दैन‍िक जागरण की पहल : एम्स मिला, अब गाेरखपुर को चाहिए आइआइटी

मुख्यमंत्री योगी के प्रयास से गोरखपुर में एम्स की स्थापना हो चुकी है तो लोगों में आइआइटी की स्थापना की इच्छा भी जागृत होने लगी है। गोरखपुर में जब एम्स बन सकता है तो आइआइटी क्यों नहीं? यह सवाल ऐसे बहुत से लोगों के जुबां पर है।

Pradeep SrivastavaFri, 03 Dec 2021 12:25 PM (IST)
एम्‍स, खाद कारखाना के बाद अब गोरखपुर में आइआइटी की मांग उठने लगी है। - प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। बीते छह दशक से पहले मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कालेज और फिर मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने गोरखपुर क्षेत्र में तकनीकी उच्च शिक्षा की कमान संभाल रखी है। पांच वर्ष पहले तक तो पूर्वांचल के लोग इसे ही गोरखपुर की उपलब्धि मानते थे लेकिन जब से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की कमान संभाली है, यहां लोगों की इच्छाएं भी परवान चढ़ी हैं। अब जबकि मुख्यमंत्री योगी के प्रयास से गोरखपुर में एम्स की स्थापना हो चुकी है तो लोगों में आइआइटी की स्थापना की इच्छा भी जागृत होने लगी है। गोरखपुर में जब एम्स बन सकता है तो आइआइटी क्यों नहीं? यह सवाल ऐसे बहुत से लोगों के जुबां पर है, जो या तो तकनीकी शिक्षा से जुड़े हुए है, या जुड़े रहे हैं। चूंकि दैनिक जागरण की पहचान जनता की आवाज के रूप में है, इसलिए लोगों के इस सवाल का जवाब ढूढने के लिए जागरण एक अभियान छेड़ रहा है।

विशेषज्ञों बोले, विकासित हो चुके गोरखपुर में आइआइटी समय की मांग

आइआइटी की स्थापना के पीछे की मंशा और जरूरत को लेकर जब तकनीकी शिक्षा के विशेषज्ञों से बातचीत की गई तो उन्होंने एक स्वर से कहा कि पहले की बात कुछ और थी पर बीते कुछ वर्षों में गोरखपुर जिस तरह से विकास की राह पर आगे बढ़ा है, उस हिसाब से यहां आइआइटी होना ही चाहिए। इसके लिए सरकार के सामने दो विकल्प खुले हुए हैं। या तो मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को ही अपग्रेड करके आइआइटी बना दिया जाए या फिर प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से इतर एक आइआइटी की स्थापना की जाए। कुछ विशेषज्ञों का तो कहना है कि जिस तरह से बीआरडी मेडिकल कालेज से अलग एम्स की स्थापना हुई है, उसी तरह प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से अलग एक आइआइटी बने। इसके पीछे उनका तर्क है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश का गोरखपुर जिला एक बड़े क्षेत्र को कवर करता है, इसलिए अब आइआइटी यहां की जरूरत है।

वाराणसी में बीएचयू के आइटी को आइआइटी का दर्जा मिलने के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश को एक आइआइटी भले ही मिल गया है लेकिन गोरखपुर में आइआइटी की जरूरत उससे पूरी हो जाएगी, ऐसा हरगिज नहीं है। शिक्षा की दृष्टि से यह अपने आप में समृद्ध् क्षेत्र है। यहां जब एम्स बन सकता है तो आइआइटी क्यों नहीं? - प्रो. केजी उपाध्याय, रिटायर्ड डीन, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग, एमएमएमयूटी।

वैसे तो मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को अपग्रेड करके आइआइटी बनाया जा सकता है लेकिन मेरा मानना है इसे अलग से स्थापित होना चाहिए। जब गोवा जैसे छोटे से क्षेत्र में एनआइटी और आइआइटी दोनों हो सकते हैं तो गोरखपुर में एमएमएमयूटी के अलावा आइआइटी क्यों नहीं स्थापित हो सकता। - प्रो. एके वाजपेयी, रिटायर्ड आचार्य, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग, एमएमएमयूटी।

गोरखपुर का दायरा एक दृष्टि से देखा जाए तो वाराणसी से बड़ा है। यहां से गोरखपुर और बस्ती मंडल के सात जिले तो जुड़ते ही हैं। बिहार का बड़ा हिस्सा भी यह क्षेत्र कवर करता है। ऐसे में आइआइटी क्षेत्र की डिमांड है। यह मांग पहले भी उठती रही है। अब गोरखपुर पहले से काफी आगे है तो यहां आइआइटी होना ही चाहिए। - प्रो. बीएस राय, रिटायर्ड आचार्य, इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियरिंग विभाग, एमएमएमयूटी।

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