तैयार हुआ एक्सपोर्ट एक्शन प्लान, बढ़ जाएगी टेराकोटा के निर्यात की क्षमता

एक जिला एक उत्पाद योजना में चयनित उत्पादों के निर्यात के लिए गोरखपुर का एक्सपोर्ट एक्शन प्लान तैयार कर लिया गया है। टेराकोटा उत्पादों का खास जिक्र करते हुए यहां बुलंदशहर के खुुर्जा के सीएफसी की तरह ही आधुनिक तकनीक का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।

Pradeep SrivastavaMon, 02 Aug 2021 01:50 PM (IST)
गोरखपुर के टेराकोटा के न‍िर्यात का एक्‍शन प्‍लान तैयार क‍िया जा रहा है। - फाइल फोटो

गोरखपुर, उमेश पाठक। एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में चयनित उत्पादों के निर्यात के लिए गोरखपुर का एक्सपोर्ट एक्शन प्लान तैयार कर लिया गया है। राज्य संवर्धन परिषद के पास इसे भेज दिया गया है। गोरखपुर को लेकर जो कार्ययोजना बनाई गई है, उसमें तकनीक को अपनाने पर जोर दिया गया है। टेराकोटा उत्पादों का खास जिक्र करते हुए यहां भी बुलंदशहर के खुुर्जा के कामन फैसिलिटि सेंटर (सीएफसी) की तरह ही आधुनिक तकनीक का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।

खुर्जा (बुलंदशहर) की सीएफसी में प्रयोग की जाने वाली तकनीक को अपनाने पर जोर

निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार गंभीर है। इसी के तहत हर जिले के उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए जिला स्तर पर एक्सपोर्ट एक्शन प्लान बनाने को कहा गया था। शासन की ओर से कंसलटेंसी फर्म अर्नेस्ट एंड यंग (ई एंड वाई) को कार्ययोजना बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। फर्म की ओर से कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेज दी गई है। एक्सपोर्ट एक्शन प्लान को लेकर 23 नवंबर को गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण में सेमिनार का आयोजन किया गया था। इसमें प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उद्यमी, उद्योग विभाग के अधिकारी एवं फर्म के प्रतिनिधि शामिल थे। केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी भी आनलाइन जुड़े थे। फर्म ने एक्शन प्लान बनाकर शासन को भेज दिया गया था। निर्यात संवर्धन परिषद की ओर से गोरखपुर सहित 10 जिलों को निर्यात का हब बनाने का निर्णय लिया गया है।

परंपरागत हस्तशिल्प से आगे बढऩा होगा

ओडीओपी में शामिल टेराकोटा उत्पादों को बनाने वाले शिल्पकार अभी परंपरागत हस्तशिल्प पर निर्भर हैं। हाथी, घोड़ा, खिलौना आदि का ही निर्माण होता है। तकनीक का प्रयोग न करने से अधिक मात्रा में उत्पादन भी नहीं हो पाता। खुर्जा के सीएफसी में आधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जाता है। यहां आधुनिक तकनीक के साथ ही परंपरागत हस्तशिल्प का भी प्रयोग किया जाता है, जिससे कम समय में अधिक उत्पादन होता है। गोरखपुर में प्रस्तावित सीएफसी में भी उसी तरह की तकनीक का प्रस्ताव किया गया है। सीएफसी स्थापित होने के बाद तकनीक के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया जाएगा। एक्शन प्लान के मुताबिक टेराकोटा उत्पादों में कूकर, तवा, गिलास, मिट्टी के आभूषण जैसे उत्पादों को भी शामिल करने को कहा गया है। उत्पादों में विविधता लाकर ङ्क्षसगापुर, थाईलैंड, मलेशिया जैसे देशों को यहां से भी निर्यात हो सकेगा। रेडीमेड गारमेंट को लेकर एक्शन प्लान में कोई सुझाव नहीं दिया गया है क्योंकि इसका बेसलाइन सर्वे ही अभी चल रहा है।

फिलहाल होता है अप्रत्यक्ष निर्यात

इस समय टेराकोटा उत्पादों का हर साल करीब दो करोड़ रुपये का निर्यात होता है। यह भी अप्रत्यक्ष निर्यात है। निर्यातक यहां से माल खरीदते हैं और निर्यात करते हैं। जो हाथी यहां से 500 में खरीदा जाता है, उसे 5000 में निर्यात किया जाता है। स्वयं निर्यात के लिए तकनीक का इस्तेमाल करने के साथ ही यहां के शिल्पकारों को जीएसटी एवं ई कामर्स में पंजीकरण भी कराना होगा। अभी तक किसी का पंजीकरण नहीं है। प्रत्यक्ष निर्यात के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। ऐसा हुआ तो निर्यात आसानी से 10 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा और इसका सीधा लाभ शिल्पकारों को होगा।

एक्सपोर्ट एक्शन प्लान के लिए एक फर्म को जिम्मेदारी दी गई थी। प्लान तैयार हुआ है। शासन से निर्देश मिलने के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी। इससे निश्चित रूप से ओडीओपी उत्पादों को फायदा होगा। - रवि शर्मा, उपायुक्त उद्योग।

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