स्कूलों में हेड कवर, एप्रन व दस्ताने पहनकर खाना बनाएंगी रसोइया, बच्‍चों की सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम

कोरोना काल में ि‍विद्यालय बंद हो गए थे। कोरोना का प्रभाव कम होने के बाद विद्यालय खुलने लगे हैं। बच्‍चों को दिए जाने वाले मध्‍याह्न भोजन भी बनेेेेेगा। बच्‍चों को संक्रमित होने से बचाने के लिए शासन ने रसोईयों को एप्रन व दस्‍ताने पहनने का निर्देश दिया है।

Navneet Prakash TripathiSun, 26 Sep 2021 04:05 PM (IST)
स्कूलों में हेड कवर, एप्रन व दस्ताने पहनकर खाना बनाएंगी रसोइया। प्रतीकात्‍मक फोटो

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। परिषदीय स्कूलों में मिड-डे-मील की रसोइया अब एप्रन, दस्ताने व हेड कवर पहनकर भोजन बनाएंगी। इसके लिए स्कूलों के प्रधानाध्यापक व ग्राम प्रधान के संयुक्त खाते में प्रति रसोइए चार सौ की दर से बजट जारी कर दिया है। जिससे रसोइयों के लिए दो-दो सेट एप्रन, दस्ताने और कैप खरीदे जाएंगे।

सरकारी स्‍कूलों में संचालित होती है मिड डे मिल योजना

वर्तमान में जनपद में 2717 सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक अध्ययनरत करीब 3 लाख 67 बच्चों के लिए मध्याह्न भोजना योजना संचालित है। योजना के तहत स्कूलों में लगभग 7734 रसोइए कार्यरत हैं। कोरोना संक्रमण के चलते लंबे समय तक स्कूल बंद थे, जिसके कारण पठन-पाठन के साथ ही मिड-डे-मील का संचालन भी बंद हो गया था। जिससे बच्चों की पढ़ाई पर खासा असर पड़ा है।

कोरोना से सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम

कोराेना का संक्रमण कम होने पर शासन के निर्देश पर 23 अगस्त से पहले छठवीं से आठवीं तक के विद्यालय खुले। जबकि एक सितंबर से कक्षा एक से पांचवीं तक के विद्यालय संचालित होने शुरू हो गए हैं। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा के दृष्टिगत शासन ने यह निर्णय लिया है।

प्रधानाध्यापक को भेजनी होगी रसोइयों की फोटो

स्कूलों में बच्चों का मिड-डे-मील पकाने वाली रसोइयों का प्रतिदिन खाना बनाने के दौरान रसोइयों की फोटो खींचकर प्रधानाध्यापक को विभाग को भेजनी होगी। ताकि निर्देश का शत-प्रतिशत पालन हो रहा है या नहीं इस पर नजर रखी जा सके।

रसाेइयों को मिलेगा दो-दो सेट एप्रन

मध्‍याह्न भोजन के जिला समन्‍वयक दीपक पटेल बताते हैं कि रसोइयों के लिए दो-दो सेट एप्रन, दस्ताने व हेड कवर खरीदने के लिए प्रत्येक स्कूलों के प्रधानाध्यापक तथा ग्राम प्रधान के संयुक्त खाते में प्रति रसोइए 400 रुपये की दर से बजट जारी कर दिया गया है। इसको लेकर सभी प्रधानाध्यापकों को निर्देशित कर दिए गए हैं, ताकि शासन के निर्देश का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित हो सके।

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