राघव-शक्ति मिलन : भगवान राम ने की मां दुर्गा की आराधना, उतारी आरती

राघव-शक्ति मिलन समिति के तत्‍वाधान में आयोज‍ित कार्यक्रम में राघव व शक्ति दोनों ने एक-दूसरे की परिक्रमा की। इस दृश्य को हर व्यक्ति अपनी आंखों में कैद कर लेना चाहता था। भारी भीड़ के बीच भगवान राम ने मां दुर्गा की पूजा की।

Pradeep SrivastavaSat, 16 Oct 2021 07:40 AM (IST)
राघव शक्ति मिलन के दौरान भावपूर्ण दृश्‍य। - जागरण

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। राघव व शक्ति का मिलन। दृश्य अद्भुत था। श्रद्धालुओं की भीड़ अपार थी। दो महाशक्तियों का यह महामिलन बसंतपुर चौराहे पर विजयादशमी के दिन शुक्रवार को हुआ। हजारों कंठों से निकल रहे जयघोष के बीच भगवान राम ने शक्ति की आराधना कर मां भगवती की आरती उतारी। राघव व शक्ति दोनों ने एक-दूसरे की परिक्रमा की। इस दृश्य को हर व्यक्ति अपनी आंखों में कैद कर लेना चाहता था।

राघव-शक्ति मिलन समिति के तत्‍वाधान में हर साल होता है कार्यक्रम

राघव-शक्ति मिलन समिति के तत्‍वाधान में आयोज‍ित इस कार्यक्रम को देखने के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े थे। पूरा बसंतपुर चौराहा व आसपास की सड़कें श्रद्धालुओं से खचाखच भर गई थीं। वहां शक्ति व राघव का इंतजार करते श्रद्धालु लगातार जयघोष कर रहे थे। इसी समय दुर्गाबाड़ी की दुर्गा प्रतिमा को लेकर श्रद्धालु चौराहे पर पहुंचे तो जयघोष तेज हो गया। अब श्रद्धालुओं के साथ दुर्गा जी भी राघव का इंतजार करने लगीं। उनके पीछे अन्य जगहों की दुर्गा प्रतिमाएं क्रमश: आकर खड़ी होने लगीं।

हिंदी बाजार में समाप्त हुआ जुलूस

इसी बीच बर्डघाट रामलीला मैदान में रावण का वध कर राघव अपने दल-बल के साथ वहां पहुंचे। राघव के रथ के आगे श्रीराम अखड़ा दल के कलाकार अपना करतब दिखाते चल रहे थे। श्रद्धालुओं ने फिर भगवती व राघव का जयघोष किया। राघव ने भगवती की आरती उतारी और परिक्रमा की। इसके बाद भगवती की प्रतिमा को भी राघव की परिक्रमा कराई गयी। परिक्रमा के बाद दुर्गाबाड़ी की प्रतिमा सहित सभी प्रतिमाएं विसर्जन के लिए चली गईं। राघव अपने दल-बल के साथ लौट गए। उनका जुलूस हिंदी बाजार में पहुंचकर समाप्त हुआ।

वाहन खराब होने पर समितियों ने की नारेबाजी

प्रशासन के कहने पर इस बार दुर्गाबाड़ी की प्रतिमा वाहन से ले जाई जा रही थी। हर बार श्रद्धालु कंधे पर लेकर जाते थे। बसंतपुर पहुंचने से पहले रास्ते में वाहन खराब हो जाने से बंगाली समिति के लोग नाराज हो गए। प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। अन्य समितियों ने उनका समर्थन किया। विरोध में प्रतिमाओं को वहीं रोक दिया गया। इस बीच वाहन ठीक कराया गया। अंततः सिटी मजिस्ट्रेट के समझाने पर वे राजी हुए। राघव- शक्ति मिलन हुआ। इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमाएं विसर्जन के लिए रवाना हुईं।

1948 में शुरू हुई परंपरा

महानगर में राघव-शक्ति मिलन की परंपरा यहां के कुछ श्रद्धालुओं ने मिलकर 1948 में शुरू की थी। तभी से इस परंपरा का निर्वाह अनवरत रूप से आज तक जारी है। स्व. रघुवीर मास्टर, स्व. मोहन लाल यादव, स्व. रामचंदर सैनी व स्व. डा. केदार नाथ लाहिड़ी के संयुक्त प्रयास से यह परंपरा शुरू हुई थी।

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