समितियों पर पहुंची डीएपी खाद, फिर भी किल्लत बरकरार- नहीं पूरी हो पा रही जरूरत

1317 मिट्रिक टन डीएपी खाद लेकर रेलवे की रैक देवरिया में आ गई है। रैक से सीधे गोदामों पर खाद पहुंचाई जा रही है। इसके बावजूद खाद की किल्लत बरकरार है। किसानों को खाद देने में संतुलन बनाया जा रहा है। मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पा रही है।

Navneet Prakash TripathiMon, 29 Nov 2021 08:50 AM (IST)
समितियों पर पहुंची डीएपी खाद, फिर भी किल्लत बरकरार- नहीं पूरी हो पा रही जरूरत। प्रतीकात्‍मक फोटो

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। 1317 मिट्रिक टन डीएपी खाद लेकर रेलवे की रैक देवरिया में आ गई है। रैक से सीधे गोदामों पर खाद पहुंचाई जा रही है। इसके बावजूद खाद की किल्लत बरकरार है। किसानों को खाद देने में संतुलन बनाया जा रहा है। मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पा रही है। जिसके चलते कुछ किसान प्राइवेट दुकानों की शरण में जा रहे हैं।

जिले में सक्रिय हैं 164 समितियां

जिले में 187 साधन सहकारी समिति हैं, जिसमें से 164 सक्रिय हैं। इसमें से 122 पर 26 नवंबर को खाद थी। खाद लेने के सुबह से ही गोदामों पर किसानों की लाइन लग गई थी। हाल यह रहा कि सलेमपुर विकास खंड के परसिया भगौती गोदाम पर सुबह पौने दस बजे तक 10 किसान पहुंच गए थे। दस बजे पुरैना गोदाम पर खाद का किसानों में वितरण शुरू हो गया था।

मांग से आधी हो रही आपूर्ति

रामपुर बुजुर्ग सहकारी समिति पर खाद तो थी, लेकिन साढ़े आठ बजे तक न तो वहां कोई किसान था और न ही सचिव। इसके अलावा अनुआपार, पांडेयपार, इचौना, सलेमपुर कस्बा, परसिया तारा समेत अन्य साधन सहकारी समिति के गोदाम पर खाद मौजूद थी। किसान तो थे, लेकिन किसानों को मांग के अनुरूप खाद उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था, जो किसान चार बोरी डीएपी मांग रहा था, उसे दो बोरी खाद उपलब्ध कराई जा रही है। उन्हें यह कह कर हटा दिया जा रहा है कि आप अपना काम चलाइए। अन्य किसानों को भी खाद देनी है।

निजी दुकान से कर रहे खरीदारी

जानकारों का कहना है कि जिनके पास एक एकड़ खेत हैं, उन्हें केवल एक बोरी डीएपी देनी है। एक बोरी डीएपी की कीमत 1200 रुपये निर्धारित की गई है। दुबौली के किसान दुर्गा दुबे ने कहा कि मुसैला में एक निजी दुकान से खाद व बीज की खरीदारी किया हूं और अब खेत की बोआई करा रहा हूं। खाद की किल्लत है, तो कौन गोदाम पर लाइन लगाए।

क्‍या कहते हैं किसान

महुई पांडेय के किसान विवेकानंद पांडेय कहते हैं कि बारिश के चलते खेत में पानी लग गया था, जिसके चलते फसल की बोआई प्रभावित हो गई। नजदीक के केंद्र पर खाद लेने के लिए गए तो वहां तरह-तरह के कागजात मांगे गए, दो दिन कागजात लाने में दौड़ते रहे, अंत में सलेमपुर से खाद व बीज की खरीदारी किया हूं। खाद-बीच के चक्कर में चार दिन बोआई प्रभावित हुई है। इसी गांव के विनय कुमार पांडेय ने बताया कि दो दिन गोदाम पर गया, लेकिन खाद उपलब्ध न होने के चलते खाद नहीं मिल पाई। इसके बाद एक प्राइवेट दुकानदार के यहां से खाद व बीज लिया हूं। खाद के लिए हर कोई परेशान है।

समितियों से वापस लौट रहे किसान

खुखुंदू के किसान राजदेव विश्‍वकर्मा बताते हैं कि कई दिनों से साधन सहकारी समिति खुखुंदू पर खाद लेने के लिए जा रहा हूं, लेकिन खाद उपलब्ध न होने की बात कहते हुए वापस कर दिया जा रहा है। गेहूं फसल की बोआई प्रभावित हो गई है। पडौली गांव के किसान परमानंद पाल बताते हैं कि गोदाम पर समय से खाद नहीं मिल रहा है, बोआई प्रभावित होने के चलते किसान प्राइवेट दुकानों पर जा रहे हैं। प्राइवेट दुकानों की खाद पर विश्वास न होने के बावजूद भी किसान खाद की खरीदारी कर रहे हैं।

नहीं है खाद की किल्‍लत

एक तरफ किसानों को खाद नहीं मिल रही है तो दूसरी तरफ इफको के प्रबंधक बीके सिंह कहते हैं कि परसिया गोदाम के साथ ही 1317 मिट्रिक टन खाद जिले में आ गई है। खाद की किल्लत जिले में नहीं है। 122 साधन सहकारी समितियों पर खाद पहुंच गई है और वितरण हो रहा है।

साधन सहकारी समितियों पर खाद नदारद किसान परेशान

रुद्रपुर क्षेत्र के साधन सहकारी समितियों से किसान बैरंग जा रहा हैं । किसान ताला बंद देख मायूस होकर लौट जा रहे हैं। लक्ष्मीपुर सहकारी समिति गाजीपुर भैसहीं,रमपुरवा पचलड़ी,धर्मपुर छपरा,पिड़रा,स्वीकृत पुरा,डाला,छपौली,लक्ष्मीपुर पर किसान खाद न मिलने से काफी परेशान हैं। जिससे किसानों को बोआई करने में देरी हो रही है।

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