गोरखपुर के उद्यमियों की उम्मीदों को पंख दे गए प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गोरखपुर में खाद कारखाना का उद्घाटन करने के बाद गोरखपुर के उद्यम‍ियों को आस है कि स्थानीय स्तर पर बोरा एवं केमिकल बनाने वाली औद्योगिक इकाइयों को आधिकारिक रूप से सहयोगी इकाई घोषित किया जाएगा।

Pradeep SrivastavaWed, 08 Dec 2021 10:20 AM (IST)
गोरखपुर खाद कारखााना का शुभारंभ करते पीएम नरेन्‍द्र मोदी। - जागरण

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खाद कारखाना शुरू होने के बाद पड़ने वाले प्रभाव का जिक्र करते हुए स्थानीय उद्यमियों में उम्मीद की किरण जगा दी है। उनके उद्बोधन में सहयोगी इकाइयों (अनुपूरक उद्योग) को बढ़ावा मिलने की बात सुनकर यहां के उद्यमियों की उम्मीदों को पंख लग गए हैं। उन्हें आस है कि स्थानीय स्तर पर बोरा एवं केमिकल बनाने वाली औद्योगिक इकाइयों को आधिकारिक रूप से सहयोगी इकाई घोषित किया जाएगा। ऐसा हुआ तो कुछ और नई इकाइयों की स्थापना की राह भी खुल सकेगी।

अब आसानी से उपलब्ध होगा बाजार

लोकार्पण करने के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि खाद कारखाना शुरू हो जाने से रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। किसी भी स्थानीय इकाई को सहयोगी इकाई घोषित किए जाने के बाद भारी उद्योग के लिए वहां उत्पाद तैयार किए जाते हैं। चैंबर आफ इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल का कहना है कि प्रधानमंत्री ने सहयोगी इकाइयों को बढ़ावा मिलने की बात कही है। अभी तक यहां कोई भी इकाई सहयोगी संस्था के रूप में चिह्नित नहीं है। अब उम्मीद बढ़ी है कि प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद हिन्दुस्तान उर्वरक रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) यहां की इकाइयों के साथ अनुबंध पर उन्हें सहयोगी इकाई घोषित करेगा। यह दर्जा मिल जाने से स्थानीय इकाइयों को काफी फायदा होता है। उन्हें आसानी से बाजार उपलब्ध हो जाता है। लघु उद्योग भारती के जिलाध्यक्ष दीपक कारीवाल का कहना है कि यहां बोरा बनाने की पांच इकाइयां स्थापित हैं। पर्याप्त संख्या में बारे बनाए जाते हैं। एक नई इकाई भी लगी है।

एचयूआरएल को सहयोगी इकाई घोषित हो

प्रधानमंत्री की मंशा को समझते हुए एचयूआरएल को सहयोगी इकाई घोषित करना चाहिए। इससे प्रदेश सरकार को भी टैक्स के रूप में अतिरिक्त आय होगी। किशन बथवाल की फैक्ट्री माडर्न लेमिनेटर्स में बोरा बनाया जाता है। हर महीने करीब एक करोड़ बोरे का उत्पादन होता है। किशन बताते हैं कि जब पुराने खाद कारखाना का अस्तित्व था तो उनकी इकाई सहित कुछ इकाइयां सहयोगी इकाई घोषित थीं। इस बार भी काफी प्रयास किया गया है। प्रधानमंत्री के उद्बोधन के बाद हमारी उम्मीद बढ़ी है। यहीं पर्याप्त आर्डर मिलेगा तो इकाई का विस्तार भी किया जा सकता है, जिससे नए लोगों को भी रोजगार मिलेगा।

ट्रांसपोर्ट से भी बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

खाद कारखाना शुरू हो जाने के बाद ट्रांसपोर्ट कारोबार में भी रोजगार के अवसर पैदा होंगे। खाद की ढुलाई से लेकर उसे लोड, अनलोड करने में भी लोगों को रोजगार मिलेगा।

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