top menutop menutop menu

Ayodhya Ram Mandir news: साध्वी ऋतंभरा से प्रभावित हो पहुंच गए अयोध्या

Ayodhya Ram Mandir news: साध्वी ऋतंभरा से प्रभावित हो पहुंच गए अयोध्या
Publish Date:Wed, 05 Aug 2020 09:30 AM (IST) Author: Satish Shukla

गोरखपुर, जेएनएन। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सेवा प्रकल्प के प्रांत मंत्री डॉ. राजेश चंद्र गुप्त विक्रमी राममंदिर के लिए दिसंबर 1992 के आंदोलन से खुद के जुडऩे की रोमांचकारी कहानी बयां करते हैं। बताते हैं कि 1990-92 के बीच उन्हें विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन महानगर मंत्री स्व. जय बहादुर खरे के नेतृत्व में बतौर सह मंत्री कार्य करने का मौका मिला।

उन्हीं दिनों शहर में साध्वी ऋतंभरा का प्रवास हुआ। साध्वी के ओजस्वी वचनों से वह इस कदर प्रभावित हुए कि उन्होंने कारसेवा में हिस्सा लेने का फैसला कर लिया। दिसंबर की शुरुआत में परिषद की टोली अयोध्या भेजी गई, जिसमें प्रभुनाथ गुप्त, स्व. पारसनाथ पांडेय, डॉ. धर्मेंद्र मणि त्रिपाठी जैसे कार्यकर्ताओं के साथ वह भी शामिल थे। राजेश बताते हैं कि स्व. पारसनाथ पांडेय की शक्ल-सूरत महंत अवेद्यनाथ से इतनी अधिक मिलती-जुलती थी कि लोग उनके पैर छूने लगते थे।

इस वजह से उन्हें कहीं भी आने-जाने में कोई दिक्कत नहीं होती थी। राजेश बताते हैं कि छह दिसंबर को जब ढांचा विध्वंस हुआ तो सभी उसमें लग गए। देखते ही देखते कारसेवा को अंतिम रूप मिल गया। सभी के चेहरे पर विजयी मुस्कान थी।

खुला राम मंदिर का ताला तो उमड़ पड़े श्रद्धालु

राम मंदिर का ताला खुलने के चश्मदीद होने का सौभाग्य प्राप्त है गोरखपुर के सनूप साहू को। बताते हैं कि उस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए वह स्कूटर से अयोध्या गए। एक फरवरी 1986 की शाम 4:40 बजे जब फैजाबाद के जिला जज ने विवाद स्थल का ताला खोलने का फैसला सुनाया तो पूरे शहर में यह खबर जंगल में आग की तरह फैली। मिठाई के विक्रेताओं ने खुशी में अपनी मिठाइयां मुफ्त में बांट दी। शाम पांच बजे जब ताला खोला गया तो सनूप वहीं पर मौजूद थे। बताते हैं कि श्रद्धालुओं का हुजूम रामलला के दर्शन को उमड़ पड़ा। बकौल सनूप लोगों को ऐसा लग रहा था कि उनकी गुम हुई अमानत किसी ने वापस कर दी हो। लोगों का उत्साह देख सनूप ने कारसेवकों की सेवा का जिम्मा संभाल लिया। छह दिसंबर 1992 के आंदोलन के लिए वह तीन दिसंबर को ही अयोध्या में पहुंच गए थे। सनूप और उनकी टीम ने कारसेवकों को भोजन वितरण की जिम्मेदारी संभाल ली। कारसेवकों के लिए शहर के विभिन्न स्थानों पर लगातार भोजन बन रहा था। देशभर से आए कारसेवकों में वह तबतक भोजन बांटते रहे, जबतक छह दिसंबर को ढांचा विध्वंस नहीं हो गया। सनूप को आज अपने सेवा की सार्थकता नजर आ रही है।

कुलपति होते हुए गिरफ्तार कर लिए प्रो. यूपी सिंह

गोरखनाथ मंदिर की शैक्षिक संस्था महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. यूपी सिंह एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे, जिनकी राम मंदिर आंदोलन के लिए गिरफ्तारी तब हुई जब वह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के कुलपति थे। प्रो. सिंह बताते हैं कि 6 दिसम्बर, 1992 को जब विवादित ढांचा गिरा, उस समय वह कुलपति होने के साथ-साथ विश्व सिंह परिषद के काशी प्रांत के अध्यक्ष भी थे। ढांचा गिरने के बाद सरकार ने परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को प्रतिबंधित कर दिया। करीब एक सप्ताह बाद प्रतिबंधित संगठन का अध्यक्ष होने के नाते उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया। कुलपति के पद पर रहते हुए उनकी गिरफ्तारी पर सभी लोग हैरान रह गए थे। प्रो. सिंह के मुताबिक 1988 में जब रथयात्रा निकालने के दौरान आडवाणी जी की बिहार में गिरफ्तारी हुई तो उस सिलसिले में भी उन्हें गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी विश्व सिंह परिषद का उपाध्यक्ष होने के नाते हुई थी। उस समय वह विश्वविद्यालय के शिक्षक थे। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन की पहल के चलते जल्द ही पुलिस-प्रशासन को उन्हें छोडऩा पड़ा। आज जब राम मंदिर का सपना साकार होने जा रहा, 90 वर्ष के हो चुके प्रो. सिंह को आंदोलन से जुड़ी यादें गौरवान्वित कर रही हैं। 

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.