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पर्यावरण संरक्षण की सीख दे रहा श्याम बदन का परिवार

पर्यावरण संरक्षण की सीख दे रहा श्याम बदन का परिवार

पौधशाला व्यापार में जुटा है श्याम बदन कुशवाहा का परिवार

JagranWed, 21 Apr 2021 10:30 PM (IST)

महराजगंज: नगर पंचायत निचलौल से करीब डेढ़ किलोमीटर पूरब स्थित ग्राम सभा बैदौली के किसानों ने नर्सरी कारोबार से क्षेत्र में तरक्की की इबारत लिखी है।

गांव में घुसते ही हरियाली का नजारा देखते ही मन खुशी से भर उठता है। जंगल से सटे यह गांव पौधों की जननी के नाम से जाना जाने लगा है। यह सब यहां के किसानों की बदौलत हुआ है। इन्हीं किसानों में से एक हैं श्यामबदन कुशवाहा। जिन्होंने परिवार के साथ मिलकर नर्सरी तो लगाई ही है। साथ ही अपने निजी भूमि में पेड़ लगाकर पर्यावरण संरक्षण की सीख दे रहें हैं। बैदौली के उत्पादित पौधे यूपी के बड़े शहरों से लगायत पड़ोसी राज्य बिहार व नेपाल में अपनी जगह बनाए हुए हैं। वर्ष 2019 में सरकार के बृहद पौधारोपण अभियान में वन विभाग ने भी इस ग्राम सभा के किसानों की मदद ली थी। आंकड़ों के अनुसार यहां के किसानों ने वर्ष 2019 में 25 लाख से अधिक पौधों का सहयोग दिया था। किसानों के इस गांव की 70 फीसद से अधिक आबादी की जीविका पौधा नर्सरी पर ही निर्भर है। पौधा नर्सरी के व्यापार से यहां के किसान धनार्जन के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण को व्यापार से जोड़ने के बाद सुखद बात व प्रेरणा यह है कि गांव की इस सम्पन्नता के पीछे न तो विदेशी पैसा है, और न सरकारी सहायता। बल्कि बलुई दोमट व तराई की इस मिट्टी पर सब्जियों की खेती किसानी से ग्रामीण मालामाल हो रहे हैं। कईयों ने तो पौध नर्सरी से गांव में अलग पहचान ही बना ली है। पौधशाला व सब्जी की खेती ग्रामीणों की मुख्य आजीविका

उत्तर पूरब दो दिशाओं से जंगल से घिरे निचलौल ब्लाक के बैदौली गांव के किसान व श्यामबदन नर्सरी संचालक सोनू कुशवाहा ने बताया कि गांव के अधिकांशत: लोग नर्सरी से खुद का व्यापार चलाना पसंद करते हैं । यहां के पौधे अपने जनपद के अलावा कुशीनगर,देवरिया, बिहार सहित नेपाल भी भेजे जाते हैं। गांव के अधिकांश किसान पौधशाला व सब्जी की खेती को ही आजीविका का मुख्य साधन बना लिया है। इस कार्य में ग्रामवासी किसान लल्लन, राममिलन, रामलखन,दीनानाथ, उमालाल आदि भी लगे हुए हैं। गांव में बागीचे लगाकर भी किसान हो रहे मालामाल

इस गांव के किसान नर्सरी के साथ साथ बाग लगाने में भी आगे हैं। ग्रामवासी ग्रामीण प्रभुदयाल चौहान ने अपने ढाई एकड़ भूमि में 500 सागौन, रामवृक्ष ने 30 डिसमिल में 250 सागौन, विद्यासागर ने एक एकड़ तीस डिस्मिल में 300 पौधे, शेरसिंह थापा ने 25 डिसमिल में 300 पौधों का बाग लगाकर अचल संपत्ति बनाई है।

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