इन्‍होंने हिम्मत और संयम से दी कोरोना संक्रमण को मात, घर पर रहकर ऐसे हुए स्‍वस्‍थ Gorakhpur News

गोरखपुर में अधिकांश लोगों ने घर पर रहकर ही कोरोना को मात दे दी। - प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

कोरोना काल में अधिकांश लोग दहशत में बीमार हो रहे हैं। सामान्य बुखार होने पर भी लोग डर जा रहे हैं। वहीं शहर में बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो होम आइसोनेशन में रहकर कोरोना जैसी खतरनाक बीमारी को मात दे रहे हैं।

Pradeep SrivastavaWed, 21 Apr 2021 11:24 AM (IST)

गोरखपुर, जेएनएन। कोरोना वायरस संक्रमण से हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। हालत यह है कि अस्पतालों में मरीजों के लिए वेंटिलेटर खाली नहीं हैं। इससे आम लोगों में दहशत का आलम है। ज्यादा लोग दहशत में बीमार हो रहे हैं। सामान्य बुखार होने पर भी लोग डर जा रहे हैं। वहीं शहर में बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो होम आइसोनेशन में रहकर कोरोना जैसी खतरनाक बीमारी को मात दे रहे हैं। ठीक हो चुके लोग संक्रमित हो चुके दाेस्तों एवं रिश्तेदारों का भी हौसला बढ़ा रहे हैं। उनका मानना है कि इस बीमारी से उबरने के लिए हिम्मत, संयम, समय पर दवा, गर्म पानी, भाप के साथ-साथ अपनों का सहयोग भी जरूरी है।

घर यह रही दिनचर्या

गोरखनाथ के जावेद अहमद ने दस दिन पहले शरीर में दर्द, तेज बुखार, गले में खराश की शिकायत के बाद कोरोना का टेस्ट कराया तो जांच रिपोर्ट पाजीटिव आई। रिपोर्ट आते ही मानो घर में कोहराम मच गया। रिश्तेदारों ने बेहतर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होने का सुझाव दिया। डाक्टर एवं अपनों से सलाह लेने के बाद उन्होंने होम आइसोनेशन में रहने का निर्णय लिया। डाक्टर की सलाह पर समय से दवा ली, प्रतिदिन तीन बार भाप लेने के अलावा गुनगुने पानी का सेवन करते रहे। सुबह-शाम योगा भी किया। इस दौरान परिवार के सदस्य भी हौसलाअफजाई करते रहे। 

तीन दिन में होने लगा आराम

बकौल जावेद, तीन दिन बाद ही बेहतर महसूस करने लगे। दस दिन में पूरी तरह स्वस्थ्य होने का अभास होने लगा। सूरजकुंड निवासी विनोद पांडेय भी अपने हौसले से कोरोना को मात दे चुके हैं। विनोद बताते हैं कि घर में रहने से न सिर्फ तनाव से मुक्ति मिली, बल्कि परिवार के लोगों की संवेदनाएं उन्हें बेहतर और आरामदेह स्थिति में होने का आभास कराया।

डाक्टर के परामर्श पर दवाइयां लेते रहे इसलिए जल्द ही स्वस्थ्य हो गए। मोहद्दीपुर निवासी रमेश सिंह ने गले में तकलीफ के बाद जांच कराई तो रिपोर्ट पाजीटिव आई। परेशान होकर अस्पताल में भर्ती होने के बजाए उन्होंने डाक्टर से मशवरा के बाद होम आइसोनेशन का निर्णय लिया। 

घर में आइसोलेशन में रहकर हो गईं ठीक

उन्होंने बताया कि समय पर दवाइयों के साथ-साथ रोज तापमान, सांस की गति, पल्स और बीपी नपवाते रहे। डाक्टर के बताए गाइडलाइन का पूरी तरह पालन किया जो जल्द स्वस्थ्य हाेने में सहायक रहा। रुस्तमपुर निवासी एकता मिश्रा ने बताया कि जब तक सांस लेने में दिक्कत न हाे तब तक अस्पताल में भर्ती हाेने की आवश्यकता नहीं है।

घर में आइसोलेशन में रहकर वे जल्दी कोरोना से उबर सकीं। दवा के अलावा प्राेटीन युक्त पदार्थ को खाने-पीने में शामिल किया। किताबें पढ़ी और रिश्तेदारों से खूब सारी बातें की जिससे जल्दी स्वस्थ्य होने में बहुत मदद मिली।

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