एक अक्टूबर से खुली मिठाइयों पर भी लिखनी होगी एक्सपायरी डेट, नहीं बिक पाएगी बासी मिठाई

अब खुली मिठाई पर भी एक्‍सपायरी डेट लिखना अनिवार्य होगा। - प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर
Publish Date:Mon, 28 Sep 2020 09:02 AM (IST) Author: Pradeep Srivastava

गोरखपुर, जेएनएन। अब मिठाई की छोटी दुकान पर भी आपको मिठाई की जानकारी एक्सपायरी डेट के साथ मिलेगी। यानी वह कब बनी है और आप उसे कब तक खा सकते हैं इसकी जानकारी होगी। अब तक केवल पैकिंग मिठाइयों पर ही इस तरह की सूचना लिखी होती थी, लेकिन अब मिठाई की उस दुकान में जानकारी लिखनी अनिवार्य की जा रही है जहां मिठाइयां शोकेस में ट्रे में डालकर रखी जाती है। नया नियम पहली अक्टूबर से लागू होगा, लेकिन दुकानदारों को लगता है कि एक्सपायरी डेट लिखने से मिठाई की बिक्री दस फीसद तक कम हाे जाएगी। ग्राहक वही मिठाई खरीदेगा जो उस दिन बनी हाेगी। 

बासी और खराब मिठाई को बिक्री पर रोक के लिए एफएसएसएआई ने लिया निर्णय

बासी और पुरानी मिठाइयां बेचे जाने की लगातार शिकायतें मिलने के बाद भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने मिठाई की दुकानों के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि वे मिठाइयों पर एक्सपायरी डेट को लिखें। पहले यह निर्णय एक जून से लागू होना था, लेकिन काेरोना की वजह से इसे तीन महीना बढ़ा दिया गया था। गोरखपुर में मिठाई की तकरीबन पांच सौ दुकानें हैं जहांं प्रतिदिन औसतन 20 से 22 क्विंटल मिठाई की बिक्री होती है, जबकि दीपावली, होली, रक्षा बंधन और लगन के सीजन में बिक्री दोगुनी हो जाती है। 

अक्‍सर आती हैं शिकायतें 

कुछ बड़ी दुकानों को छोड़ दिया जाए तो मिठाई की क्वालिटी पर सवाल उठते रहे हैं। छापा मारकर खाद्य विभाग की टीम ने कई बार बासी एवं सड़ी मिठाई बेचने वाले दुकादारों पर कार्रवाई की है। बावजूद इसके ऐसे मामले लगातार आते हैं। दूसरी तरफ कई मिठाई कारोबारियों का मानना है कि फूड इंस्पेक्टर जानबूझकर दुकानदार को परेशान कर सकता है। वो मिठाई का सैंपल लेने के बाद उसी दिन लैब में भेज देगा इस बात की क्या गारंटी है। इससे इंस्पेक्टर राज बढ़ेगा।

नए नियम के वजूद में आने के बाद मिठाई की जो खपत होगी उससे दस फीसद कम बनाया जाएगा ताकि नुकसान से बचा जा सके। इसका असर बिक्री पर पड़ेगा। डिब्बे पर ही स्टीकर लगाकर देंगे कि मिठाई कब बनी हैं और कब तक उपयोग में ली जा सकती है। - विनोद मृगवानी, कान्हा श्याम स्वीट्स एंड बेकर्स

देश में मिठाइयों का 80 फीसद काम असंगठित तरह से होता है। ऐसे में इस तरह के नियम दुकानदारों को परेशान करने वाले होंगे। एफएसएसएआई को टर्नओवर और एक से अधिक दुकान जैसी कई श्रेणी बनाकर इस प्रकार के आदेश जारी करना चाहिए थे। - अभिषेक गुप्ता, अमन स्वीट्स एंड बेकर्स

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