सांसद रविकिशन भोजपुरी गीतों में अश्लीलता के खिलाफ मुखर, प्रतिबंध लगाने की मांग

मंत्रियों को भेजे गए पत्र में सांसद ने कहा कि भोजपुरी बेहद समृद्ध भाषा है। लोक नाटककार भिखारी ठाकुर और लोकगायक महेंद्र मिश्र के गीतों की विदेशों तक में मांग है। उन्‍होंने भोजपुरी फिल्म और गीतों में अश्लीलता की बढ़ रही दखल के खिलाफ आवाज उठाई है।

Satish Chand ShuklaMon, 14 Jun 2021 05:49 PM (IST)
भाजपा सांसद रविकिशन की फाइल फोटो, जागरण।

गोरखपुर, जेएनएन। सांसद रवि किशन ने भोजपुरी फिल्म और गीतों में अश्लीलता की बढ़ रही दखल के खिलाफ आवाज उठाई है। इसपर रोक लगाने के लिए सूचना और प्रसारण मंत्री, संस्कृति मंत्री सहित उत्तर प्रदेश व बिहार के मुख्यमंत्रियों का पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि अश्लीलता से भरे भोजपुरी गीतों और भोजपुरी फिल्मों को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया जाए। साथ ही आगे से ऐसा न हो, इसके लिए कड़ा कानून बनाया जाए।

बेहद समृद्ध भाषा है भोजपुरी

मंत्रियों को भेजे गए पत्र में सांसद ने कहा कि भोजपुरी बेहद समृद्ध भाषा है। लोक नाटककार भिखारी ठाकुर और लोकगायक महेंद्र मिश्र के गीतों की विदेशों तक में मांग है। इस भाषा में गंगा मइया तोहें पियरी चढ़इबें, धरती मइया, लागी नहीं छूटे रामा जैसी कई ऐसी यादगार फिल्में बनी हैं, जिन्होंने भोजपुरी संस्कृति को विश्व फलक पर स्थापित किया। उनके कर्णप्रिय गीत आज भी हमारे कानों में गूंजते हैं। लेकिन दुख की बात यह है कि बीते एक दशक से भोजपुरी फिल्मों और गीतों के स्तर में काफी गिरावट आई है। आज की भोजपुरी फिल्में और गीत अश्लीलता के पर्याय बनते जा रहे हैं, जो चिंता का विषय है। इस अविलंब लगाम लगाने की आवश्यकता है। लोगों तक पहुंच चुकीं फिल्मों और गीतों को प्रतिबंधित करके और कड़ा कानून बनाकर ऐसा किया जाना संभव है।

सांसद बनने के बाद लगातार उठा रहे आवाज

भोजपुरी मेगा स्टार सांसद रवि किशन ने भोजपुरी फिल्म जगत में पिछले 3 दशकों से अधिक समय से मुंबई से जुड़े हू?। इसमें कोई संदेह नहीं है कि भोजपुरी फ़ल्मि उद्योग को समृद्ध बनाने में इनका महत्वपूर्ण योगदान है । उनकी तरफ से वर्तमान में उठी या मांग निश्चित रूप से प्रासंगिक भी लगता है। रवि किशन गोरखपुर से सांसद बनने के बाद लगातार भोजपुरी के उत्थान के लिए प्रयास कर रहे हैं लोकसभा में वह इकलौते सांसद हैं जिनके द्वारा भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाने के लिए एक ग़ैर -सरकारी सदस्य का विधेयक भी संसद में पेश किया है, जिससे भारत सरकार द्वारा इस भाषा क़ो समवर्धन और संरक्षण प्रदान करें।

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