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Gorakhpur Weather News: 38 डिग्री में ही महसूस हो रही 42 डिग्री की गर्मी

गोरखपुर में शुक्रवार को कड़ी धूप हुई। - फाइल फोटो

गोरखपुर में गुरुवार को अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस रहा लेकिन लोगों को हीट इंडेक्स के चलते 42 डिग्री सेल्सियस तक गर्मी महसूस हुई। गुरुवार को दिन का अधिकतम तापमान 40.0 डिग्री सेल्सियस रह सकता है जबकि न्‍यूनतम तापमान 21.5 डिग्री सेल्सियस के करीब रहने के आसार हैं।

Pradeep SrivastavaFri, 16 Apr 2021 10:36 AM (IST)

गोरखपुर, जेएनएन। गुरुवार को पछुआ हवा 14 किलोमीटर प्रति घण्टे के रफ्तार से चलींं। अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस रहा, लेकिन लोगों को हीट इंडेक्स के चलते 42 डिग्री सेल्सियस तक गर्मी महसूस हुई। गुरुवार को दिन का अधिकतम तापमान 40.0 डिग्री सेल्सियस रह सकता है, जबकि  न्‍यूनतम तापमान 21.5 डिग्री सेल्सियस के करीब रहने के आसार हैं। सुबह हवा उत्‍तर पूरब से दक्षिण पूरब की तरफ चल सकती है। दोपहर बाद दक्षिण पश्चिम से उत्‍तर पश्चिम की तरफ चल सकती है। इसके चलते शुक्रवार को भी लोगों को गर्मी महसूस होगी। 

43 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है पारा

मौसम विभाग ने पूर्वानुमान जताया है कि सप्ताह के आखिर तक पारा अधिकतम 43 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। बता दें बुधवार को पहली बार पारा 40 डिग्री के पार गया था। दिन अधिकतम तापमान 40.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ था। हालांकि गुरुवार को पछुआ हवा 14 किलोमीटर से अधिक गति से चलने के कारण तापमान में दो डिग्री की गिरावट आई है। आर्दता अधिकतम 63 व न्‍यूनतम 25 फीसद रही। गुरुवार को दिन का अधिकतम तापमान व न्यूनतम तापमान अप्रैल के औसत तापमान के लगभग बराबर रहा।

गुरुवार को पछुआ हवा अधिकतम 14 किलोमीटर प्रति घंटे के रफ्तार से चली है। मौसम विशेषज्ञ कैलाश पाण्‍डेय का कहना है कि पछुआ हवा के चलने से वातावरण शुष्क हुआ है। इससे तापमान में थोड़ी गिरावट आई है। हालांकि हीट इंडेक्‍स के चलते लोगों ने अधिक गर्मी महसूस की। गुरुवार का हीट इंडेक्‍स 42 डिग्री सेल्सियस रहा। इसके चलते लोगों को वास्‍तविक गर्मी 42 डिग्री सेल्सियस तक महसूस हुई।  

161 पर पहुंची एक्‍युआई 

मौसम विशेषज्ञ कैलाश पाण्‍डेय ने बताया कि गुरवार सुबह करीब 11 बजे शहर की एयर क्‍वालिटी इंडेक्‍स 161 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज हुआ। उन्‍होंने कहा कि 100 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर तक की एक्‍युआई फेफड़ों के लिए शुद्ध मानी जाती है। थोड़ा ध्‍यान देकर हवा की स्थिति में और सुधार किया जा सकता है।

 

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