Railways News: यहां प्‍लेटफार्म तक पार्सल पहुंचाने के ल‍िए देने पड़ते हैं 100 रुपये

वर्ष 2013-14 में गोरखपुर जंक्शन का यार्ड रीमाडलिंग हो गया। विश्व का सबसे लंबा प्लेटफार्म भी तैयार हो गया लेकिन प्लेटफार्मों तक पार्सल पहुंचाने के लिए पाथ नहीं बना। सामान प्लेटफार्म एक दो पर आसानी से पहुंच जाते हैं लेकिन तीन से नौ नंबर तक टेंपो से भेजना पड़ता है।

Pradeep SrivastavaTue, 30 Nov 2021 09:01 AM (IST)
Railways News: व‍िश्‍व के सबसे बड़े प्लेटफार्म पर पाथ नहीं बन पाया है। - प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। रेलवे स्टेशन के पार्सल घर में मोटरसाइकिल की पैकिंग के नाम पर ही 300 रुपये शुल्क नहीं लिया जा रहा। बल्कि पार्सल को प्लेटफार्मों पर पहुंचाने के लिए भी 100 रुपये की अतिरिक्त वसूली हो रही है। अतिरिक्त शुल्क नहीं देने पर पार्सल पड़ा ही रह जाएगा। कोई नोटिस नहीं लेगा।

विश्वस्तरीय रेलवे स्टेशन गोरखपुर में आज तक नहीं बन पाया पार्सल पाथ

वर्ष 2013-14 में गोरखपुर जंक्शन का यार्ड रीमाडलिंग हो गया। 1366.33 मीटर विश्व का सबसे लंबा प्लेटफार्म भी तैयार हो गया। लेकिन प्लेटफार्मों तक पार्सल पहुंचाने के लिए पाथ नहीं बना। बुक सामान प्लेटफार्म एक और दो पर आसानी से पहुंच जाते हैं, लेकिन तीन से नौ नंबर तक का पार्सल आटो और टेंपो से भेजना पड़ता है। आटो और टेंपो वाले धर्मशाला बाजार होते हुए प्लेटफार्म नंबर नौ पर पहुंचते हैं। वहां से अंदर के प्लेटफार्मों (आठ, सात, छह, पांच, चार और तीन) पर पार्सल पहुंचाने में और दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, पार्सल के लिए फुट ओवर ब्रिज पर रैंप तो बने हैं, लेकिन ठेले पर पार्सल लेकर चलने में हरपल दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

धर्मशाला होकर प्लेटफार्मों पर पहुंचता है बुक सामान, ठगे जा रहे उपभोक्ता

ऐसे में भारी सामान आटो और टैंपो से स्टेशन के बाहर के रास्ते ही दूसरे प्लेटफार्मों पर पहुंचाए जाते हैं। उपभोक्ताओं को जेब ढीली करनी पड़ती है। पार्सल के सुरक्षा की भी कोई गारंटी नहीं रहती। प्लेटफार्मों पर पार्सल खुले में पड़े रहते हैं। कहीं कोई नाेटिस लेने वाला नहीं होता। एनई रेलवे मजदूर यूनियन (नरमू) के महामंत्री केएल गुप्त ने रेलवे प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाया है। कहा है कि यथाशीघ्र समाधान नहीं हुआ तो प्रकरण को महाप्रबंधक व बोर्ड के समक्ष उठाया जाएगा।

हल्की बारिश में भी भीग जाते हैं पार्सल

पार्सल दफ्तर पर शेड निर्माण होना है। स्वीकृति भी मिल गई है, लेकिन शेड का निर्माण शुरू नहीं हुआ। हल्की बारिश में भी पार्सल भीग जाते हैं। इसको लेकर कर्मचारियों और रेल उपभोक्ताओं में रोष है।

स्टेशन पर पार्सल पाथ नहीं होने से परेशानी होती है। सामान बाजार के रास्ते प्लेटफार्मों तक पहुंचाना पड़ता है। उपभोक्ता तो परेशान होते ही हैं, कर्मचारियों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उपभोक्ताओं को अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है। कमाई प्रभावित हो रही है। - राजू तिवारी, लीज कंपनी के स्टाफ।

सुविधाओं के अभाव में रेल उपभोक्ता पार्सल घर नहीं पहुंच रहे। कमाई भी आधी हो गई है। शेड का निर्माण नहीं होने से हल्की बारिश में भी सामान भीग जाते हैं। पार्सल की कोई समुचित निगरानी नहीं है। सुरक्षा को लेकर हरपल आशंका बनी रहती है। - ओम प्रकाश सोनकर, कार्यकर्ता- पार्सल।

रेलवे स्टेशन पर लगेगी मटेरियल लिफ्ट

पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह के अनुसार पार्सल दफ्तर से सभी प्लेटफार्म तक पार्सल पहुंचाने के लिए मटेरियल लिफ्ट लगाई जानी है। लिफ्ट प्लेटफार्म नंबर एक से छह के बीच लगाई जाएगी। रेलवे प्रशासन की तरफ से स्वीकृति मिल चुकी है। ड्राइंग तैयार हो रही है। ड्राइंग तैयार हो जाने के बाद टेंडर आदि की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। लिफ्ट लग जाने से प्लेटफार्मों तक पार्सल पहुंचाने में आसानी होगी। रेल उपभोक्ताओं और कर्मियों को राहत मिलेगी।

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