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Eid 2021: घर पर अदा की नमाज, दूर से दी ईद की मुबारकबाद- मस्जिदों के बाहर सन्नाटा

ईद पर गोरखपुर में नमाज अता करते लोग। - जागरण

Eid 2021 गोरखपुर के बेनीगंज ईदगाह बाले मियां और ईदगाह मुबारक खां शहीद में लोगों ने फीजिकल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए ईद की नमाज अदा की। ज्यादातर लोगों ने घर में ही नमाज अदा की और मुल्क में अमन-चैन तरक्की एवं कोरोना से निजात की दुआएं मांगी।

Pradeep SrivastavaFri, 14 May 2021 10:24 AM (IST)

गोरखपुर, जेएनएन। कोरोना की वजह से लगातार दूसरे साल ईद की रौनक फीकी नजर आई। ईदगाहों और शहर की बड़ी मस्जिदों ईद की नमाज पढ़ने की परंपरा रही है। इसमें हजारों लोग शरीक होते रहे हैं, लेकिन मस्जिदों के बाहर सन्नाटा पसरा रहा। कुछ ईदगाहों को छाेड़ दिया जाए तो ज्यादातर मस्जिदों में पेश इमाम समेत सिर्फ पांच-पांच लोगाें ने नमाज अदा की।

बेनीगंज, ईदगाह बाले मियां और ईदगाह मुबारक खां शहीद में लोगों ने फीजिकल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए ईद की नमाज अदा की। दूसरी तरफ ज्यादातर लोगों ने बच्चों के साथ घर में ही शुक्रराने के तौर पर चाश्त की नमाज अदा की और मुल्क में अमन-चैन, तरक्की एवं कोरोना से निजात की दुआएं मांगी। गले मिलकर मुबारकबाद देने के बजाए लोगों ने दूर से ही एक-दूसरे का ईद की बधाई दी। बधाई देने का सिलसिला गुरुवार की शाम से ही शुरू हो गया था।

मस्जिदों के बाहर पसरा रहा सन्नाटा 

तीस रोजा रखने के बाद सोमवार को रोजेदारों को ईद मनाने का मौका मिला, लेकिन उनमें उत्साह गायब था। खासकर ईदगाह न जा पाने की वजह से बच्चे निराश नजर आए। लोग नमाज घर में ही पढ़े इसलिए ज्यादातर मस्जिदों को बंद रखा गया था। कई मस्जिद के बाहर नोटिस भी चपकाया गया था। सुबह आठ बजे से पहले लोगों ने साफ-सुथरे कपड़े पहने, टोपी व इत्र लगाया और चार रिकात नमाज अदा कर अपने रब का शुक्रिया अदा किया। नमाज से पहले फित्रे की रकम गरीबों, यतीमों और परेशान हाल लोगों तक पहुंचाई गई ताकि वह भी ईद की खुशी में शामिल हो सकें।

कोरोना कफ्यू के चलते लोग अपने बुजुर्गों के कब्र पर फातिहा पढ़ने भी नहीं जा सके। हर साल ईदगाहों के बाहर लगने वाला मेला भी नहीं लगा। लोगों ने एक दूसरे के घर जाने से भी परहेज किया। हालांकि घरों में हमेशा की तरफ सेवइयों के अलावा लजीज पकवान बनाए गए। वहीं कोरोना कफ्यू को देखते हुए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। ईदगाहों और मस्जिदों के बाहर फोर्स तैनात की गई थी। 

दूसरों के दुख-दर्द में शामिल होने की अपील 

ईद की नमाज से पहले ईदगाहों और मस्जिदों के इमाम ने अपनी खास तकरीर में लोगों से दूसरों के दुख-दर्द में शरीक होने, आपसी सौहार्द को मजबूत करने तथा मुल्क में अमन और भरोसे का माहौल बनाने की अपील की। शाही जामा मस्जिद, उर्दू बाजार के पेशइमाम मौलाना अब्दुल जलील मजाहिरी ने कहा कि 30 दिनों तक रमजान में आपने अपनी इच्छाओं पर जिस तरह काबू रखा वह पूरे साल आपके व्यवहार में नजर आना चाहिए। एक सच्चा मुसलमान वहीं होता है जो ताजिदंगी अल्लाह और उनके रसूल के बताए हुए रास्तों पर चलता है।

साथ ही गरीबों एवं जरूरतमंदों की मदद करता है। ईद के दिन सभी यह संकल्प लें कि एक अच्छा और सच्चा इंसान बनने के साथ-साथ मुल्क की खुशहाली एवं तरक्की में अपना योगदान देंगे। मुफ्ती वलीउल्लाह ने कहा कि रमजान का पाक महीना हमें सच्चा इंसान बनने की सीख देता है। हमें कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए जो इंसानियत के खिलाफ हो और अल्लाह को नापसंद हो।

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