कुशीनगर में महावीर की धरती के पुरावशेषों पर संकट

कुशीनगर के फाजिलनगर व आसपास के दो गांवों उस्मानपुर व सठियांव में भगवान महावीर के काल के पुरातात्विक अवशेष बिखरे पड़े हैं यहां के अवशेषों को संरक्षण की दरकार है इतिहासकारों का कहना है कि भगवान बुद्ध इसी मार्ग से कुशीनगर गए थे।

JagranThu, 16 Sep 2021 05:00 AM (IST)
कुशीनगर में महावीर की धरती के पुरावशेषों पर संकट

कुशीनगर : दुनिया को शांति का संदेश देने वाले भगवान महावीर की परिनिर्वाण स्थली पावानगर (फाजिलनगर) के पुरावेशषों पर संरक्षण के अभाव में क्षरण का संकट खड़ा हो गया है। यहां की धरोहरें नष्ट हो रही हैं। उस्मानपुर के बीरभारी टीला व गांव सठियांव के अवशेष को संरक्षण की दरकार है।

उस्मानपुर का बीरभारी टीला तत्कालीन मल्ल राजधानी का हिस्सा माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार कुषाण काल में यह उत्तरी भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र रहा है। इस स्थल का जिक्र महाभारत में भी आया है। इस नगर की महत्ता के कारण ही बुद्ध इस मार्ग से कुशीनगर गए। यहां जो भी पुरावशेष व ऐतिहासिक धरोहरें मिलीं, उनके संरक्षण को लेकर कोई उचित कदम नहीं उठाया गया। यही वजह है कि आज यह संकट खड़ा हुआ है।

इतिहासकार श्यामसुंदर सिंह कहते हैं कि यह भूमि अत्यंत पवित्र है। इसको तीर्थंकर महावीर स्वामी ने महापरिनिर्वाण के लिए चुना था। उनकी स्मृतियां आज भी यहां की खोदाई में मिलती हैं। तमाम ऐसे पुरावशेष हैं जो संरक्षण के अभाव में नष्ट हो रहे हैं।

विधायक गंगा सिंह कुशवाहा ने कहा कि पावानगर के बीरभारी टीला एवं महावीर स्वामी के महापरिनिर्वाण स्थली को पर्यटन क्षितिज पर लाने के लिए अनवरत प्रयासरत हूं। मुख्यमंत्री पर्यटन संव‌र्द्धन योजना से इन स्थलों को विकसित करने के लिए शासन एवं क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी गोरखपुर को पत्र लिखा हूं।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उप अंचल कुशीनगर के संरक्षण सहायक शादाब खान ने कहा कि उस्मानपुर के वीरभारी में पुरातत्व संरक्षण के लिए धन स्वीकृत है। मौके पर मटेरियल भी गिराया गया है, लेकिन बरसात के चलते काम रुका हुआ है। अक्टूबर की शुरुआत से कार्य शुरू हो जाएगा। फाजिलनर व सठियांव टीले के संरक्षण के लिए भी केंद्रीय कार्यालय को पत्र लिखा गया है।

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