Railway News: टिकट नहीं मिला तो जुर्माने देकर भी यात्रा मंजूर, रोजाना तीन हजार लोग कर रहे बिना टिकट यात्रा

Railway News पूर्वांचल में सिर्फ गोरखपुर-लखनऊ रूट से जाने वाली ट्रेनों में ही रोजाना ढाई से तीन हजार लोग बिना टिकट यात्रा कर रहे हैं। पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल की टीम ने महज आठ दिन में अभियान चलाकर 20 हजार से अधिक लोगो को बिना टिकट पकड़ा है।

Pradeep SrivastavaSat, 31 Jul 2021 11:50 AM (IST)
गोरखपुर से बाहर जाने वाली अध‍िकांश ट्रेनों में सीटें नहीं म‍िल रही हैं। - फाइल फोटो

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। Indian Railways News: कुशीनगर जनपद स्थित कप्तानगंज के रामसकल को मुंबई जाने वाली किसी भी ट्रेन का कंफर्म टिकट नहीं मिल रहा था। अचानक एक दिन बैग उठाए और बांद्रा एक्सप्रेस के जनरल कोच के फर्श पर बैठ गए। रास्ते में किराया और जुर्माना देकर मुंबई पहुंच गए। मंजिल पर पहुंचते ही सारी थकान और गिले-शिकवे भूल गए। देवरिया जिले के लार निवासी सोनू भी पिछले सप्ताह बिना टिकट यात्री बन मुंबई पहुंच गए। स्वजन को फोन कर बताया कि कंफर्म टिकट के भरोसे यात्रा पूरी नहीं हो पाती। हालांकि, गेट पर खड़े-खड़े बुखार हो गया है। टिकट न मिलने के कारण प्रतिदिन हजारों लोग बेटिकट यात्रा कर रहे हैं। इससे रेलवे को प्रतिदिन हजारों रुपये का नुकसान हो रहा है।

दिल्ली और मुंबई जाने वाली ट्रेनों का कंफर्म टिकट नहीं मिलने पर बिना टिकट बैठ जा रहे प्रवासी

यह व्यथा सिर्फ रामसकल और सोनू की ही नहीं है। बल्कि बिहार और पूर्वांचल के हजारों प्रवासियों की है, जो कंफर्म टिकट नहीं मिलने पर बिना टिकट ही दिल्ली और मुंबई जाने वाली ट्रेनों में बैठ जा रहे। आलम यह है कि सिर्फ गोरखपुर-लखनऊ रूट से जाने वाली ट्रेनों में ही रोजाना ढाई से तीन हजार लोग बिना टिकट यात्रा कर रहे हैं। पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल की टीम ने महज आठ दिन में अभियान चलाकर 20 हजार से अधिक लोगो को बिना टिकट पकड़ा है।

पकड़े गए लोगों से डेढ़ करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला। जो गोरखपुर जंक्शन से मार्च 2021 में बुक टिकटों से आय का करीब आठ गुना अधिक और जून में बुक टिकटों से 50 लाख रुपये ही कम है। दरअसल, कोरोना की दूसरी लहर, पंचायत चुनाव तथा शादी कार्यक्रमों में शामिल होने घर आए प्रवासी वापस होने लगे हैं। लेकिन ट्रेनों का कंफर्म टिकट नहीं मिल रहा। जनरल और स्लीपर में तो नो रूम की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में प्रवासी रोजीरोटी के लिए बिना टिकट यात्रा करने को मजबूर हैं।

प्रोटोकाल पर भारी पड़ रही कमाई

कोरोना प्रोटोकाल के तहत कंफर्म टिकट पर ही रेल यात्रा की अनुमति है। वेट‍िंग टिकट पर प्लेटफार्मों पर प्रवेश पर रोक है। तो सवाल यह है कि आखिर ट्रेनों में बिना टिकट यात्री कैसे पहुंच जा रहे। दरअसल, रेलवे आपदा को अवसर में बदलने का गुर सीख लिया है। एक तो स्पेशल के नाम पर बढ़ा हुआ किराया और ऊपर से बिना टिकट यात्रियों से कमाई रेलवे की झोली भर रही है।

टिकट चेक‍िंग स्टाफ भी नियमों को दरकिनार कर बिना टिकट यात्रियों को अगले स्टेशन पर उतारने की बजाए जुर्माना के साथ पूरा किराया वसूल गंतव्य तक पहुंचा दे रहे हैं। जनरल व स्लीपर कोचों में तो अधिकृत से अधिक बेट‍िंग और बिना टिकट यात्री हो जा रहे हैं। 

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