दर्द से परेशान हैं तो बीआरडी मेडिकल कालेज आइए एनेस्थीसिया विभाग में होगा स्‍थाई इलाज

यदि आपको लंबे समय से शरीर के किसी हिस्से में दर्द है तो घबराने की जरूरत नहीं है। इसका स्थायी इलाज बीआरडी मेडिकल कालेज में संभव है। एनेस्थीसिया विभाग के डाक्टर किसी भी तरह के दर्द से हमेशा के लिए छुटकारा दिला रहे हैं।

Navneet Prakash TripathiSat, 25 Sep 2021 03:56 PM (IST)
दर्द से परेशान हैं तो बीआरडी मेडिकल कालेज आइए होगा स्‍थाई इलाज। प्रतीकात्‍मक फोटो

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। यदि आपको लंबे समय से शरीर के किसी हिस्से में दर्द है तो घबराने की जरूरत नहीं है। इसका स्थायी इलाज बीआरडी मेडिकल कालेज में संभव है। एनेस्थीसिया विभाग के डाक्टर किसी भी तरह के दर्द से हमेशा के लिए छुटकारा दिला रहे हैं। वहां 2015 से चल रहे पेन क्लिनिक में अब तक लगभग 15 सौ मरीजों को कैंसर, आपरेशन के बाद दर्द, सिर दर्द व गठिया आदि के दर्द से निजात मिल चुकी है।

सितंबर में मनाया जाता है दीर्घकालिक दर्द जागरूकता माह

सितंबर को दीर्घकालिक दर्द के प्रति जारूकता माह के रूप में मनाया जाता है। बीआरडी मेडिकल कालेज के एनेस्थीसिया विभाग के प्रोफेसर डा. सुनील आर्या के अनुसार पूर्वी उत्तर प्रदेश में 40 फीसद लोग इस बीमारी से पीडि़त हैं। गलत मुद्रा में लगातार बैठने, योग-व्यायाम न करने और दर्द शुरू होने पर उसे टालते रहने की वजह से यह बीमारी होती है।

दीर्घकालिक दर्द की श्रेणी आता है तीन माह से अधिक समय से रहने वाला दर्द

कोई भी दर्द तीन माह से अधिक होने पर उसे दीर्घकालिक दर्द श्रेणी में रखा जाता है। इससे निजात के लिए एनेस्थीसिया विभाग में पेन क्लिनिक संचालित किया जा रहा है। अल्ट्रासाउंड, एक्सरे व सीआर्म मशीन से दर्द की सही जगह पता की जाती है, पहले दवाओं से उसे ठीक करने की कोशिश की जाती है। आराम नहीं मिलने पर जिम्मेदार नस को ब्लाक कर दिया जाता है। नस को ठीक उस जगह ब्लाक किया जाता है, जहां से दर्द की सूचनाएं मस्तिष्क में जाती हैं। उसे ब्लाक करने को किसी तरह की दिक्कत नहीं होती।

पेन क्लिनिक में पहुंचते हैं रेफरल मरीज

पेन क्लिनिक में सर्जरी, न्यूरोलाजी, कैंसर, आर्थोपेडिक्स व मेडिसिन विभाग से रेफर किए गए मरीज पहुंचते हैं। पहले उन विभागों में दर्द का इलाज किया जाता है। राहत नहीं मिलने पर उन्हें रेफर किया जाता है। क्लिनिक में प्रतिदिन 10-12 मरीजों का इलाज किया जाता है। एक मरीज के इलाज में लगभग आधा घंटा लगता है। पहले दर्द वाले स्थान पर दर्द निवारक दवाओं के पैचेज लगाए जाते हैं। एक सप्ताह बाद यदि पुन: दर्द शुरू होता है तो नस को ब्लाक कर दर्द से छुटकारा दिलाया जाता है।

गठिया के बहुत से मरीजों ठीक नहीं होता है दर्द

बीआरडी मेडिकल कालेज में एनेस्थीसिया विभाग के अध्‍यक्ष डा. सुनील आर्या कैंसर व अन्य सर्जरी तथा गठिया के बहुत से मरीज होते हैं जिनका दर्द नहीं जाता है। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग लापरवाही के कारण दीर्घकालिक दर्द के शिकार हो जाते हैं। कहीं भी दर्द होने पर अपने मन से दवाएं न खाएं। तत्काल डाक्टर को दिखाएं।

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