मोटापा व मधुमेह जैसे रोगों से बचाता है मशरूम, घर में ऐसे करें इसकी खेती

Mushroom farming मशरूम में बसा तथा सर्करा कम होने के कारण यह मोटापे मधुमेह तथा उच्च रक्तचाप से पीड़ित व्यक्तियों के लिए आदर्श शाकाहारी आहार माना गया है। मशरूम मधुमेह और मोटापा जैसी बीमार‍ियों में काफी फायदेमंद भी माना जाता है।

Pradeep SrivastavaWed, 20 Oct 2021 08:05 AM (IST)
मोटापा और मधुमेह जैसी बीमारियों में मशुरूम काफी फायदेमंद साबि‍त होता है। - फाइल फोटो

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। Mushroom farming: भारत में मशरूम जैसे गूदेदार कवकों को कई नामों से जाना जाता है, जैसे कुकुरमुत्ता, छरक, भूमि कवक, खुंब, खुंवी, आदि। प्राय: बरसात के दिनों में छतरी नुमा संरचनाएं सड़े गले कूड़े के ढेरों पर या गोबर की खाद या सूखे लकड़ी के लट्ठों पर देखने को मिलता है जो एक तरह का वह भी मशरूम होता है। इसको आसानी से घर में भी उगाया जा सकता है, इसका प्रयोग सब्जी, पकौड़ी, सूप के रूप में किया जाता है। मशरूम खाने में स्वादिष्ट सुगंधित लायम तथा पोषक तत्वों (विशेषकर प्रोटीन) से भरपूर होता है। इसमें बसा तथा सर्करा कम होने के कारण यह मोटापे मधुमेह तथा उच्च रक्तचाप से पीड़ित व्यक्तियों के लिए आदर्श शाकाहारी आहार माना गया है। इसका प्रयोग मधुमेह व मोटापा में काफी फायदेमंद माना जाता है। 

शाकाहारी आहार मशरूम में कम है वसा तथा सर्करा की मात्रा

व्यवसायिक रूप से तीन प्रकार का मशरूम उगाया जाता है, बटन मशरूम (अक्टूबर से मार्च), ढींगरी मशरूम (मार्च से जून) तथा दूधिया मशरूम (जून से अक्टूबर) तीनों प्रकार की मशरूम को किसी भी कमरे या टीन सेट में आसानी से उगाया जा सकता है। ढींगरी मशरूम उगाने का सही समय मार्च से जून के महीने में उगाते हैं। सामान्यता 1.5 किलोग्राम सूखे पुआल/भूसे या छह किलोग्राम गीले पुआल/भूसे से लगभग एक किलोग्राम ताजी मशरूम आसानी से प्राप्त होती है। जिसकी कीमत रुपया 80 से 90 प्रति किलोग्राम है। बटन मशरूम हेतु तैयारी मध्य अगस्त माह से प्रारंभ करते हैं।

ऐसे करें इसकी खेती

एक क्‍व‍िंटल तैयार किए गए कम्पोस्ट से लगभग 30 से 35 किलोग्राम बटन मशरूम की उपज प्राप्त होती है। उत्पादन खर्च प्रति किलोग्राम रुपया 50 से 60, बिक्री दर रुपया 100 से 150, शुद्ध लाभ रुपया 50 से 100 प्रति किलोग्राम होता है। पूर्वांचल में मशरूम उत्पादन करने की अपार संभावनाएं हैं, लगभग सभी जनपदों में छिटपुट ढींगरी एवं बटन मशरूम की खेती हो रही है, जिसमें गोरखपुर, बस्ती जनपद अग्रणी हैं। किसानों के पास मशरूम उत्पादन में उपयोग होने वाले अधिकतर संसाधन जैसे भूसा, कंपोस्ट, बांस, रस्सी आदि उपलब्ध होते हैं । केवल मशरूम का स्पान (बीज) ही बाहर से बस्ती, लखनऊ, वाराणसी से मंगाना पड़ता है। उसमें प्रयोग होने वाले उर्वरक, फफूंदनाशक स्थानीय बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।

मशरूम की खेती करने का तरीका खाद्यान्न एवं बागवानी फसलों से बिल्कुल अलग होता है, अतः इसकी खेती की शुरुआत करने से पहले तकनीकी एवं व्यवहारिक ज्ञान हेतु प्रशिक्षण लेना लाभकारी होगा। उक्त सभी बातों को ध्यान में रखते हुए मशरूम की खेती में रुचि रखने वाले बेरोजगार नवयुवकों/नवयुवतियों, कृषक महिलाओं, कृषकों एवं विशेषकर प्रवासी श्रमिकों हेतु कृषि विज्ञान केंद्र, बेलीपार, गोरखपुर में समय-समय पर प्रशिक्षण आयोजित किए जाते हैं। किसान यहां से जानकारी लेकर मशरूम की खेती कर स्वरोजगार से जुड़ सकते हैं। - डा. शैलेंद्र सिंह, वैज्ञानिक (पादप सुरक्षा) कृषि विज्ञान केंद्र, बेलीपार, गोरखपुर।

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