गोरखपुर में डीएलएड गणित का साल्व पेपर हुआ वायरल, जानिए क्या कहते रहे डायट प्राचार्य

डीएलएड के द्वितीय सेमेस्टर के तहत आयोजित गणित के चतुर्थ प्रश्नपत्र का पेपर वायरल होने से सेंट एंड्रयूज इंटर कालेज केंद्र के अभ्यर्थियों के साथ शिक्षक भी हलकान रहे। पेपर शुरू होने से पहले सुबह 11.30 और 11.50 बजे पेपर वायरल होने से अभ्यर्थियों में अफरातफरी मच गई।

Rahul SrivastavaFri, 17 Sep 2021 05:15 PM (IST)
डीएलएड गणित का साल्व पेपर हुआ वायरल। प्रतीकात्मक तस्वीर

गोरखपुर, जागरण संवाददाता : डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) के द्वितीय सेमेस्टर के तहत आयोजित गणित विषय के चतुर्थ प्रश्नपत्र का पेपर वायरल होने से सेंट एंड्रयूज इंटर कालेज केंद्र के अभ्यर्थियों के साथ शिक्षक भी हलकान रहे। पेपर शुरू होने से पहले सुबह 11.30 और 11.50 बजे इंटरनेट मीडिया पर पेपर वायरल होने से अभ्यर्थियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। कई तो ऐसे थे जो पेपर को सही मानकर उसका परिणाम देखने में जुट गए। हालांकि डायट प्राचार्य ने पेपर वायरल होने से इन्कार किया है। उनका कहना है नकलविहीन तरीके से परीक्षा का आयोजन हुआ है।

इंटरनेट मीडिया से प्रश्न पत्र आने की मिली सूचना

केंद्र के बाहर मौजूद अभ्यर्थियों ने बताया कि दोपहर 12 से एक बजे के बीच परीक्षा प्रस्तावित थी। केंद्र पर समय से पहले पहुंचने के बाद अभ्यर्थी अंदर जाने की तैयारी कर रहे थे। इस दौरान आधे घंटे के अंतराल पर दो बार किसी के पास इंटरनेट मीडिया से प्रश्नपत्र आने की सूचना मिली, जिसके बाद अभ्यर्थी पेपर लेकर उनका जवाब ढूंढने में जुट गए। अभ्यर्थियों ने दावा किया है कि 11.30 बजे वायरल हुआ पेपर, मूल प्रश्नपत्र से मेल नहीं खा रहा था। मगर दूसरी बार वायरल हुआ साल्व पेपर के कुछ सवाल मूल प्रश्नपत्र से मिल रहे थे।

एक नकलची रस्टीकेट

नेहरू इंटर कालेज बिछिया केंद्र पर पहली पाली में डीएलएड की परीक्षा देते एक नकलची को अनुचित साधनों का प्रयोग करते पाए जाने पर रस्टीकेट कर दिया गया। यह कार्रवाई वहां के कक्ष निरीक्षक व केंद्र व्यवस्थापक द्वारा की गई, जिसके बाद उसने दो अन्य प्रश्नपत्रों की परीक्षा छोड़ दी।

पेपर वायरल होने जैसी कोई बात नहीं

डायट के प्राचार्य डा. भूपेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि स्थानीय स्तर पर पेपर वायरल होने जैसी कोई बात नहीं है। मैंने सभी पांचों परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया। हर जगह परीक्षा शांतिपूर्ण होते मिली। जानकारी होने पर मैंने केंद्र व्यवस्थापक और पर्यवेक्षक से बात की लेकिन किसी ने इसकी पुष्टि नहीं की।

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