बीस हजार ग्रामीणों को टेलीमेडिसिन सेवा से जोड़ेगा गोरखपुर विश्वविद्यालय

गोरखपुर विश्वविद्यालय 20 हजार ग्रामीणों को टेलीमेडिसिन की सुविधा से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। टाइफेक ने अपने टेलीमेडिसिन डिमास्ट्रेशन सेवा के पायलट प्रोजेक्ट से विश्वविद्यालय को जोड़ा है। बहुत जल्द दोनों संस्थाओं द्वारा इसे लेकर करार की औपचारिक प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी।

Pradeep SrivastavaWed, 01 Dec 2021 08:30 AM (IST)
गोरखपुर विश्वविद्यालय बीस हजार ग्रामीणों को टेलीमेडिसिन सेवा से जोड़ेगा। - प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

गोरखपुर, डा. राकेश राय। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी सूचना पूर्वानुमान एवं मूल्यांकन परिषद (टाइफेक) ने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय को एक बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। जिम्मेदारी है 20 हजार ग्रामीणों को टेलीमेडिसिन की सुविधा से जोड़ने की। टाइफेक ने अपने टेलीमेडिसिन डिमास्ट्रेशन सेवा के पायलट प्रोजेक्ट से विश्वविद्यालय को जोड़ा है। बहुत जल्द दोनों संस्थाओं द्वारा इसे लेकर करार की औपचारिक प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी।

डीएसटी के टाइफेक ने सौंपी है विश्वविद्यालय को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

टाइफेक ने प्रोजेक्ट से जुड़कर कार्य करने का प्रस्ताव अपनी वेबसाइट के माध्यम से देश भर के शैक्षणिक संस्थानों के सामने रखा था। विश्वविद्यालय ने पत्र भेजकर प्रोजेक्ट से जुड़ने की मंशा जताई थी। इसी क्रम में टाइफेक ने विश्वविद्यालय को यह अवसर दिया है। टाइफेक द्वारा भेजे गए पत्र के मुताबिक विश्वविद्यालय को ग्रामीणों तक पहुंचने के लिए दो सदस्यों की टीम बनानी होगी। टीम में एक पुरुष और एक महिला को शामिल करने की शर्त है, जो मेडिकल या पैरा मेडिकल कार्य से जुड़े हों। यह टीम पहले सीडेक के मोहाली सेंटर पर जाकर ट्रेनिंग लेगी, फिर गावों में जाकर 20 हजार ग्रामीणों का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण करेगी। परीक्षण का दायरा विस्तृत है। इस दायरे में हृदय रोग, ब्लड प्रेशर, डायबिटिज, लीवर से जुड़े रोगों को शामिल किया गया है।

जल्द होगा प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन को लेकर विवि व टाइफेक के बीच करार

ग्रामीण रोगियाें को टाइफेक की टेलीमेडिसिन की सेवा उपलब्ध कराने के लिए यह टीम परीक्षण डाटा सीडेक के ई-संजीवनी प्लेटफार्म पर अपलोड करेगी। गांव में रहकर ही डाटा अपलोड करने के लिए सेंसरयुक्त यंत्र टाइफेक द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। ई-संजीवनी प्लेटफार्म से जुड़ने के बाद ग्रामीण रोगियों को घर बैठे देश के चुनिंदा चिकित्सकों की सलाह मिल सकेगी। यह कार्य छह महीने में पूरा करने की मियाद टाइफेक की ओर से तय की गई है। योजना के क्रियान्वयन के लिए आठ लाख रुपये भी टाइफेक द्वारा विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराए जाएंगे।

प्रधानमंत्री से योजना को लांच कराने की है तैयारी

चूंकि इस प्रोजेक्ट की योजना मूल रूप प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा बनाई गई है, इसलिए टाइफेक और विश्वविद्यालय प्रशासन इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लांच कराने की योजना बना रहे हैं। टाइफेक की मंशा के अनुरूप विश्वविद्यालय प्रशासन इस प्रयास में जुटा है कि एम्स और खाद कारखाने का लोकार्पण करने गोरखपुर आ रहे प्रधानमंत्री से यहीं पर योजना की लांचिंग करा ली जाए।

टाइफेक के टेलीमेडिसिन प्रोजेक्ट से जुड़ना गोरखपुर विश्वविद्यालय के लिए सौभाग्य की बात है। इस कार्य से जुड़कर विश्वविद्यालय अपने सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यों का दायरा और बढ़ा सकेगा। प्रोजेक्ट को प्रधानमंत्री से लांच कराने का प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही वह उन दो नामों का चयन कर लिया जाएगा, जिसके माध्यम से विश्वविद्यालय ग्रामीणों तक पहुंचेगा। - प्रो. राजेश सिंह, कुलपति, दीदउ गोरखपुर विवि।

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