कभी चेरो जाति के लोगों का था निवास, जानिए आज है किस हालत में Gorakhpur News

डीह स्थान पर पांच वृक्षों के बीच कठबसिया देवी। जागरण

कुशीनगर जिले के तहसील क्षेत्र तमकुहीराज के बरवा राजापाकड़ गांव के दक्षिण पश्चिम स्थित टीलानुमा स्थान को मध्ययुगीन समृद्ध सभ्यता का अवशेष बताया जाता है। पुरातत्व विभाग खोदाई कराए तो कई रहस्यों से पर्दा उठ सकता है। संपूर्ण डीह पर पुराने ईट तथा खपरैल के टुकड़े बिखरे पड़े है।

Rahul SrivastavaSun, 18 Apr 2021 05:10 PM (IST)

गोरखपुर, जेएनएन : कुशीनगर जिले के तहसील क्षेत्र तमकुहीराज के बरवा राजापाकड़ गांव के दक्षिण पश्चिम स्थित टीलानुमा स्थान को मध्ययुगीन समृद्ध सभ्यता का अवशेष बताया जाता है। पुरातत्व विभाग खोदाई कराए तो कई रहस्यों से पर्दा उठ सकता है। संपूर्ण डीह पर पुराने ईट तथा खपरैल के टुकड़े बिखरे पड़े है। जोताई के दौरान नाली आदि के भी अवशेष सहज मिल जाया करते हैं।

200 मीटर के दायरे में चार कुएं

महज 200 मीटर के दायरे में चार कुंओं का अस्तित्व यह प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त है कि यहां किसी समृद्धशाली एवं विकसित सभ्यता के निवासी रहते थे। उक्त कुओं को वर्तमान में पाट दिया गया है। डीह से सटे 300 मीटर की दूरी पर पश्चिम में स्थित 50 एक क्षेत्र में चकदहां चंवर मौजूद है। जिसकी मिट्टी से डीह स्थान पर निर्माण कार्य होना बताया जाता है। ग्रामीणों की मानें तो उनके पूर्वजों के मुताबिक यहां पलामू एवं रोहतास राजघरानों से संबंधित चेरो जाति के लोग निवास करते थे।

आपदा के चपेट में आकर नेपाल की तरफ पलायन कर गए चेरो जाति के लोग

अति धनी व समृद्धशाली उक्त चेरो किसी महामारी या आपदा के चपेट में आकर यहां से नेपाल की तरफ पलायन कर गए। किवदंतियों के मुताबिक जाते समय वे कीमती धातु व संपत्ति को एक जंजीर से बंधे धातु के सात बड़े घड़ों में बंद कर जमीन में दफन कर गए और तत्कालीन परंपरा के अनुसार इसकी सुरक्षा हेतु देवी की प्राण प्रतिष्ठा कर गए। कालांतर में इस स्थान पर बांस की एक प्रजाति कठबांसी का जंगल उग आया। बाद में देवी और बरम बाबा की ङ्क्षपडी मिली जो आज भी कठबसिया देवी स्थान और डीह वाले बरम बाबा के रूप में ग्रामीणों के आस्था, श्रद्धा व विश्वास का केंद्र है।

दस्‍तावेज के माध्‍यम से अपना स्‍वामित्‍व जता रहे थे लोग

ग्रामीण बताते हैं कि चकबंदी के समय कुछ चेरो जाति के लोग यहां आए थे और ताम्र पत्र पर किसी अन्य भाषा में लिखे दस्तावेज के माध्यम से उक्त डीह स्थान पर अपना स्वामित्व जता रहे थे। ग्रामीण ओमप्रकाश जायसवाल, जितेंद्र वर्मा, रवि जायसवाल, सिंहासन सिंह, नंदलाल चौहान, हारुन अंसारी आदि ने कहा कि पुरातत्व विभाग द्वारा डीह स्थान के अवशेष का अन्वेषण किया जाए तो कई रहस्यों से पर्दा उठ जाएगा।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से जुड़ी प्रमुख जानकारियों और आंकड़ों के लिए क्लिक करें।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.