श्रावस्ती माडल से विवादों का निस्तारण, महिलाओं को मिला रोजगार

श्रावस्ती माडल से विवादों का निस्तारण, महिलाओं को मिला रोजगार

जनपद के दो आइएएस अधिकारियों ने अपनी कार्यशैली से आमजन के साथ शासन को भी प्रभावित किया है। उनकी पहल पर भूमि संबंधित विवादों का निस्तारण श्रावस्ती माडल के आधार पर हो रहा है। राजस्व विभाग पुलिस व दोनों पक्षों की मौजूदगी में सुलह समझौते के आधार पर मामले निस्तारित हो रहे हैं।

JagranWed, 21 Apr 2021 06:00 AM (IST)

सिद्धार्थनगर : जनपद के दो आइएएस अधिकारियों ने अपनी कार्यशैली से आमजन के साथ शासन को भी प्रभावित किया है। उनकी पहल पर भूमि संबंधित विवादों का निस्तारण श्रावस्ती माडल के आधार पर हो रहा है। राजस्व विभाग, पुलिस व दोनों पक्षों की मौजूदगी में सुलह समझौते के आधार पर मामले निस्तारित हो रहे हैं। डेढ़ वर्ष के भीतर करीब 128 मामले निस्तारित किए गए हैं। इनमें कुछ मामले तो कई दशकों से न्यायालय में लंबित चल रहे थे। वहीं कोरोना काल में जिले की महिलाओं ने आपदा को अवसर में बदलने का काम किया। छोटी सी पूंजी से शुरू कारोबार ने अब बड़ा रूप धारण कर लिया है। स्वयं सेवी संस्थाओं ने फैक्ट्री डाली है। इनका उत्पादन बाजार में बिक रहा है।

भूमि विवाद के लंबित मामले सुलझाए

आइएएस दीपक मीणा यहां आने से पहले श्रावस्ती में डीएम पद पर तैनात रहे। भूमि संबंधित विवाद को निस्तारित करने के लिए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक श्रावस्ती विजय ढुल के साथ मिल कर योजना तैयार की थी। दोनों अधिकारियों ने वहां पर कई वर्ष पुराने मामलों का निस्तारण किया। शासन ने भी इस योजना को अप्रूव कर इसे श्रावस्ती माडल का नाम दिया। इसके बाद शासन से दोनों अधिकारियों का तबादला सिद्धार्थनगर हो गया। यहां भी श्रावस्ती माडल पर काम करते हुए वर्षों से लंबित मामलों का निस्तारण किया। करीब छह माह पूर्व एसपी विजय ढुल का तबादला लखीमपुर खीरी जनपद के लिए हो गया। लेकिन यह कार्रवाई बंद नहीं हुई। अभी भी भूमि संबंधित विवादों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जा रहा है। यहां तक की जो अन्य विभागों से जुड़े मामले थे, उनके निस्तारण के लिए न केवल कार्ड जारी किया है, बल्कि खुद निगरानी भी करते हैं। हर शिकायतकर्ताओं की सुनते हैँ और निस्तारण तक पूरा सहयोग करते हैं।

नारी सशक्तीकरण के लिए आगे बढ़कर किया काम

पुलकित गर्ग की मुख्य विकास अधिकारी के रूप में पहली पोस्टिग हैं। लाकडाउन के दौरान पुलकित गर्ग ने नारी सशक्तीकरण के लिए आगे बढ़ कर काम किया। जब कोरोना संक्रमण के कारण लोग घरों से नहीं निकल रहे थे, यह गांवों का दौरा कर महिलाओं को स्वालंबी बनाने की मुहिम में जुटे रहे। महिलाओं को आपदा को अवसर में बदलने के लिए प्रेरित किया। इन्हें समूह बना कर छोटे उद्यम से जोड़ा। शासकीय सहायता भी प्रदान की। जनपद में प्रथम स्वयं सहायता समूह का गठन पिछले वर्ष 10 अप्रैल को हुआ था। कोरोना संक्रमण काल में इस समूह की सदस्य महिलाओं ने अधिकारी व सरकारी कर्मचारियों को भोजन की होम डिलेवरी शुरू की थी। आज यहां की स्वयं सहायता समूहों ने अपना उद्योग स्थापित किया है। दो सैनेटरी नैपकिन बनाने की यूनिट काम कर रही है। एक नील बनाने की फैक्ट्री शुरू होने की स्थिति में है।

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