अनलाक से मिली मन को राहत, औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन पर नहीं पड़ा असर

गैलेंट समूह के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश अग्रवाल बताते हैं कि अनलाक हो गया है लेकिन अभी सामान्य स्थिति नहीं आयी है। मांग में कमी है। उत्पादन करीब 60 फीसद तक ही किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही हालात सुधरेंगे।

Pradeep SrivastavaThu, 17 Jun 2021 11:23 AM (IST)
अनलॉक होने के बाद गोरखपुर की औद्योगिक इकाइयों को आक्‍सीजन म‍िल गया है। - प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

गोरखपुर, उमेश पाठक। पिछले सप्ताह से गोरखपुर जिले में भी अनलाक किया जा चुका है लेकिन इससे उद्यमियों के मन को ही राहत मिली है। औद्योगिक इकाइयों में अनलाक के बावजूद उत्पादन नहीं बढ़ सका है क्योंकि मांग नहीं है। कोरोना का भय थोड़ा कम हुआ तो कर्मचारी भी इकाइयों तक आने लगे हैं और थोड़ा ही सही, उत्पादन कर स्टोर किया जा रहा है। बाजार खुलने से कुछ उद्यमी स्टोर में पड़े अपने माल को निकालने में लगे हैं।

कोरोना की दूसरी लहर में औद्योगिक इकाइयों के संचालन पर सरकार की ओर से कोई रोक तो नहीं थी लेकिन उद्यमियों ने स्वत: ही उत्पादन कम कर दिया था। कई इकाइयों में 20 से 25 फीसद ही कर्मचारी आ रहे थे। कई उद्यमियों ने अपनी इकाइयों में उत्पादन ही बंद कर दिया था। बाजार बंद होने के कारण मांग न होने से फैक्ट्रियों के गोदाम तैयार माल से भर गए थे।

स्टील सेक्टर को अभी राहत नहीं

कोरोना काल में इंडस्ट्रियल आक्सीजन न मिलने के कारण स्टील से जुड़ी इकाइयों में उत्पादन प्रभावित था। इसके बाद मांग भी काफी कम हो गई। अब अनलाक हुआ है तो बारिश के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हैं। गैलेंट समूह के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश अग्रवाल बताते हैं कि अनलाक हो गया है लेकिन अभी सामान्य स्थिति नहीं आयी है। मांग में कमी है। उत्पादन करीब 60 फीसद तक ही किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही हालात सुधरेंगे। हार्डवेयर सामान बनाने वाले उद्यमी आरएन सिंह कहते हैं कि अब बाजार खुल गया है लेकिन बारिश के कारण सामान की बिक्री नहीं है।

उत्पादन अभी भी 50 फीसद तक ही है। गोदाम में जो माल भरा है, उसे सभी उद्यमी निकालने की कोशिश में हैं। इसके लिए दाम में कुछ कमी भी की जा रही है। पूंजी निकालना इस समय सबसे बड़ी चुनौती है। इसलिए घाटा सहकर भी काम किया जा रहा है। इसी तरह प्लाई बनाने वाली इकाइयों के सामने भी मांग का संकट है।

खाद्य पदार्थ बनाने वाली इकाइयों में सामान्य है स्थिति

खाद्य पदार्थ बनाने वाली इकाइयों में स्थिति अन्य की तुलना में सामान्य है। फ्लोर मिल संचालित करने वाले उद्यमी आकाश जालान बताते हैं कि कोरोना काल में भी मांग थी और इकाई चल रही थी। इस समय भी अन्य उत्पादों की तुलना में स्थिति बेहतर है।

दो महीने बाद ही पटरी पर आएगा रेडीमेड गारमेंट उद्योग

एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) में शामिल रेडीमेड गारमेंट उद्योग को अनलाक के बाद भी पटरी पर आने में करीब दो महीने लगेंगे। चैंबर आफ रेडीमेड गारमेंट इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष रमाशंकर शुक्ला बताते हैं कि धीरे-धीरे इकाइयों में उत्पादन शुरू हुआ है लेकिन बाजार में मांग नहीं है। लगन का बाजार भी लगभग समाप्त हो चुका है। जो माल तैयार हो रहा है, उसे डंप करना पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि बाहर से कपड़ा मंगाया जा रहा है। वहां के व्यापारियों ने दाम बढ़ा दिया है लेकिन अच्छी बात यह है कि यहां उत्पादन करने वाल उद्यमियों ने दाम नहीं बढ़ाया है। स्कूल ड्रेस का कपड़ा बनाने वाले उद्यमी दीपक कारीवाल का कहना है कि अभी भी 30 फीसद ही उत्पादन हो रहा है। जुलाई में स्कूल खुलने की उम्मीद से कुछ आस जगी है।

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