राजकीय महाविद्यालय को नहीं मिल रहे छात्र

पिछले सत्र में बीए प्रथम वर्ष में 62.5 फीसद सीटें रहीं खाली कामर्स की कक्षाएं इस सत्र से शुरू 2018 से अंग्रेजी असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं

JagranTue, 21 Sep 2021 05:41 AM (IST)
राजकीय महाविद्यालय को नहीं मिल रहे छात्र

जागरण संवाददाता, गौरीबाजार: राजकीय माध्यमिक विद्यालयों व महाविद्यालयों में पढ़ाई के प्रति ग्रामीण अंचलों में छात्र-छात्राओं का रुझान जहां कम हुआ है, वहीं निजी संस्थानों के प्रति लगाव बढ़ा है। उदाहरण के रूप में राजकीय महाविद्यालय इंदूपुर को देखा जा सकता है।

यहां कला वर्ग में स्नातक में 480 सीटों पर हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, समाजशास्त्र, राजनीतिशास्त्र, प्राचीन इतिहास, भूगोल व शारीरिक शिक्षा के विषय है। पिछले सत्र में मात्र 37.5 फीसद यानी 180 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया, जिसमें 71 फीसद छात्राओं के नामांकन हुए। जबकि 62.5 फीसद सीटें खाली रह गई। इस सत्र से कामर्स वर्ग की कक्षाएं चलेंगी, जिसमें कुल 60 सीट है। छात्रों के लिए कंप्यूटर लैब, स्मार्ट क्लास, खेल मैदान, वाचनालय व मल्टी स्टेशन जिम से सुसज्जित महाविद्यालय के प्रति रुझान अभिभावकों व छात्रों का नहीं हैं। हालांकि 2018 से अंग्रेजी विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर की तैनाती नहीं हुई है। छात्रों में नहीं दिख रहा उत्साह

प्रवेश सत्र 2021-2022 में स्नातक प्रथम वर्ष कला में 17 व कामर्स में 13 फीसद छात्रों ने प्रवेश लिया हैं। कला वर्ग में 480 सीटों में 80 व कामर्स वर्ग में 60 सीटों में आठ छात्रों का नामांकन हुआ है। नामांकन के प्रति रुझान की कमी को देखते हुए महाविद्यालय प्रशासन पम्फलेट छपवाकर निजी महाविद्यालयों की तर्ज पर विशेषताओं का उल्लेख कर अभिभावकों व छात्रों को आकर्षित करने में लगा है। इन विषयों की मान्यता मिले

महाविद्यालय में अधिकतम छात्राएं ही प्रवेश लेती हैं। उनके रुचि के अनुसार गृह विज्ञान, शिक्षाशास्त्र व अर्थशास्त्र विषय की भी मान्यता हो तो छात्राओं की संख्या बढ़ेगी। - डा. धर्मेंद्र तिवारी, सहायक प्रोफेसर समाजशास्त्र पीजी कक्षाएं चलाने के संसाधन उपलब्ध

जिला मुख्यालय को छोड़ नजदीक के किसी भी महाविद्यालय में पीजी नहीं है। यदि पीजी कक्षाएं चलाने की मान्यता हो तो छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा का मार्ग खुल जाएगा। कक्षाएं चलाने के लिए महाविद्यालय के पास आवश्यक संसाधन उपलब्ध है। डा.उदयभान

प्राचार्य

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