अगले माह गोरखपुर, लखनऊ और छपरा में लागू हो जाएगा पार्सल मैनेजमेंट सिस्टम- यह होगा फायदा

पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक विनय कुमार त्रिपाठी ने बताया क‍ि एनईआर भारतीय स्तर पर सभी अस्पतालों में हास्पिटल मैनेजमेंट इंफार्मेशन सिस्टम (एचएमआइएस) लागू करने वाला पहला जोन बन गया है। दफ्तरों में ई आफिस और ई डॉस के अलावा ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट ट्रैक मैनेजमेंट ब्रिज मैनेजमेंट लागू हो गए हैं।

Pradeep SrivastavaFri, 30 Jul 2021 12:02 PM (IST)
पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक विनय कुमार त्रिपाठी। - जागरण

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। पूर्वोत्तर रेलवे के सिस्टम को पूरी तरह से डिजिटल प्लेटफार्म पर लाने के लिए तेजी के साथ कार्य किए जा रहे हैं। यह भारतीय स्तर पर सभी अस्पतालों में हास्पिटल मैनेजमेंट इंफार्मेशन सिस्टम (एचएमआइएस) लागू करने वाला पहला जोन बन गया है। दफ्तरों में ई आफिस और ई डॉस के अलावा ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट, ट्रैक मैनेजमेंट, ब्रिज मैनेजमेंट, सीओआइएस, एफओआइएस, पैसेंजर इंफार्मेशन, कान्ट्रैक्ट मैनेजमेंट सिस्टम लागू हो गए हैं। गवर्मेंट ई मार्केट पर सामानों की खरीदारी शुरू हो गई है। अगस्त में टिकट चेकिंग स्टाफ को पीओएस दे दिए जाएंगे। अगले माह से गोरखपुर, लखनऊ और छपरा जंक्शन पर पार्सल मैनेजमेंट सिस्टम भी कार्य करने लगेगा।

रेल मदद पोर्टल व एप पर मिली शिकायतों का 10 मिनट में हो रहा समाधान

यह जानकारी पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक विनय कुमार त्रिपाठी ने दी। वह गोरखपुर में पत्रकारवार्ता में पूर्वोत्तर रेलवे की उपलब्धियां गिना रहे थे। उन्होंने कहा कि यात्रियों को बेहतर यात्रा सुविधा उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। यात्रियों की शिकायतों का निपटारा करने में भी यह रेलवे टाप पर है। रेल मदद पोर्टल व एप पर मिली शिकायतों का 10 मिनट में समाधान हो रहा है। विद्युतीकरण का कार्य तेज गति से चल रहा है। वर्ष 2020-21 में 561.36 किमी रेल लाइन का विद्युतीकरण कर पूर्वोत्तर रेलवे देशभर में दूसरे स्थान पर रहा है। वर्ष 2022 तक 95 फीसद रेल लाइनों का विद्युतीकरण पूरा कर लिया जाएगा। वर्ष 2023 तक सभी लाइनों का विद्युतीकरण करने का लक्ष्य निर्धारित है। संरक्षा को भी मजबूत किया जा रहा है। सभी मानवरहित समपार फाटक समाप्त हो गए हैं। इसका असर दिखने लगा है।

स्टेशनों से यांत्रिक सिग्नलों को समाप्त क‍िया गया

उन्‍होंने कहा क‍ि वर्ष 2019 से अभी तक एक भी परिणामी दुर्घटना नहीं हुई है। स्टेशनों से यांत्रिक सिग्नलों को समाप्त कर दिया गया है। ट्रेनों को 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने के लायक ट्रैक बनाए जा रहे हैं। ऊर्जा और जल संरक्षण में भी बेहतर कार्य हो रहे हैं। छतों पर 4.72 एमडब्लूबीपी क्षमता के सौर ऊर्जा के पैनल लगाए गए हैं। इससे 51 लाख रुपये की बचत हुई है। यांत्रिक कारखाना गोरखपुर में दो रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए गए हैं। वित्तीय वर्ष में विभिन्न क्षेत्रों में पांच सिस्टम तैयार करने की योजना है। 287 किमी रेल लाइन पर ट्रेनों की गति बढ़ाकर समय पालन दुरुस्त किया गया है। वर्तमान में ट्रेनों का समय पालन 96 फीसद हो गया है। गोरखपुर सहित 295 स्टेशनों पर निश्शुल्क वाइफाइ की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

टीकाकरण का लक्ष्य पूरा, 739 रेलकर्मी ही बच गए

पूर्वोत्तर रेलवे ने टीकाकरण का लक्ष्य लगभग पूरा कर लिया है। कुल 47851 में से 47112 कर्मचारियों को कोरोना का पहला डोज लग चुका है। किन्हीं कारणों से सिर्फ 739 कर्मी ही शेष रह गए हैं। कोविड की तीसरी लहर को देखते हुए सभी अस्पतालों में अगस्त में बच्चों के लिए अलग से वार्ड और आक्सीजन प्लांट लगा दिए जाएंगे।

चलाई जा रहीं 126 एक्सप्रेस व 42 जोड़ी पैसेंजर ट्रेनें

कोविड प्रोटोकाल को देखते हुए ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। 136 में से 126 जोड़ी एक्सप्रेस तथा 69 में से 42 जोड़ी पैसेंजर ट्रेनें चल रही हैं। 34 जोड़ी ट्रेनें एलएचबी ट्रेनें चल रही हैं। इतनी ही ट्रेनों में इलेक्ट्रिक इंजन पर हेड आन जेनरेशन सिस्टम लगाकर एक पावरकार हटा ली गई है। इससे 20 करोड़ की बचत हुई है।

एएलपी के लिए रिक्त नहीं है पद, करना होगा इंतजार

महाप्रबंधक ने बताया कि सहायक लोको पायलटों (एलएलपी) के पद पर भर्ती के लिए रिक्त जगह नहीं बची है। फिलहाल, सभी पदों पर नियुक्ति कर ली गई है। ऐसे में अभ्यर्थियों और विभागीय परीक्षा पास करने वाले रेलकर्मियों को अभी एएलपी के पदों पर तैनाती के लिए इंतजार करना होगा।

2023 तक पूरा होगा गाजीपुर-छपरा मार्ग का दोहरीकरण

महाप्रबंधक ने बताया कि दोहरीकरण का कार्य भी तेज गति से हो रहा है। भटनी-औंड़िहार मार्ग पर निर्माण कार्य शुरू हो गया है। वर्ष 2023 तक गाजीपुर-छपरा रेलमार्ग का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। एक सवाल पर उन्होंने बताया कि बासडीह और बलिया के बीच संवेदनशील तीन किमी रेलमार्ग पर भी ट्रेनों का संचालन सही हो गया है। पूरे ट्रैक को बदल दिया गया है। अब ट्रैक बारिश में क्षतिग्रस्त नहीं होगा। इस मार्ग पर 45 की जगह 65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चलने लगी हैं।

नहीं बदलेगा इंजन

भटनी जंक्शन पर छपरा से वाराणसी रूट पर चलने वाली ट्रेनों का इंजन नहीं बदलना पड़ेगा। भटनी से पीवकोल के बीच सात किमी लंबी बाइपास रेल लाइन तैयार हो रही है। यह रेल लाइन दिसंबर तक पूरी हो जाएगी। इसके बन जाने से ट्रेनों का संचालन आसान हो जाएगा। समय की भी बचत होगी।

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