ भारती, अमितेश आनंद, राम कृष्ण मिश्रा, अनुराग दुबे, प्रशांत मिश्रा, जितेंद्र सिंह, नितेश श्रीवास्तव, संजय सिंह, संदीप बरनाड टेटे, फैयाजुल हक सिद्दीकी तथा आमिर गुलरेज आदि शामिल हैं। गोरखपुर जिला शतरंज संघ के कार्यवाहक सचिव जितेंद्र सिंह का कहना है कि गोरखपुर के प्रसिद्ध समाजसेवी पुष्पदंत जैन ने सर्वप्रथम अपने पिता स्व.मुन्नीलाल जैन की स्मृति में जिला स्तर पर शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन शुरू किया। 1996 में प्रतियोगिता की लोकप्रियता के कारण इसे जिला स्तरीय से राज्य स्तर का स्वरूप दे दिया गया और पहली राज्यस्तरीय प्रतियोगिता राप्ती अंडर 25 मुन्नीलाल जैन स्मृति के नाम से हुई। प्रतियोगिता के मुख्य प्रायोजक राप्ती ग्रुप व मुन्नीलाल जैन सर्राफ थे। प्रतियोगिता का उद्घाटन दूरदर्शन के तत्कालीन निदेशक धनश्याम शर्मा एवं डीआइजी रिजवान अहमद ने किया। प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रदेश के दिग्गज खिलाड़ी दिनेश शर्मा, विवेक शुक्ला, अजय पांडेय, मिथिलेश श्रीवास्तव, रामप्रकाश आदि ने इसे रोमांचकारी बना दिया था। इसके बाद जिला शतरंज संघ ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और निरंतर शतरंज की प्रतियोगिताएं कराकर खिलाडिय़ों को तराशता रहा।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.