मालती ने दिखाया गजब का जज्‍बा, दिन-रात डटी रहीं मरीजों की सेवा में Gorakhpur News

इटवा सीएचसी पर प्रसव पीड़‍ित महिला के चिकित्सीय उपचार में जुटीं स्टाफ नर्स मालती। जागरण

कोरोना काल के दौरान सिद्धार्थनगर जिले के इटवा सीएचसी पर तैनात स्टाफ नर्स मालती देवी ने गजब की भूमिका निभाई। महिला चिकित्सक का पद रिक्त होने पर सारी जिम्मेदारी खुद के ऊपर ले ली। अस्पताल में ओपीडी बंद होने के बाद भी लेबर रूम को बंद नहीं होने दिया।

Rahul SrivastavaTue, 13 Apr 2021 01:10 PM (IST)

मोहम्मद मेहंदी, गोरखपुर : कोरोना काल के दौरान सिद्धार्थनगर जिले के इटवा सीएचसी पर तैनात स्टाफ नर्स मालती देवी ने गजब की भूमिका निभाई। महिला चिकित्सक का पद रिक्त होने पर सारी जिम्मेदारी खुद के ऊपर ले ली। अस्पताल में ओपीडी बंद होने के बाद भी लेबर रूम को बंद नहीं होने दिया। जो भी गर्भवती महिलाएं केंद्र पर आतीं, उन्हें भर्ती कराकर सुरक्षित प्रसव कराया। लगातार दो महीने ड्यूटी पर मुस्तैद रहीं। एक दिन भी घर नहीं गईं। मरीजों को मास्क व सैनिटाइज्ड भी खुद की व्यवस्था से उपलब्ध कराती रहीं।

स्टाफ नर्स के पद पर रहते हुए निभाई गजब की भूमिका

मूलत: जनपद बस्ती की निवासी मालती देवी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर स्टाफ नर्स के रूप में तैनात हैं। 19 और 14 वर्ष के दो लड़के हैं। लाकडाउन के बीच अस्पताल में ड्यूटी बढ़ गई। घर जाने की चिंता न सताए, इसके लिए समय का नियोजन किया और दो बेटों को यहीं पर बुला दिया। इनकी सक्रियता का नतीजा है कि जब कोरोना संक्रमण में लोग किसी तरह के मरीज से दूरी बनाए रखते थे, तब इन्‍होंने डिलीवरी रूम में नियमित ड्यूटी दीं। इसके चलते प्रसव से संबंधित केस यहां लगातार आते रहे। अप्रैल, 2020 में 98 तथा मई में 166 ने अस्पताल में सुरक्षित प्रसव कराया। माताओं को मास्क उपलब्ध कराना, शिशुओं को पुचकारने में भी मालती सदैव आगे रहीं।

दो महीने ड्यूटी पर मुस्तैद, मरीजों की करती रहीं मदद

मरीजों के बीच घुल मिल जाना ही इनकी खूबी में शामिल रहा। अधीक्षक डा. बी के वैद्य कहते हैं कि मालती ने सच में गजब का जज्बा दिखाया। कोरोना की जंग में इनकी भूमिका को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। बकौल मालती लाकडाउन में जब केस बढ़ रहे थे तो हर तरफ डर का माहौल था, परंतु जनता की उम्मीद स्वास्थ्य महकमे के ऊपर लगी रहती थी। इसी को देखते हुए दिन-रात सेवा में लगी रहीं। मरीजों व तीमारदारों को जागरूक भी करती रहीं कि सभी लोग मास्क लगाएं और शारीरिक दूरी का पालन करते रहे। जिनके पास मास्क नहीं होता, उनको इसकी सुविधा भी प्रदान करा देती थीं।

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