स्क्रब टाइफस से बच्चों को परेशानी, चूहों की धमाचौकड़ी पड़ रही भारी

पिस्सुओं के काटने से बच्चों को स्क्रब टाइफस हो जाता है जो इंसेफ्लाइटिस का कारण बनता है। क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र (आरएमआरसी) के शोध में इस बात की पुष्टि हो चुकी है इसलिए इससे सावधान रहें। यह बीमारी चूहों छछूंदर व झाड़ियों के संपर्क में आने से होती है।

Rahul SrivastavaSat, 11 Sep 2021 05:45 PM (IST)
स्क्रब टाइफस बन रहा इंसेफ्लाइिटस का बड़ा कारण। प्रतीकात्मक तस्वीर

गोरखपुर, जागरण संवाददाता : घरों में चूहों की धमाचौकड़ी बच्चों पर भारी पड़ रही है। उनके ऊपर पलने वाले पिस्सू में स्क्रब टाइफस के जीवाणु होते हैं। पिस्सुओं के काटने से बच्चों को स्क्रब टाइफस हो जाता है जो इंसेफ्लाइटिस का कारण बनता है। क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र (आरएमआरसी) के शोध में इस बात की पुष्टि हो चुकी है, इसलिए इससे सावधान रहें। यह बीमारी चूहों, छछूंदर व झाड़ियों के संपर्क में आने से होती है। बच्चों को इनसे दूर रखें। पूर्वांचल में एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के 65 फीसद मामलों का कारण स्क्रब टाइफस ही है।

पूर्वांचल से लगभग खत्म हो चुका है जापानी इंसेफ्लाटिस

पूर्वांचल से जापानी इंसेफ्लाटिस (जेई) लगभग खत्म हो चुका है। एईएस पर भी काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है। सरकार के प्रयासों व आम जन की जागरूकता के चलते ही यह संभव हो पाया है। थोड़ी और सतर्कता बरती जाए तो यह बीमारी भी पूर्वांचल से दूर हो सकती है। चूहों, छछूंदर आदि जानवारों पर एक पिस्सू पाया जाता है, जिसमें स्क्रब टाइफस के जीवाणु होते हैं। जब ये जानवर झाड़ियों में जाते हैं तो वे पिस्सू झाड़ियों पर चढ़ जाते हैं। जब बच्चे खेलते हुए वहां पहुंचते हैं तो उन्हें काट लेते हैं। इसकी वजह से यह बीमारी होती है।

इंसेफ्लाइटिस के मामले काफी हद तक हो गए कम

पूर्वांचल में सरकार के प्रयास व सतर्कता के चलते इंसेफ्लाइटिस के मामले काफी हद तक कम हो गए हैं। 2017 के पूर्व प्रति वर्ष हजारों बच्चों की इस बीमारी के चलते मौत हो जाती थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने इसके नियंत्रण के लिए प्रयास शुरू किया। तबसे संक्रमण व मौतें लगातार घट रही हैं।

करें यह बचाव

-घर के आसपास झाड़ियां न उगने दें, साफ-सफाई करते रहें।

-पार्क व पौधों के बीच जाने से पहले फुल पैंट-शर्ट पहनें।

-तीन-चार दिन से ज्यादा बुखार आए तो डाक्टर से संपर्क करें।

-डाक्टर की सलाह पर घर के अंदर और आसपास कीटनाशक का छिड़काव करें।

इंसेफ्लाइिटस के 60-65 फीसद मामले स्क्रब टाइफस की वजह से ही होते हैं

आरएमआरसी के वायरोलाजिस्ट डा. अशोक पांडेय ने कहा कि इस बीमारी में तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, उल्टी, पीलिया, जोड़ों में दर्द आदि दिक्कतें आती हैं। पूर्वांचल में इंसेफ्लाइटिस के 60-65 फीसद मामले स्क्रब टाइफस की वजह से ही होते हैं। समय से अस्पताल पहुंच जाने पर मरीज ठीक हो जाते हैं, इसलिए तेज बुखार होने पर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। तत्काल डाक्टर से संपर्क करना चाहिए।

इंसेफ्लाइटिस के ऐसे घटे आंकड़े

वर्ष        एईएस     मौत     जेई    मौत

2016    627         118     29     09

2017    774         105     42    08

2018   400          38      35     02

2019   227          10      35     05

2020   212          10     13      02

2021  123           09     00     00

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