बेसहारा पशुओं के लिए ठिकाना नहीं

नगर निकाय क्षेत्र इटवा में बेसहारा पशुओं की बड़ी दुर्दशा है। ठंड के मौसम में न इनके रहने का कोई ठिकाना है और न ही चारा-पानी का। पशुओं का झुंड सड़कों पर आता है तो वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लग जाती है। कब कोई दुर्घटना का शिकार न हो जाए इसका खौफ बना रहता है। खेतों की ओर इनका रुख होता है तो फिर गेहूं की बोई गई फसल बर्बाद हो जाती है।

JagranSat, 04 Dec 2021 06:49 PM (IST)
बेसहारा पशुओं के लिए ठिकाना नहीं

सिद्धार्थनगर : नगर निकाय क्षेत्र इटवा में बेसहारा पशुओं की बड़ी दुर्दशा है। ठंड के मौसम में न इनके रहने का कोई ठिकाना है और न ही चारा-पानी का। पशुओं का झुंड सड़कों पर आता है तो वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लग जाती है। कब कोई दुर्घटना का शिकार न हो जाए, इसका खौफ बना रहता है। खेतों की ओर इनका रुख होता है तो फिर गेहूं की बोई गई फसल बर्बाद हो जाती है।

नगर पंचायत का दर्जा मिले डेढ़ साल से अधिक का समय हो चुका है। अभी यहां एक भी स्थायी गोशाला का निर्माण नहीं हो सका है। कुछ महीना पूर्व पेड़ारी में एक अस्थायी गोशाला बनाई गई, पर बरसात के दिनों में स्थिति नारकीय बन गई है। पशुशाला काफी नीचे होने के कारण परिसर में पानी भर गया। यहां जो पशु थे उनकी स्थिति विकट हो गई। समस्या बढ़ी तो गोआश्रय बंद कर दिया गया। कुछ पशुओं को मैलानी में भेजा गया तो कुछ बेसहारा होकर इधर-उधर घूम रहे हैं। बड़ी संख्या में पशुओं का झुंड कस्बे में घूम रहे हैं। इटवा मुख्य चौराहा से लेकर बढ़नी, बिस्कोहर, डुमरियागंज, बांसी मार्ग पर पशु झुंड में घूम रहे हैं। महादेव, बलुआ, कमदा में भी पशुओं का जमावड़ा हर समय दिखाई दे रहा है। जहां पशुओं का झुंड बैठता है, वहां गंदगी का अंबार लग जाता है। सड़क पर अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है। राम अवध व संदीप कुमार ने कहा कि बेसहारा पशुओं से राहगीर से लेकर व्यवसायी परेशान हैं। समाधान की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। रमेश चंद्र व संजय कुमार ने कहा कि गोआश्रय न होने के कारण पशुओं के रहने, खाने-पीने की परेशानी है तो इनकी वजह से राहगीर से लेकर किसान परेशान है।

इटवा के अधिशासी अधिकारी अतुल सिंह ने कहा कि नगर क्षेत्र में स्थायी गोशाला बनाई जानी है। शीघ्र ही इसकी प्रक्रिया शुरू होगी। टेंडर निकालने के बाद निर्माण प्रारंभ कराया जाएगा। पेड़ारी में अस्थायी गोशाला थी, परंतु वहां काफी समस्या थी। हल्की बारिश में भारी जल जमाव पैदा हो जाता था। जानवरों को यहां रखना खतरे से खाली नहीं था। इसलिए इसको बंद करा दिया गया।

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