Blood Sugar Treatment: नीम, लहसुन, अदरक व हल्दी से नियंत्रित हो सकता है ब्लड शुगर, ऐसे करें इसका प्रयोग

टाइप-टू के मरीजों में इंसुलिन का निर्माण तो होता है लेकिन प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण व ग्लूकोज को ऊर्जा में तब्दील नहीं कर पाता है। नीम अदरक लहसुन व हल्दी के प्रयोग से शुगर को नियंत्रित करने में सफलता मिली है।

Pradeep SrivastavaWed, 08 Sep 2021 12:30 PM (IST)
नए शोध में सामने आया है क‍ि नीम व करेला का प्रयोग शुगर को कंट्रोल करता है। - प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। नीम, लहसुन, अदरक व हल्दी से ब्लड शुगर की बीमारी नियंत्रित हो सकती है। बीआरडी मेडिकल कालेज में हुए शोध में यह बात सामने आई है। फार्माकोलाजी विभाग के डाक्टरों ने इन चारों के इस्तेमाल से चूहों का ब्लड शुगर नियंत्रित करने में सफलता पाई है। इसके बाद दूसरे चरण में डाक्टरों ने शुगर के प्रभाव पर अध्ययन शुरू कर दिया है। इस बीमारी से शरीर की संचरना व जीन पर होने वाले प्रभावों पर अध्ययन किया जा रहा है।

चूहों पर हुए शोध में हुआ खुलासा

करीब पांच साल पहले 56 चूहों पर प्रयोग किया गया था। 28-28 चूहों के दो समूह बनाए गए थे। दोनों ग्रुप के चूहों को इंजेक्शन लगाकर 40 फीसद बीटा सेल नष्ट कर दी गई थी। बीटा सेल ही शरीर में शुगर नियंत्रित करने वाली इंसुलिन बनाती है। साथ ही उच्च वसायुक्त भोजन देकर इंसुलिन निर्माण में प्रतिरोध उत्पन्न किया गया। इसलिए वे टाइप-टू ब्लड शुगर के शिकार हो गए थे। इसके बाद उन्हें 14-14 की संख्या में चार ग्रुपों में बांटा गया। उसे नियंत्रित करने के लिए दो ग्रुपों पर अदरक, लहसुन, हल्दी, नीम का प्रयोग किया गया और दो ग्रुपों के चूहों को एलोपैथिक दवा दी गई। इससे एक माह में उनका शुगर नियंत्रित हो गया। बीटा सेल बढ़ गई। हालांकि उनका इलाज आठ माह चलता रहा।

अब शुगर के प्रभाव पर हो रहा अध्ययन

शोध में शामिल डा. जमाल हैदर ने बताया कि टाइप-टू के मरीजों में इंसुलिन का निर्माण तो होता है लेकिन प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण व ग्लूकोज को ऊर्जा में तब्दील नहीं कर पाता है। जिससे शुगर लेवल बढ़ जाता है। यह प्रयोग चूहों पर किया गया। नीम, अदरक, लहसुन व हल्दी के प्रयोग से शुगर को नियंत्रित करने में सफलता मिली है, अब शुगर के प्रभाव पर अध्ययन चल रहा है। शुगर शरीर के संवेदी कोशिकाओं को प्रभावित करता है। हल्दी, लहसुन, नीम आदि के अर्क ने चमत्कारिक असर दिखाया है। करीब आठ माह तक चूहों का इलाज किया गया। इनकी कोशिकाओं की संवेदना में कोई कमी नहीं आई।

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