UP Madrasa News: मदरसों में शुरू हुई आनलाइन पढ़ाई, 29 हजार बच्‍चों को होगा फायदा Gorakhpur News

UP Madrasa News गोरखपुर के मदरसों में तकरीबन 29 हजार बच्‍चे पढ़ते हैं। पिछले साल कोविड के चलते पठन-पाठन नहीं हो पाया था। प्राइमरी व माध्यमिक विद्यालयों में आनलाइन क्लास संचालित किए जा रहे है। इसी तर्ज पर मदरसो में भी आनलाइन क्लास चलाई जा रही है।

Pradeep SrivastavaSun, 13 Jun 2021 12:45 PM (IST)
गोरखपुर के मदरसों में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो गई है। - प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

गोरखपुर, जेएनएन। चार माह से बंद चल रहे मदरसों के बच्‍चों की आनलाइन क्लास शुरू हो गई है। अनुदानित समेत कुछ बड़े मदरसों ने ही आनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था शुरू की है। पिछले साल भी मदरसा शिक्षा परिषद ने मदरसा प्रबंधकों से बच्‍चों को आनलाइन पढ़ाने को कहा था, लेकिन संसाधनों के अभाव में बड़ी संख्या में छात्र इससे नहीं जुड़ पाए।

गोरखपुर के मदरसों में 29 हजार बच्‍चे

जिले में दस अनुदानित समेत 250 मदरसों में तकरीबन 29 हजार बच्‍चे पढ़ते हैं। पिछले साल भी कोविड के चलते पठन-पाठन नहीं हो पाया था। प्राइमरी व माध्यमिक विद्यालयों में आनलाइन क्लास संचालित किए जा रहे है। इसी तर्ज पर मदरसो में भी आनलाइन क्लास चलाई जा रही है। दीवान बाजार स्थित मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया के प्रधानाचार्य हाफिज नजरे आलम कादरी ने बताया कि आनलाइन पढ़ाई शुरू हो गई है। पिछले साल शिक्षकों को आनलाइन पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया गया था, जिससे बच्‍चों को पढ़ाना आसान हो गया है। समाजसेवी आदिल अमीन ने शहर के किसी बड़े मदरसे मेें डिजीटल स्टूडियो बनाकर उससे सभी मदरसों के बच्‍चों को जोडऩे की मांग की है। उनका कहना है कि आनलाइन पढ़ाई की केंद्रीकृत व्यवस्था होने से ब'चों को पढऩे में आसानी होगी और सभी को एक जैसी शिक्षा मिलेगी।

संसाधनों की कमी बनी मुसीबत

आनलाइन पढ़ाई में संसाधन की कमी आड़े आ रही है। बहुत से ब'चों के अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन नहीं है। जिनके पास है भी वहां नेटवर्किंग की समस्या है।

गोरखपुर विश्वविद्यालय ने एक समान पाठ्यक्रम से इनकार क‍िया

उधर, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय एक समान पाठ्यक्रम लागू करने से मना कर द‍िया है। गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति के अनुसार विश्वविद्यालय के विकास में बाधक होने के साथ ही यह अकादमिक स्वायत्तता से भी वंचित करेगा। शासन को लिखे पत्र में कुलपति प्रो. राजेश स‍िंह ने तर्क दिया है कि यदि समान न्यूनतम पाठ्यक्रम लागू किया गया तो विवि के विकास में बाधा आएगी।

फिर भी यदि सरकार को ऐसा लगता है कि विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रमों में समानता का कुछ रूप विद्यार्थियों के हित में अनिवार्य है तो एक समान पाठ्यक्रम के कुल विषय वस्तु का 30 फीसद स्वीकार करने की अनुमति व शेष 70 फीसद हमारे शिक्षकों की दक्षता एवं विद्यार्थियों की आवश्यकता के अनुरूप नियत करने की अनुमति दे।

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