गोरखपुर को बाढ़ की तबाही से बचाने की कवायद, सैटेलाइट एवं ड्रोन कैमरे के जरिए जानेंगे नदियों की दशा

गोरखपुर के मंडलायुक्त ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से इसको लेकर कार्ययोजना तलब की है। नदी में कितना पानी बढ़ने के बाद कितने गांव प्रभावित होंगे कौन से बांध पर कटने का खतरा है नदी में कहां-कहां सिल्ट है।

Pradeep SrivastavaThu, 16 Sep 2021 08:02 AM (IST)
गोरखपुर को बाढ़ से स्‍थाई रूप से बचाने की कवायद शुरू हो गई है। - जागरण

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद गोरखपुर मंडल में बाढ़ के स्थायी समाधान की कवायद शुरू हो गई है। मंडलायुक्त ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से इसको लेकर कार्ययोजना तलब की है। नदी में कितना पानी बढ़ने के बाद कितने गांव प्रभावित होंगे, कौन से बांध पर कटने का खतरा है, नदी में कहां-कहां सिल्ट है, सैटेलाइट एवं ड्रोन कैमरे से निगरानी के जरिए यह पता लगाने को कहा गया है और उसके अनुसार कार्ययोजना मंगाई गई है। अक्टूबर महीने में स्टीरिंग कमेटी की बैठक होनी है, उससे पहले कार्ययोजना देनी होगी। अगले साल की बाढ़ को नियंत्रित करने के लिए दिसंबर तक कार्ययोजना तैयार कर लेनी होगी। कार्ययोजना में नदियों की ड्रेजिंग कर चैनलाइज करने, तटबंधों की मजबूती एवं नए तटबंध बनाने जैसे बिन्दु शामिल करने होंगे।

सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर मंडलायुक्त ने मांगी कार्ययोजना

बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत सामग्री वितरित करने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की थी कि इस क्षेत्र को बाढ़ से मुक्त करने के लिए स्थायी समाधान किया जाएगा। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद मंडलायुक्त रवि कुमार एनजी ने सोमवार को सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर उनसे कार्ययोजना तैयार करने को कहा। बैठक में मंडलायुक्त के पूछने पर सिंचाई विभाग के अधिकारी यह नहीं बता पाए कि कहां-कहां नदी में सिल्ट है।

नदी में निश्चित पानी बढ़ने पर कितने गांव प्रभावित होंगे, इसकी जानकारी भी अधिकारी नहीं दे पाए। इसके बाद उन्होंने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की नेशनल रिपोर्ट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) की मदद से यह जानकारी मिल सकती है। मंडलायुक्त ने कहा कि सिंचाई विभाग ड्रोन कैमरे से भी इसकी मानीटरिंग कराए। बाढ़ के साथ ही नहरों में टेल तक पानी पहुंचाने की भी चर्चा की गई। जिन गांवों में नहर की सफाई नहीं हो पायी है, उनकी सूची भी मांगी गई है।

यहां चल रहा नदी की धारा मोड़ने का काम

आबादी की ओर बढ़ रही नदियों की धारा को मोड़ने का काम कुछ स्थानों पर शुरू हो चुका है। देवरिया जिले के बरहज नगर के पूरब मुक्तिधाम से दक्षिण नदी की धारा को समुचित मार्ग के लिए मोड़ने का काम चल रहा है। सरयू नदी में ढाई किलोमीटर ड्रेजिंग का कार्य हो रहा है। नदी को तीस मीटर चौड़ा और पांच मीटर गहरा कर उसकी धारा को एक चैनल से प्रवाहित करने का रास्ता बनाया जा रहा है। सरयू नदी की धारा पैना और मेहियवां गांव के सामने दूसरी धारा में मिलाई जाएगी।

सरयू की धारा मोड़ी जाएगी

मऊ जिले की नई बस्ती और विदटोला गांव के सामने सरयू नदी कटान कर रही है। इन गांवों को बचाने के लिए बैराज यांत्रिक अनुरक्षण खंड वाराणसी डिवीजन ने धारा मोड़ने के लिए ढाई किलोमोटर क्षेत्र में 23 मई 2020 से काम शुरू किया है। अवर अभियंता नीरज कुमार ने बताया कि विदटोला गांव को बचाने की यह परियोजना है। नदी की गांव की ओर आने वाली धारा को ढाई किलोमीटर दूर नदी की दूसरी धारा में जोड़ा जाएगा। बाढ़ के कारण फिलहाल कार्य बंद है। बाढ़ खंड देवरिया के अधिशासी अभियंता नरेंद्र कुमार ने बताया कि सरयू नदी से सिल्ट निकालने एवं नदी की धारा को मोड़ने का काम जनपद मऊ के बाढ़ खंड द्वारा किया जा रहा है।

गोरखपुर जिले के कैंपियरगंज क्षेत्र में राप्ती नदी की धारा को मोड़ने का काम चल रहा है। गायघाट, बहबोलिया और मिरिहिरिया गांव के पास कटान का खतरा होने के कारण नदी की धारा मोड़ने का कार्य शुरू हुआ था, जुलाई 2021 तक काम किया गया लेकिन बाढ़ आने के कारण फिलहाल काम बंद है। अभी नदी की गहराई नदी तल से मिलाना बाकी है। जलस्तर सामान्य होने के बाद ड्रेजिंग का काम शुरू हो जाएगा।

नदी में कहां सिल्ट है, कितना पानी बढ़ने से कितने गांव प्रभावित होंगे और तटबंधों की स्थिति कहां कमजोर है, यह जानकारी मानचित्र की सहायता से एकत्र करने को कहा गया है। सैटेलाइट एवं ड्रोन कैमरे के जरिए आकलन करने का निर्देश सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दिया गया है। इस संबंध में कार्ययोजना मांगी गई है। बाढ़ से बचाव के स्थायी समाधान के लिए यह कार्ययोजना तैयार करायी जा रही है। - रवि कुमार एनजी, मंडलायुक्त।

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