Indian Railway: विद्युतीकरण कार्य पूरा, नेपाल सीमा तक इलेक्ट्रिक इंजन से शीघ्र चलने लगेंगी ट्रेनें

सीआरएस की ट्रेन 23 सितंबर को आनंदनगर से नौतनवा के बीच दौड़ेगी। इस दौरान वह संबंधित अधिकारियों के साथ विद्युतीकरण के अलावा रेल लाइन पुलों और समपार फाटकों का गहन निरीक्षण करेंगे। सीआरएस की हरी झंडी के बाद इलेक्ट्रिक इंजन वाली ट्रेनें गोरखपुर से नेपाल सीमा तक फर्राटा भरने लगेंगी।

Pradeep SrivastavaTue, 21 Sep 2021 12:02 PM (IST)
रेलवे ने नेपाल सीमा तक बिजली का तार बिछा द‍िया है। - प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) की ट्रेन 23 सितंबर को आनंदनगर से नौतनवा के बीच दौड़ेगी। इस दौरान वह संबंधित अधिकारियों के साथ विद्युतीकरण के अलावा रेल लाइन, पुलों और समपार फाटकों का गहन निरीक्षण करेंगे। सीआरएस की हरी झंडी के बाद इलेक्ट्रिक इंजन वाली ट्रेनें गोरखपुर से नेपाल सीमा तक फर्राटा भरने लगेंगी।

आनंदनगर से नौतनवा तक 41 किमी रेलमार्ग का विद्युतीकरण हो चुका है पूरा

दरअसल, पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल अंतर्गत आनंदनगर से नौतनवा तक करीब 41 किमी रेलमार्ग का विद्युतीकरण अगस्त में ही पूरा हो गया। रेलवे प्रशासन ने भी अगस्त में ही इलेक्ट्रिक ट्रेन चलाने की घोषणा भी की थी। लेकिन अभी तक सीआरएस का निरीक्षण नहीं हो पाया है। हालांकि, गोरखपुर से आनंदनगर तक लगभग 42 किमी रेलमार्ग का विद्युतीकरण पहले ही हो चुका है।

आनंदनगर तक इलेक्ट्रिक से चलने वाली मालगाड़ियों का संचालन शुरू है। अब सीआरएस की झंडी मिलते ही गोरखपुर से सीधे नौतनवा तक इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेनें चलने लगेंगी। यात्री ट्रेनें ही नहीं मालगाड़ियों का संचालन भी आसान हो जाएगा। गोरखपुर में इंजन नहीं बदलना पड़ेगा। दरअसल, नौतनवा को आटोमोबाइल्स टर्मिनल के रूप में विकसित किया जा रहा है। नेपाल को निर्यात किए जाने वाले आटोमोबाइल्स की ढुलाई शुरू हो गई है। स्टेशन यार्ड के री-माडलिंग तथा माल गोदाम बनाने की योजना है। कंटेनर से सामान की ढुलाई की तैयारी चल रही है।

मार्च तक पूरा हो जाएगा आनंदनगर-गोंडा रूट का विद्युतीकरण

बढ़नी के रास्ते आनंदनगर- गोंडा रेलमार्ग का विद्युतीकरण भी शुरू है। इस रूट का कार्य भी तेज हो गया है। रेलवे प्रशासन ने मार्च 2022 तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा है। पूर्वोत्तर रेलवे में 75 फीसद से अधिक रेलमार्ग का विद्युतीकरण हो चुका है। रेल मंत्रालय ने 2023 तक सभी रेलमार्ग के विद्युतीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है। बाराबंकी-गोरखपुर-छपरा, गोरखपुर-भटनी-वाराणसी, छपरा-बलिया-वाराणसी और गोरखपुर-नरकटियागंज रूट पर पहले से ही इलेक्ट्रिक इंजन से चलने वाली ट्रेनें फर्राटा भर रही हैं।

विद्युतीकरण के फायदे

रेलवे के खर्चों में आएगी कमी।

समय की बचत होगी, ट्रेनें बढ़ेंगी।

स्टेशनों पर बिजली की व्यवस्था।

तेल से संभावित दुर्घटनाएं खत्म।

पर्यावरण में प्रदूषण नहीं फैलेगा।

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