डिगने नहीं दिया ईमान-बढ़ाई वर्दी की शान, खून देकर पुलिसकर्मियों ने बचाई है दूसरों की जान

पुलिसकर्मियों के संबंध में प्रतीकात्‍मक फाइल फोटो।

गोरखपुर में कई दारोगा व सिपाहियों ने ईमानदारी दिखाकर न केवल वर्दी की शान बढ़ाई बल्कि दूसरों को ईमानदारी की राह पर चलने के लिए प्रेरित किया। किसी ने लावारिश बैग को उसके मालिक तक पहुंचाया तो कुछ ने अपना खून देकर लोगों की जान बचाई।

Satish chand shuklaMon, 25 Jan 2021 01:34 PM (IST)

गोरखपुर, जेएनएन। सराफा कारोबारी का सोना और रुपये लूटकर कुछ बदनाम पुलिसकर्मियों ने खाकी पर दाग लगा दिया, इन्हीं वर्दीधारियों में बहुतायत ऐसे भी हैं, जिनका इमान रुपयों के आगे भी चट्टान की तरह कायम रहा। गोरखपुर में तैनात कई दारोगा व सिपाहियों ने ईमानदारी और ²ढ़ निश्चितता दिखाकर न केवल वर्दी की शान बढ़ाई बल्कि दूसरों को ईमानदारी की राह पर चलने के लिए प्रेरित किया। किसी ने लावारिश मिले बैग को उसके मालिक तक पहुंचाया तो कुछ ऐसे भी हैं  जिन्होंने अपना खून देकर लोगों की जान बचाई।

महिला को ढूंढ लौटाए रुपये व गहने 

सूर्य बिहार चौकी प्रभारी विकास सिंह को 18 जनवरी 2020 की शाम माधोपुर में लेडिज पर्स मिला। जिसमें सोने - चांदी के गहने व रुपये थे। दो दिन तक खोजबीन करने के बाद पता चला कि पर्स कुशीनगर की रहने वाली महिला का है। जिसे चौकी पर बुलाकर उन्होंने गहनों से भरा पर्स व रुपये लौटाया।

पुलिस चौकी पर बुलाकर लौटाया बैग

22 दिसंबर 2020 को चौकी आजाद चौक प्रभारी मनीष यादव को आटो में सामान से भरा बैग मिला। खोजबीन करने पर पता चला कि बैग तारामंडल के रहने वाले सतीश द्वविेदी का है। फोन नंबर पता कर सतीश को पुलिस चौकी पर बुलाकर बैग लौटाया।

डेढ़ माह की तलाश के बाद मिला वारिस

22 नवंबर 2020 को दारोगा अक्षय मिश्रा को रेलवे स्टेशन पर ट्राली बैग व सामान मिला। जिसमें कीमती कपड़े, गहने व सामान भरा था। डेढ़ माह तक छानबीन करने पर पता चला कि बैग अमृतसर के रहने वाले प्रदीप पंडित है। जिन्हें गोरखपुर  बुलाकर दारोगा ने बैग लौटाया।

इंटरनेट मीडिया की मदद से पता लगाकर लौटाए गहने 

चार नवंबर 2019 को गोला थाने पर तैनात दारोगा आशीष सिंह को ढाई लाख रुपये कीमत के गहने मिले। इंटरनेट मीडिया की मदद से खोजबीन करने पर पता चला कि गहने गोला के मेहड़ा गांव निवासी नीटू यादव का है। घरवालों को थाने बुलाकर उन्होंने गहने लौटाए।

खून देकर युवक की बचाई जान

चार माह पहले फातिमा अस्पताल में भर्ती मनीष त्रिपाठी नाम के युवक की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें खून की जरूरत थी। जानकारी होने पर दारोगा पांडेय हाता चौकी प्रभारी अरुण ङ्क्षसह, दारोगा ङ्क्षवध्याचल शुक्ल व सिपाही आनंद ने एक- एक यूनिट खून देकर जान बचाई।

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