यूपी पुल‍िस के इस दफ्तर में अतिथि की तरह होता है फरियादियों का सत्कार, पहले जलपान फ‍िर पूछी जाती है परेशानी

गोरखपुर में डीआइजी रेंज जे. रविंद्र गौड के कार्यालय में फरियादियों के पहुंचते ही अनुचर उन्हें पहले जलपान कराते हैं। उसके बाद डीआइजी समस्या का समाधान कराते हैं। उनके इस प्रयास की हर कोई तारीफ कर रहा है। सिस्टम को कोसने वाले लोग भी यहां पहुंचकर अच्छा महसूस करते हैं।

Pradeep SrivastavaWed, 15 Sep 2021 08:40 AM (IST)
डीआइजी कार्यालय में फर‍ियादी की समस्‍या सुनती पुल‍िस कर्मी। - जागरण

गोरखपुर, सतीश पांडेय। पुलिस अधिकारी के कार्यालय में फरियादियों की ऐसी सत्कार शायद ही कहीं दिखे।डीआइजी रेंज जे. रविंद्र गौड के कार्यालय में पुलिस मित्र की भूमिका धरातल पर नजर आती है। फरियादियों के पहुंचते ही अनुचर उन्हें पहले जलपान कराते हैं। उसके बाद डीआइजी समस्या का समाधान कराते हैं। उनके इस प्रयास की हर कोई तारीफ कर रहा है। सिस्टम को कोसने वाले लोग भी यहां पहुंचकर अच्छा महसूस करते हैं।

पहुंचते ही अनुचर पहले कराते हैं जलपान, फिर पूछी जाती है परेशानी

कार्यभार ग्रहण करने के बाद डीआइजी जे. रविंद्र गौड़ का पूरा जोर इस बात पर रहा कि फरियादियों के साथ पुलिस अधिकारियों व थाने में अच्छा व्यवहार हो।इसकी शुरुआत उन्होंने अपने कार्यालय से की।शिकायत प्रकोष्ठ में तैनात दारोगा व सिपाहियों को हिदायत देने के साथ ही प्रशिक्षित कर बताया कि जनता से शालीनता व प्यार से पेश आने के साथ ही पूरी बात सुने।सामाजिक कार्यो में शिरकत कर लोगों को जागरुक करने के साथ ही उनके मन में पुलिस के प्रति विश्वास पैदा करें कि कोई बात होने पर लोग तुरंत पुलिस के पास पहुंचे।डीआइजी की इस पहल ने आम लोगों के मन में पुलिस की तस्वीर बदल दी है।

अच्छे व्यवहार से अपराध पर लगेगा लगाम

डीआइजी जे. रविंद्र गौड का मानना है कि जब अपराधि के बारे में पुलिस को सटीक सूचना होगी तभी अपराध मुक्त वातावरण बनाया जा सकता है। यह तभी संभव है जब जनता और पुलिस के बीच मधुर संबंध हो।अच्छे व्यवहार व सम्मान देकर पुलिस यह कर सकती है।सख्त रवैये के कारण पुलिस से कोई सूचना साझा करने में लोग हिचकते हैं।

मुरादाबाद में फरियादियों को पिलवाते थे काफी

दो साल पहले डीआइजी जे. रविंद्र गौड मुरादाबाद जिले के कप्तान थे। वहां उन्होंने पुलिस कार्यालय व थानों में फरियादियों के लिए काफी की व्यवस्था कराई थी। फरियादी के पहुंचते ही थानेदार पहले काफी पिलवाते फिर फरियाद सुनते।बच्चों के खेलने के लिए थानों में खिलौने की व्यवस्था भी कराई थी। जिसकी खूब सराहना हुई।

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