आक्सीजन ने भी ले ली आंखों की रोशनी, जानिए क्या-क्या किया नुकसान

बीआरडी मेडिकल कालेज में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि ब्लैक फंगस के मरीजों की आंखों की रोशनी आक्सीजन आइसीयू व स्टेरायड ने मिलकर छीनी थी। इन तीनों का उपयोग करने वाले 21 मरीजों में ब्लैक फंगस गंभीर स्थिति में पहुंच गया था।

Rahul SrivastavaWed, 15 Sep 2021 05:38 PM (IST)
आक्सीजन, आइसीयू व स्टेरायड ने छीन ली लोगों की आंखों की रोशनी। प्रतीकात्मक तस्वीर

गोरखपुर, गजाधर द्विवेदी : बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कालेज में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि ब्लैक फंगस के मरीजों की आंखों की रोशनी आक्सीजन, इंटेंसिव केयर यूनिट (आइसीयू) व स्टेरायड ने मिलकर छीनी थी। कोविड संक्रमण के दौरान इन तीनों का उपयोग करने वाले 21 मरीजों में ब्लैक फंगस गंभीर स्थिति में पहुंच गया था। इनमें से 30 फीसद अर्थात नौ मरीजों की एक आंख की रोशनी चली गई और इलाज के बाद भी नहीं लौटी। डाक्टरों के मुताबिक किसी तरह उनकी जान बचा ली गई। वे बहुत ही गंभीर थे।

मेडिकल कालेज में मई से जुलाई के बीच आए ब्लैक फंगस के 105 मरीज

प्राचार्य डा.गणेश कुमार के निर्देश पर नेत्र रोग विभाग के अध्यक्ष डा. रामकुमार जायसवाल की देखरेख में यह अध्ययन रेजीडेंट डा. अदिति झुनझुनवाला ने किया है। मेडिकल कालेज के पोस्ट कोविड ओपीडी में मई से जुलाई के बीच ब्लैक फंगस की शिकायत लेकर 105 मरीज आए। ये सभी पहले कोरोना संक्रमित थे। इनमें से 30 में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई थी। नेत्र रोग विभाग की डा. अदिति झुनझुनवाला ने इन मरीजों का डाटा एकत्र कर उसकी पड़ताल की। 21 मरीज (70 फीसद) अति गंभीर थे। इन्होंने स्टेरायड का सेवन किया था, आइसीयू में थे और आक्सीजन पर रहे। इनमें से नौ मरीजों (30 फीसद) की एक आंख की रोशनी चली गई, जो वापस नहीं लौटी। इनके स्टेरायड लेने का मीन ड्यूरेशन (औसत दिन) नौ, आक्सीजन पर रहने का पांच व आइसीयू में रहने का सात दिन रहा। इन तीनों ने मिलकर ब्लैक फंगस के मरीजों को गंभीर किया था। इस अध्ययन को प्रकाशित करने के लिए इंडियन जर्नल आफ आप्थलमोलाजी, कोलकाता भेजा गया है।

अन्य डाटा

- 33.3 फीसद (10 मरीज) 41 से 50 वर्ष के बीच के थे।

- 60 फीसद पुरुष (18) व 40 फीसद (12) महिलाएं थीं।

- 90 फीसद (27 मरीज) गांव से आए थे।

- 90 फीसद मरीजों का शुगर लेवल 200 एमजी से अधिक था।

- 86.6 फीसद (26 मरीज) पूर्व से ही शुगर से पीडि़त थे।

- 96.7 फीसद (29 मरीजों) का एचबीए1सी (शुगर जांच का मानक) 6.4 फीसद से ज्यादा था, जो सामान्य लोगों में 5.7 फीसद के नीचे होता है।

ब्लैक फंगस के मरीजों के इलाज पर शुरू कर दिया गया शोध

बीआरडी मेडिकल कालेज के नेत्र रोग विभाग के अध्यक्ष डा.रामकुमार जायसवाल ने कहा कि ब्लैंक फंगस के मरीजों पर एक बेहतर अध्ययन सामने आया है। इसे एसोसिएशन आफ कम्युनिटी आप्थलमोलाजी आफ इंडिया के अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में सराहा गया है। इसके बाद अब ब्लैक फंगस के मरीजों के इलाज पर शोध शुरू कर दिया गया है, जो शीघ्र ही पूरा हो जाएगा।

स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है स्टेरायड, आक्सीजन व आइसीयू

अध्ययनकर्ता डा.अदिति झुनझुनवाला ने कहा कि अध्ययन में एक बात स्पष्ट रूप से सामने आई कि ज्यादा दिन स्टेरायड लेना, आक्सीजन पर या आइसीयू में ज्यादा दिन रहना स्वास्थ्य की द्ष्टि से अच्छा नहीं है। जिन मरीजों ने इन तीनों का उपयोग नहीं किया था, उनमें ब्लैक फंगस के बहुत कम लक्षण थे, जो दवाओं से ठीक हो गए।

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