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इस गांव की गलियों में घूमते हैं मोर, ग्रामीणों ने तैयार किया गांव में जंगल जैसा माहौल Gorakhpur News

गोरखपुर, जितेन्द्र पाण्डेय। गोरखपुर जिला मुख्यालय से दस किमी दूर एक गांव है, कोनी। गांव में घरों की मुंडेर हो या गलियों की छोर, हर तरफ मोर-मोरनी नाचते हैं। मोरों का यह नृत्य अनुकूल मौसम की वजह से नहीं बल्कि गांव के लोगों से मिले अगाध प्रेम और सुरक्षा के अहसास के चलते है। इसी की देन है कि दो दशक पहले गांव में आए मोरों के एक जोड़े का कुनबा आज 70 की संख्या तक पहुंच गया है।

बड़े से लेकर बच्‍चे तक रखते हैं ख्‍याल

ग्रामवासियों का मोरों से लगाव इस कदर है कि वे फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, फिर भी ग्रामीण उन्हें अपने खेत से नहीं हटाते। बच्‍चे तक इतना ध्यान रखते हैं कि कोई मोरों का शिकार न करने पाए। यही वजह है कि अब लोग कोनी को आम चर्चा में मोरों का गांव कहने लगे हैं।

मोरों के लिए लगाए पौधे

गांव के मास्टर श्याम प्रसाद कहते हैं मोर ऐसे ही नहीं यहां बस गए। उनमें गांव के प्रत्येक व्यक्ति की जान बसती है। कुछ वर्ष पूर्व एक नट ने एक मोर को ले जाने की कोशिश की थी। बच्‍चों ने शोर मचाया तो बड़े लोगों ने उसकी पिटाई कर दी।

मोरों को जंगल जैसा वातावरण मिले, इसलिए गांव से लेकर बाहर चारो तरफ पौधरोपण पर जोर दिया गया। आज हर तरफ जंगल जैसा नजारा है।

हर व्यक्ति की भूमिका अहम

ग्राम प्रधान राम सिंह यादव कहते हैं कि मोरों की संख्या लगातार बढ़ रही है, इसमें गांव के हर व्यक्ति की भूमिका अहम है। बीस वर्ष पहले जब भटककर आये थे, तो उनकी संख्या मात्र दो थी, आज गांव में हर तरफ मोर ही मोर हैं।

बर्ड वाचिंग डे पर खास होगा नजारा

डीएफओ अविनाश कुमार का कहना है कि मोरों वाले गांव की जानकारी उन्हें अब हो सकी है। इस बार बर्ड वाचिंग डे पर वहां विशेष आयोजन किए जाएंगे।

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