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Triple murder case: दिल्‍ली से रंगदारी वसूलने आए थे एक-एक लाख के इनामी अपराधी, पुलिस ने दबोचा Gorakhpur News

एम लाख रूपये के इनामी युवराज सिंह और सन्नी सिंह, जागरण।

गोरखपुर में ि‍तिहरा हत्‍याकांड मामले में सन्नी सिंह उर्फ मृगेन्द्र और युवराज सिंह को एसटीएफ की मदद से गगहा पुलिस ने गिरफ्तार किया। दोनों के ऊपर एक-एक लाख रुपये का इनाम था। रंगदारी वसूलने के लिए दोनों बदमाश दिल्ली से गोरखपुर आए थे।

Satish Chand ShuklaSat, 08 May 2021 12:51 PM (IST)

गोरखपुर, जेएनएन। गगहा क्षेत्र में जिला पंचायत सदस्य के दावेदार रितेश मौर्या, दुकानदार शंभू मौर्या व उनके कर्मचारी संजय पांडेय की हत्या करने वाले सन्नी सिंह उर्फ मृगेन्द्र और युवराज सिंह को एसटीएफ की मदद से गगहा पुलिस ने गिरफ्तार किया। दोनों के ऊपर एक-एक लाख रुपये का इनाम था। दोनों के मददगार सिंहासन यादव की तलाश चल रही है। आरोपितों के पास से नाइन एमएम की एक पिस्टल, दो मैगजीन, नाइन एमएम का छह कारतूस, दो 32 बोर की पिस्टल, चार मैगजीन, 13 कारतूस, एटीएम कार्ड, दिल्ली मेट्रो का यात्री कार्ड और तीन हजार रुपये बरामद हुए। रंगदारी वसूलने के लिए दोनों बदमाश दिल्ली से गोरखपुर आए थे।

इन तीनों की हुई थी हत्‍या

एसएसपी दिनेश कुमार पी ने पुलिस लाइन में प्रेस वार्ता कर यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गगहा क्षेत्र में 10 मार्च को जिला पंचायत सदस्य के दावेदार रितेश मौर्या की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्यारों की तलाश में पुलिस जुटी थी इसी बीच 31 मार्च को रितेश के परिचित दुकानदार शंभू मौर्या और उनके कर्मचारी संजय पांडेय की गोली मारकर बदमाशों ने हत्या कर दी। छानबीन करने पर पता चला कि गगहा, डुमरी के रहने वाले सन्नी सिंह व गगहा कस्बे के युवराज सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर दोनों वारदात को अंजाम दिया है। बदमाशों का सहयोग करने वाले और शरण देने के छह आरोपितों को पुलिस ने जेल भेज दिया था।

दिल्‍ली के अपराधियों के गैंग से जुड़े हैं गोरखपुर के अपराधी

मुख्य आरोपित सन्नी सिंह और युवराज सिंह फरार हो गए। तभी से दोनों की तलाश में एसटीएफ गोरखपुर, क्राइम ब्रांच और गगहा पुलिस लगी थी। छानबीन करने पर पता चला कि सन्नी व युवराज दिल्ली के दरियापुर में बदमाश सोनू व मेरठ के सारिक चौधरी के गैंग से जुड़े हैं। इस समय दिल्ली में ही है। कोरोना कर्फ्यू की वजह से एक सप्ताह पहले कुशीनगर व देवरिया में रहने वाले रिश्तेदार के घर आ गए। शुक्रवार को दोनों की लोकेशन गगहा निवासी कृष्णानंद पांडेय के बगीचे में स्थित ट्यूबेल पर मिली। एसटीएफ के साथ क्राइम ब्रांच व गगहा पुलिस ने घेराबंदी कर दोनों को दबोच लिया।

तिहरे हत्याकांड में समझौता न होने पर की तीन हत्या 

सन्नी और युवराज ने पुलिस को बताया कि वर्ष 2013 में रस्सी खरीदने के विवाद में गगहा के रहने वाले दुकानदार दुर्वासा गुप्ता, उनकी पत्नी और उनके बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सन्नी ने अपने भाई टीका सिंह,सिंहासन यादव, अजय नारायण सिंह के साथ मिलकर वारदात की। घटना में तीन लोग घायल हुए थे।दुर्वासा के बेटे बांकेलाल ने मुकदमा दर्ज कराया है।कोर्ट का चल रहा मुकदमे का ट्रायल अंतिम दौर में है।मुकदमे में समझौता करने के लिए वह बांकेलाल पर दबाव बना रहा था लेकिन रितेश मौर्या और शंभू मौर्या विरोध करने लगे।जिसकी वजह से समझौता नहीं हो पा रहा था। तीहरे हत्याकांड में उसके सहयोगी सिंहासन यादव के कहने पर रितेश, शंभू और उनके कर्मचारी की हत्या कर दी। 

पूर्व विधायक पर जताया भरोसा, दिए असलहे

सन्नी सिंह ने पुलिस को बताया कि सिंहासन यादव ने उससे कहा था कि पूर्व विधायक और बड़हलगंज के एक पूर्व प्रमुख से उसके अच्‍छे संबंध हैं। हत्या करने के बाद दोनों लोग पैरवी करेंगे। मदद के लिए हर जगह खड़े रहेंगे। हत्या करने के लिए सिंहासन ने पिस्टल और कारतूस मुहैया कराया। एसएसपी दिनेश कुमार पी ने बताया कि सिंहासन के पकड़े जाने पर ही पूर्व विधायक व पूर्व प्रमुख की भूमिका तय होगी। 

रेकी करने के बाद की रितेश की हत्या

रितेश की हत्या करने से पहले सन्नी और उसके साथियों ने कई दिन रेकी की। रितेश आठ से नौ बजे के बीच गगहा चौराहे पर जरूर रुकते थे।10 मार्च को सनी और युवराज बाइक से पहुंचे। युवराज बाइक चला रहा था। रितेश की हत्या करने के बाद दोनों सोहगौरा में रहने वाले अपने दोस्त राजू चौधरी के घर चले गए। वहां से दूसरे दिन बाइक से लखनऊ के मोहनलालगंज में मित्र राजू मिश्रा के भाई आदित्य के घर चले गए। एक दिन वहां रुककर असलहा और कारतूस आदित्य के पास छोड़कर बस से मेरठ पहुंचे।

दरियापुर के सोनू के घर मिली शरण 

तिहाड़ जेल में बंद मेरठ के शातिर बदमाश सारिक चौधरी से सनी की अच्‍छी जान पहचान थी। जेल से ही बात करके सारिक ने अपने साथी उस्मान और शाहरुख के साथ दोनों को सोनू के घर भेजा।सोनू भी तिहाड़ में बंद है।10-12 दिनों तक रहकर शंभू मौर्या की हत्या की तैयारी की। तब शाहरूख ने नाइन एमएम की पिस्टल और 10 कारतूस दिए। दोनों को गोली चलवाकर प्रैक्टिस भी कराई। फिर लखनऊ में रखी बाइक और असलहा लेकर गोरखपुर आ गए।

बचाने की कोशिश में गई संजय की जान

31 मार्च की शाम साढ़े सात बजे शंभू मौर्या अपनी दुकान बंद कर रहे थे।तभी दोनों बाइक से पहुंचे।तब युवराज ही बाइक चला रहा था।दुकान पर पहुंचते ही शंभू मौर्या को गोली मार दी। उसे बचाने के लिए कर्मचारी संजय दौड़े तो उन्हें भी गोली मार दी। वारदात के बाद बदमाश राजू चौधरी के पास पहुंचे।अगले दिन उस्मान और शाहरूख के साथ सोनू के दरियापुर, दिल्ली स्थित आवास पर पहुंच गए।वहां कुछ दिनों तक रहने के बाद देवरिया, कुशीनगर सहित कई जगहों पर रहकर व्यापारियों से रंगदारी मांगने की योजना बनाई।

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