3.73 लाख के गबन के मामले में सचिव व पूर्व ग्राम प्रधान को नोटिस

भाटपाररानी विकास खंड के शंकरपुरा में शौचालय निर्माण व कूड़ा पात्र में तीन लाख 73 हजार रुपये के किए गए गबन के मामले में विभागीय कार्रवाई अब तेज हो गई है। गुरुवार को जिला विकास अधिकारी ने तत्कालीन सचिव व ग्राम प्रधान को नोटिस जारी कर 15 दिनों के अंदर गबन की धनराशि जमा करने का निर्देश दिया है।

JagranFri, 22 Oct 2021 07:00 AM (IST)
3.73 लाख के गबन के मामले में सचिव व पूर्व ग्राम प्रधान को नोटिस

देवरिया: भाटपाररानी विकास खंड के शंकरपुरा में शौचालय निर्माण व कूड़ा पात्र में तीन लाख 73 हजार रुपये के किए गए गबन के मामले में विभागीय कार्रवाई अब तेज हो गई है। गुरुवार को जिला विकास अधिकारी ने तत्कालीन सचिव व ग्राम प्रधान को नोटिस जारी कर 15 दिनों के अंदर गबन की धनराशि जमा करने का निर्देश दिया है। गबन की धनराशि जमा न करने की दशा में उनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा।

वर्ष 2020 में गांव में शौचालय व कूड़ा पात्र के नाम पर लाखों रुपये निकाले गए। ग्रामीणों ने तत्कालीन ग्राम प्रधान व सचिव पर शौचालय निर्माण में धांधली करने का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से शिकायत की थी। जिलाधिकारी ने जांच कराया। जांच में शौचालय निर्माण व कूड़ा पात्र खरीद में तीन लाख 72 हजार रुपये का गबन पाया गया। इसके बाद तत्कालीन ग्राम प्रधान नथुनी प्रसाद व सचिव वीरेंद्र सिंह को नोटिस जारी किया गया, लेकिन अभी तक जवाब नहीं दिया गया है। ऐसे में गुरुवार को जिला विकास अधिकारी श्रवण कुमार राय ने अंतिम नोटिस जारी कर दिया। जिला विकास अधिकारी ने कहा कि अगर 15 दिनों के अंदर जवाब नहीं मिलता है तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।

भवन निर्माण में अड़ंगा डालने वाले ग्राम प्रधान को नोटिस

भाटपाररानी विकास खंड के ग्राम फुलवरिया के प्रधान को प्रशासन ने नोटिस दिया है। अगर 15 दिनों के अंदर कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के हो रहे निर्माण कार्य में दखल देना बंद नहीं करती हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

भाटपाररानी के फुलवरिया में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय है। वहां कुछ निर्माण होना है। आरोप है कि ग्राम प्रधान आरती देवी ने निर्माण कार्य का रोक दिया है। जिसके चलते निर्माण कार्य ठप है। अधिकारियों ने कई बार बात कर निर्माण शुरू कराने का प्रयास तो किया, लेकिन वह सफल नहीं हो सके। अब जिलाधिकारी ने नोटिस दिया है। इस नोटिस का जवाब न देने व निर्माण कार्य शुरू न कराने पर ग्राम प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक पावर जिलाधिकारी द्वारा सीज किया जा सकता है। ग्राम प्रधान का तर्क है कि जहां यह निर्माण कार्य कराना चाहते हैं, वह खेल का मैदान है। ऐसे में बच्चों का प्रभावित हो जाएगा। डीपीआरओ अविनाश कुमार ने कहा कि ग्राम प्रधान को नोटिस दिया गया है।

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