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यहां मृतकों को भी दे दिया गया शौचालय मद का पैसा, बड़ी संख्‍या में मिला अपात्रों को लाभ Gorakhpur News

गोरखपुर, जेएनएन। स्वच्‍छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत शौचालय निर्माण में सरकारी धन का जमकर बंदरबांट हुआ है। मानकों को ताक पर रख धनावंटन किया गया। जरूरतमंद लोगों को भले ही इसका लाभ न मिल पाया हो, लेकिन अपात्रों पर पंचायती राज विभाग के अफसरों की खूब कृपा बरसी। एक ही परिवार में पति-पत्नी और ब'चों को भी धनराशि बांट दी गई जबकि इन घरों में मात्र एक शौचालय का निर्माण हुआ। सर्वे से लेकर जियो टैगिंग में खूब मनमानी हुई।

शौचालय बने ही, धन गड़प

जनपद में कई ऐसे लोग हैं, जिनके शौचालय बने ही नहीं और ग्राम प्रधान व सचिवों ने भुगतान ले लिया। कई ऐसे भी लोग हैं, जिनके नाम पर दो-दो बार भुगतान हुआ। विकास खंड चरगांवा के जंगल धूसड़ ग्राम पंचायत में बेचन, तीरथ, अनुसुइया, चंदगी, चंद्र रेखा, झीनकी समेत कई अन्य लाभार्थियों को दोबारा धनराशि दी गई। इसी ग्राम पंचायत के भाने, राधेश्याम व सीर की मौत को सात वर्ष से अधिक हो गए लेकिन इनके नाम से भी शौचालय की धनराशि का भुगतान किया गया। केदार व मुराती देवी, मिश्रीलाल व अशरफी, चंद्रभान व कलावती, महेंद्र व शीला आदि दंपतियों ने शौचालय का अलग-अलग पैसा लिया।

लाभार्थी ने कराया निर्माण, नहीं मिली धनराशि

जंगल धूसड़ में ही अवधेश, मंती, मुन्नी देवी, अनिल व जानकी समेत डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों ने अपने पैसे से शौचालय का निर्माण कराया। इन लाभार्थियों के नाम पर भुगतान भी हो गया, लेकिन धनराशि उन्हें नहीं मिली। गांव के ही राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि इसकी शिकायत उ'चाधिकारियों से की गई, लेकिन इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार अफसर को ही जांच अधिकारी बना दिया गया। अफसर ने, सबकुछ ठीक है कहकर रिपोर्ट लगा दी।

शौचालय निर्माण पर खर्च धनराशि

स्वच्‍छ भारत मिशन के तहत जनपद में 5,27,319 शौचालयों के निर्माण के लिए छह अरब 32 करोड़ 78 लाख 28 हजार रुपये आवंटित हुए। विभाग के मुताबिक वर्ष 2014-15 में 14382 शौचालयों का निर्माण कराया गया। इन पर 17 करोड़ 25 लाख 84 हजार रुपये खर्च हुए। 2015-16 में 17394 शौचालयों के निर्माण पर 20 करोड़ 87 लाख 28 हजार रुपये व्यय हुए। 2016-17 में 30716 शौचालयों के निर्माण पर 36 करोड़ 85 लाख 92 हजार रुपये खर्च हुए। इसी तरह वर्ष 2017-18 में सर्वाधिक 265750 शौचालयों का निर्माण कराया गया। इसके लिए तीन अरब 18 करोड़ 90 लाख रुपये ग्राम पंचायतों के खाते में भेजे गए। 2018-19 में 199077 शौचालयों का निर्माण हुआ, जिस पर 2 अरब 38 करोड़ 89 लाख 24 हजार रुपये व्यय दर्शाया गया।

अपने बुने जाल में फंस रहे अफसर

विभागीय अफसर अपने ही बुने जाल में फंसते जा रहे हैं। जनपद की 1352 ग्राम पंचायतों में यह धनराशि 2012 में कराए गए बेसलाइन सर्वे के आधार पर भेजी गई थी। अब सवाल यह है कि सर्वे में अपात्र मिले 20157 लोगों के नाम सूची में कैसे जुड़ गए? दूसरी बात, शौचालयों के लिए धनराशि दो किश्त में भेजे जाने का नियम है। ऐसे में जब पहली किश्त खर्च नहीं हुई, तो दूसरी किश्त की धनराशि जिले से ग्राम पंचायतों के खाते में क्यों भेजी गई? इसके पीछे कौन सी मजबूरी थी।

प्रायोजित लोग करते हैं जयकार

शौचालयों के निर्माण में हुई सरकारी धन की लूट के खिलाफ यदि कोई आवाज उठाता है तो उसे कीमत चुकाने की धमकी भी दी जाती है। पीडि़तों की मानें तो आवाज दबाने के लिए अफसर उसी गांव के दबंगों की मदद लेते हैं। कोई लाभार्थी या पीडि़त शिकायत करता है तो यही दबंग सब ठीक है, कहकर उसे चुप करा देते हैं। इसी तरह शासन से भेजे जाने वाले बड़े अफसरों के सामने पूर्व नियोजित कार्यक्रम को अंजाम दिया जाता है।

जिला पंचायत राज अधिकारी हिमांशु शेखर का कहना है कि ग्राम पंचायत सचिवों ने जो भी नाम सूची से हटाने के लिए दिए हैं, उनकी धनराशि ग्राम पंचायतों के खाते में ही है। 24 करोड़ में से 20 करोड़ रुपये ग्राम पंचायतों ने वापस कर दिए हैं। चार करोड़ भी जल्द ही मंगा लिए जाएंगे। 

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