गोरखपुर के सवा लाख से ज्‍यादा श्रमिकों को मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ, पंजीकरण शुरू

उप श्रम आयुक्त अमित कुमार मिश्रा के अनुसार निर्माण श्रमिकों छोड़कर 45 प्रकार के नियोजन में कार्य करने वाले श्रमिकों का पंजीयन हो रहा है। जिसमें श्रमिक द्वारा एक एक बार 60 रुपये जमा कराकर अपना पंजीयन कराया जा सकता है।

Satish Chand ShuklaTue, 22 Jun 2021 06:29 AM (IST)
असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का फाइल फोटो, जेएनएन।

गोरखपुर, जेएनएन। असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले 45 तरह के कामगारों को शासन की विभिन्न योजनाओं का सीधा लाभ मिलेगा। इसके लिए सिर्फ उन्हें एक बार पंजीयन कराना होगा। पंजीयन के बाद कामगार पांच साल के लिए मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना एवं मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना से लाभान्वित हो सकेंगे।

श्रमिकों के लिए दो योजनाएं

उप श्रम आयुक्त अमित कुमार मिश्रा के अनुसार निर्माण श्रमिकों छोड़कर 45 प्रकार के नियोजन में कार्य करने वाले श्रमिकों का पंजीयन हो रहा है। जिसमें श्रमिक द्वारा एक एक बार 60 रुपये जमा कराकर अपना पंजीयन कराया जा सकता है। उन्‍होंने बताया कि वर्तमान में बोर्ड द्वारा दो योजनाए संचालित है। इनमें पहली योजना मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना है, जिसके अंतर्गत पंजीकृत कामगारों एवं उनके परिजनों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की निश्शुल्क सुविधा उपलब्ध होगी। वहीं दूसरी योजना मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना है, इस योजना के अंतर्गत कामगार की दुर्घटनावश मृत्यु अथवा दिव्यांगता होने पर अधिकतम दो लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना में पंजीकरण किसी भी जनसेवा केंद्र, साइबर कैफे या किसी अन्य माध्यम से भी पोर्टल 222.ह्वश्चह्यह्यड्ढ.द्बठ्ठ पर किया जा सकता है। बताया कि जिले में लगभग 1.30 लाख श्रमिकों का पंजीयन किया जाना है।

ये कामगार होंगे पात्र

समाचार पत्र वितरक, फुटकर फल सब्जी विक्रेता, चाय व चाट ठेला लगाने वाला, फुटपाथ व्यापारी, कुली, लाईट उठाने वाले, केटङ्क्षरग का कार्य करने वाला, फेरी लगाने वाले, मोटर साईकिल व साईकिल मरम्मत करने वाला, गैरेज कर्मकार, आटो चालक, सफाई कामगार, ढोल व बाजा बजाने वाला, टेंट हाउस में कार्य करने वाला, मछुआरा, तांगा व बैलगाड़ी चलाने वाला, अगरबत्ती बनाने वाला, भुजा बेचने वाला, पशुपालन, मत्स्य पालन, मुर्गी व बत्तख पालन में लगे कर्मकार, दुकानों में कार्य करने वाले, खेतिहर कर्मकार, चरवाहा, धोबी, दर्जी, माली, मोची, नाई, बुनकर, रिक्शा चालक, घरेलू कर्मकार, कूड़ा बीनने वाला, हाथ ठेला चलाने वाला, नाव चलाने वाला, नट-नटनी, रसोईया, ठेका मजदूर, सूत, रंगाई, कताई, चिकन कार्य, मीटशाप व पोल्ट्री फार्म पर कार्य करने वाले, कांच की चूड़ी एवं अन्य कांच उत्पादों में स्वरोजगार करने वाले योजनाओं के पात्र होंगे।

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