Gorakhpur Fertilizer Factory: अमेरिका की मशीनें रोकेंगी हादसा, अमोनिया का रिसाव हुआ तो अपने आप गिरने लगेंगी पानी की फुहारें

Gorakhpur Fertilizer Factory हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) के खाद कारखाना में 10 जून 1990 वाली किसी गलती की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है। अफसरों कर्मचारियों और नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर मशीनों को लगाया गया है।

Pradeep SrivastavaFri, 03 Dec 2021 01:18 PM (IST)
उद्घाटन के ल‍िए तैयार गोरखपुर खाद कारखाना। फोटो - संगम दुबे

गोरखपुर, दुर्गेश त्रिपाठी। अमेरिका और जापान की तकनीक से देश के दिमाग ने आठ हजार करोड़ रुपये का खाद कारखाना तैयार किया है। हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) के खाद कारखाना में 10 जून 1990 वाली किसी गलती की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है। अफसरों, कर्मचारियों और नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर मशीनों को लगाया गया है। वर्ष 1990 की तरह अब अगर कभी अमोनिया का रिसाव हुआ तो मशीन का अलार्म बजने लगेगा और जिस जगह से रिसाव हो रहा है उसके आगे-पीछे अमोनिया को रोक दिया जाएगा। तत्काल पानी की फुहार अमोनिया पर गिरने लगेगी और कुछ ही देर में अमोनिया रिसाव पर काबू पा लिया जाएगा।

आठ हजार करोड़ की लागत से बना है हिंदुस्‍तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड का खाद कारखाना

फर्टिलाइजर कारपोरेशन आफ इंडिया (एफसीआइ) के खाद कारखाना की स्थापना 20 अप्रैल 1968 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने की थी। तब से 22 साल तक खाद कारखाना अनवरत चलता रहा। कभी गोरखपुर और आसपास की समृद्धि का खाद कारखाना पर्याय बन गया था। खाद कारखाना में काम करने वाले अफसरों और कर्मचारियों के लिए आवास की व्यवस्था हो या फिर ब'चों के लिए स्कूल, सब कुछ शानदार था। लोग खाद कारखाना और वहां रहने वालों को उ'च जीवन स्तर देखने के लिए जाते थे।

हो चुका है हादसा

10 जून 1990 को खाद कारखाना में अचानक अमोनिया का रिसाव शुरू हो गया। तकनीक बहुत अपडेट न होने के कारण काफी देर तक रिसाव बंद नहीं कराया जा सका। इस कारण एक कर्मचारी की मौत हो गई। इसी के बाद स्थानीय स्तर पर खाद कारखाना को और सुरक्षित बनाने के लिए आंदोलन शुरू हुआ। इसके बाद कारखाना कभी चल नहीं सका। वर्ष 2002 में केंद्र सरकार को इसे बंद करने की घोषणा करनी पड़ी थी। तब सांसद और अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से 22 जुलाई 2016 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खाद कारखाना का शिलान्यास किया।

सब कुछ आटोमेटिक

एचयूआरएल में यूरिया बनाने, यूरिया बनाने और इसे बोरे में पैक कर रेलवे के रैक में भरने की पूरी प्रक्रिया आटोमेटिक है। नीम कोटेड यूरिया की बिक्री के लिए खाद कारखाना प्रबंधन ने पहले ही नेटवर्क तैयार कर दिया है। आठ हजार करोड़ रुपये की लागत से खाद कारखाना का निर्माण हुआ है।

अमेरिका-जापान से आयी हैं यह मशीन

कार्बामेट कंडेंसर- मशीन की लंबाई 29.9 मीटर, चौड़ाई 6.5 मीटर और ऊंचाई 5.9 मीटर है। मशीन का वजन 521 टन है।

अमोनिया कन्वर्टर- मशीन की लंबाई 36 मीटर, चौड़ाई 6.5 मीटर और ऊंचाई 5.61 मीटर है। इस मशीन का वजन 574 टन है। यह सबसे वजनी और लंबी मशीन है।

यूरिया स्ट्रिपर- मशीन की लंबाई 15.7 मीटर, चौड़ाई 6.5 मीटर और ऊंचाई 5.9 मीटर ह।ै इस मशीन का वजन 361 टन है।

यूरिया रिएक्टर- मशीन की लंबाई 27.4 मीटर, चौड़ाई 6.5 मीटर और ऊंचाई 5.4 मीटर है। यह मशीन 352 टन की है।

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