Research On Coranaviruses: ताकि दिमाग का दही न बना पाए कोरोना वायरस, BRD मेडिकल कालेज में होगा शोध

शोध में हर आयु वर्ग के ठीक हो चुके लोगों को शामिल किया जाएगा। इन्हें बीआरडी मेडिकल कालेज की ओपीडी में बुलाकर परीक्षण किया जाएगा और कोरोना का असर जाना जाएगा। शोध के आधार पर इलाज की रूपरेखा तय की जाएगी।

Pradeep SrivastavaPublish:Tue, 11 May 2021 11:47 AM (IST) Updated:Tue, 11 May 2021 11:47 AM (IST)
Research On Coranaviruses: ताकि दिमाग का दही न बना पाए कोरोना वायरस, BRD मेडिकल कालेज में होगा शोध
Research On Coranaviruses: ताकि दिमाग का दही न बना पाए कोरोना वायरस, BRD मेडिकल कालेज में होगा शोध

गोरखपुर, दुर्गेश त्रिपाठी। कोरोना की पहली और दूसरी लहर ने संक्रमितों के दिमाग पर कितना असर डाला इस पर बाबा राघवदास मेडिकल कालेज में शोध होगा। शोध में हर आयु वर्ग के ठीक हो चुके लोगों को शामिल किया जाएगा। इन्हें मेडिकल कालेज की ओपीडी में बुलाकर परीक्षण किया जाएगा और कोरोना का असर जाना जाएगा। वर्तमान स्थिति को देखते हुए मनोचिकित्सकों का मानना है कि आने वाले समय में कोरोना संक्रमण से ठीक हुए लोगों में मानसिक बीमारियां बहुत ज्यादा बढ़ेंगी। शोध के आधार पर इलाज की रूपरेखा तय की जाएगी।

कोरोना संक्रमण से ठीक हुए मरीजों को बुलाकर किया जाएगा परीक्षण

कोरोना संक्रमण से सबसे ज्यादा फेफड़े प्रभावित हो रहे हैं। मरीजों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है तो आक्सीजन सपोर्ट पर रखना पड़ रहा है। संक्रमण दूर करने के लिए ज्यादा मात्रा में स्टेरायड भी देनी पड़ रही है। स्टेरायड और लगातार आइसीयू में रहने के कारण मरीजों के दिमाग पर खराब असर पड़ रहा है। अस्पताल में लगातार मौत भी दिमाग पर गहरा असर डाल रही है।

500 मरीजों को करेंगे शामिल

बाबा राघवदास मेडिकल कालेज के मनोचिकित्सा विभाग के डाक्टर अपने शोध में कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके 500 लोगों को शामिल करेंगे। विभाग में ऐसे लोगों की सूची बननी शुरू हो गई। इनमें हर आयु वर्ग को शामिल किया जा रहा है।

ऐसे होगा शोध

विभाग में आने वालों की मनोस्थिति के बारे में जानकारी के लिए डाक्टर प्रश्नावली तैयार कर रहे हैं। इसमें मरीज की उम्र, लिंग, शुगर की स्थित, अन्य बीमारियों की स्थित, दवाएं कौन सी चल रही हैं, कोरोना संक्रमण से पहले और बाद में किन दवाओं को बढ़ाना पड़ा, कोरोना संक्रमण के बाद सबसे ज्यादा क्या दिक्कत हो रही है। शोध में यह भी देखा जाएगा कि कोरोना संक्रमण से ठीक हुए लोगों में यदि मानसिक बीमारी नहीं हुई तो इसके पीछे क्या वजह रही होगी। जिन लोगों में मानसिक बीमारी ज्यादा हुई तो इसकी वजह क्या रही होगी। एक-एक मरीज की कोरोना संक्रमण से पहले और बाद में हुए बदलाव को शोध में शामिल कर इसका निष्कर्ष निकाला जाएगा। निष्कर्ष को जर्नल में प्रकाशित भी कराया जाएगा।

कोरोना संक्रमण का दिमाग पर पड़ने वाला असर किसी में ज्यादा है तो किसी में कम। विभाग के डाक्टर 500 मरीजों पर शोध कर पूरी जानकारी करेंगे। ज्यादा और कम असर पड़ने की स्थितियों के पीछे वजह की जानकारी की जाएगी। देखा जाएगा कि स्टेरायड का ज्यादा या कम इस्तेमाल करने वालों की क्या मनोस्थिति है। साथ ही देखा जाएगा कि ज्यादा दिन तक आइसीयू में रहने वालों के व्यवहार में क्या बदलाव आया है। हर आयु वर्ग की महिला और पुरुषों को शोध में शामिल किया जाएगा। जल्द ही शोध शुरू होगा। तीन से चार महीने में इसे पूरा कर लिया जाएगा। - आमिल एच खान, मनोचिकित्सक, बाबा राघवदास मेडिकल कालेज।