जानिए कहां पर पोखरे में बारिश का पानी बढ़ा रहा भूगर्भ जल स्‍तर Gorakhpur News

भलुअनी के गड़ेर स्थित पोखरे में भरा पानी। जागरण

देवरिया जिले के भलुअनी विकास खंड के गड़ेर में शिक्षक मदन शाही की सोच से पोखरे में वर्षा जल की बूंदे इकट्ठा होकर भूगर्भ जलस्तर को जहां बढ़ा रहा है वहीं पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिल रहा है।

Rahul SrivastavaFri, 23 Apr 2021 11:10 AM (IST)

गोरखपुर, जेएनएन : देवरिया जिले के भलुअनी विकास खंड के गड़ेर में शिक्षक मदन शाही की सोच से पोखरे में वर्षा जल की बूंदे इकट्ठा होकर भूगर्भ जलस्तर को जहां बढ़ा रहा है, वहीं पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिल रहा है। करीब दस साल पहले शिक्षक मदन शाही के मन में वर्षा जल संचयन को लेकर चिंता हुई। उसके बाद घर के लोगों के सहयोग से पोखरे का जीर्णोद्धार कराया, जिससे बारिश का पानी पोखरे से बाहर जाकर बर्बाद न हो। इसके लिए पोखरे के चारों तरफ मेड़बंदी कराकर बारिश के पानी को रोकने का इंतजाम किया, फिर उनके मन में आया कि पर्यावरण को संतुलित करने के लिए पोखरे के भीटे पर पौधारोपण किया जाए।

वन विभाग व उद्यान विभाग के विशेषज्ञों से ली राय

मदन ने इसके लिए वन विभाग व उद्यान विभाग के विशेषज्ञों से राय लेकर पौधारोपण कराया। इससे जल संचयन होने से जहां भूगर्भ जल स्तर को मेंटेंन किया, वहीं पोखरे पर लगे पौधों के जरिये पर्यावरण संरक्षण की कड़ी में शामिल हो गए। यह देखकर आसपास के गांव के लोगों ने भी जल संचयन के साथ पौधारोपण की तकनीक को समझा और अपने पोखरों को नया जीवन देने के साथ पौधारोपण का काम शुरू कर दिया। हाल यह है कि इस पोखरे पर लगे पेड़ों पर विभिन्न प्रजाति के पक्षियों का बसेरा हो गया है। सुबह-शाम चिड़‍ियों की चहचहाहट से माहौल खुशनुमा रहता है। इसके अलावा पोखरे में अब मछली पालन से पोखरे के संरक्षण पर आने वाला खर्च भी इससे निकल जाता है। जल संचयन के लिए यह पोखरा लोगों के लिए नजीर बन गया है।

शिक्षक शाही बताते हैं कि जल संचयन के साथ पर्यावरण संरक्षण मेरा उद्देश्य है, जिससे भविष्य में पानी व पर्यावरण के संकट से निजात पाया जा सके।

जल संरक्षण को प्रचारित करने की जरूरत

विशेषज्ञ डा. वंश गोपाल शाही ने कहा कि जल संचयन की पारंपरिक व्यवस्थाएं स्थानीय जरूरतों को पर्यावरण में तालमेल रखते हुए पूरा किया है। जल संरक्षण को व्यापक अभियान की तरह सरकारी और गैर सरकारी दोनों स्तरों पर प्रचारित करने की जरूरत है। युवा पीढ़ी समय रहते इसकी गंभीरता को अच्‍छी तरह से समझें। जल संरक्षण के लिए रेनवाटर हार्वेस्टिंग तकनीक का सहारा लेना चाहिए। यह तकनीक पानी की कमी से निपटने का अच्‍छा संसाधन है। दैनिक जागरण का अभियान समाज को नई दिशा देने वाला है। इस पर सभी को अमल करने की आवश्यकता है।

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